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विपक्ष की बैठक में झारखंड के मुख्यमंत्री ने अपनी बातों से प्रभाव छोड़ा




  • पेगासूस से कृषि कानून ज्यादा महत्वपूर्ण

  • जनता से जुड़े मुद्दों पर भी मोर्चाबंदी बेहतर

  • पेगासूस को संसद और अदालत में बहस में रखें

  • अब लोग उनके तर्कों को गंभीरता से लेने लगे हैं

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः विपक्ष की बैठक में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की बातों का दूरगामी




प्रभाव पड़ा है। अंदरखाने से अब निकली सूचनाओं के मुताबिक हेमंत सोरेन ने इस बैठक

में जो बातें कही थी, उस पर विपक्ष के अधिसंख्य नेता बाद में सहमत हुए हैं। मिली

जानकारी के मुताबिक हेमंत सोरेन ने इस विपक्ष की बैठक में दो टूक लहजे में कहा था कि

फिलहाल विपक्ष को सम्मिलित तौर पर उन मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, जिनसे

आम आदमी का सीधा सरोकार जुड़ा है। दरअसल श्रीमती सोनिया गांधी की अगुवायी में

होने वाली इस वर्चुअल बैठक में विपक्ष के नेता पेगासूस के मुद्दे पर चर्चा कर रहे थे। साथ

ही यह कहा गया था कि अगले कुछ दिनों में देश के तीन राज्यों में होने वाले विधानसभा

चुनाव के लिए भी विपक्ष को एक संयुक्त मोर्चा तैयार कर लेना चाहिए। इसी बैठक में

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि पेगासूस निश्चित तौर पर महत्वपूर्ण विषय

है लेकिन सभी को यह ध्यान में रखना होगा कि इससे आम आदमी का कुछ लेना देना

नहीं है। इसलिए सम्मिलित तौर पर विपक्ष को उन मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए, जिनसे

जनता का जुड़ाव हो। बैठक के इतने दिनों बाद अब यह राय धीरे धीरे बाहर आ रही है कि

झारखंड के मुख्यमंत्री ने मार्के की बात कही है। पेगासूस जैसे आम आदमी के बाहर के

विषय पर अधिक ध्यान दिये जाने से आम जनता का जुड़ाव नहीं हो पायेगा। कुछ नेता

अनौपचारिक तौर पर यह स्वीकार रहे हैं कि इस मुद्दे पर अधिक शोरगुल से यह मसला भी

राफेल की तरह फेल कर सकता है। मिली जानकारी के मुताबिक श्री सोरेन ने इस बैठक में

कहा है कि पेगासूस का मामला महत्वपूर्ण होने के बाद भी आम आदमी पर कोई असर नहीं




डालता।

विपक्ष की बैठक में हेमंत ने जन मुद्दों पर ध्यान देने की बात कही

इसलिए विपक्ष को कृषि कानूनों पर अधिक ध्यान देना चाहिए, जिससे जनता सीधे तौर

पर जुड़ी हुई है। यह बैठक गत शुक्रवार को हुई थी। वैसे इस विषय पर माकपा के

महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा था कि पेगासूस किस तरीके से लोगों की निजता का

हनन कर रहा है, यह जनता को बताना होगा। लेकिन अब 48 घंटे के बाद यह राय बाहर

आने लगी है कि लोगों को हेमंत सोरेन की राय पसंद आयी है और जनता से जुड़े मुद्दों पर

ही संघर्ष करना ज्यादा फायदेमंद नजर आ रहा है। वैसे पेगासूस को मुद्दा बनाने की

वकालत करने वाले अनेक नेताओं में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी भी थे। जिन्होंने

यह कहा कि इस किस्म की जासूसी के जरिए भाजपा पूरे देश में निरंकुशता को बढ़ावा दे

रही है। विपक्ष के नेताओं की यह बैठक तीन राज्यो में होने वाले चुनाव के पूर्व विपक्ष के

साझा मोर्चा को लेकर है। उत्तर प्रदेश के अलावा उत्तराखंड और पंजाब में विधानसभा

चुनाव होने वाले हैं। विपक्ष के नेताओँ की बैठक समाप्त होने बाद अब यह राय बाहर आने

लगी है कि पेगासूस महत्वपूर्ण मुद्दा होने के बाद भी राजनीतिक दलों को आम जनता से

जुड़े मुद्दों पर ही आगे बढ़ना चाहिए। इस लिहाज से झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का

राजनीतिक कद फिर से बढ़ने लगा है, जिन्होंने जनता से जुड़े मुद्दों पर मैदान में उतरने की

बात कही है। वैसे विपक्ष पेगासूस को भी महत्वपूर्ण मुद्दा मानता है लेकिन अधिसंख्य लोग

इसे संसद और अदालत का विषय मान रहे हैं। जिससे जनता का सीधे तौर पर कुछ लेना

देना नहीं है।



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