नेपाल की बारिश से दियारा के गांवों में घुसा बाढ़ का पानी

नेपाल की बारिश से दियारा के गांवों में घुसा बाढ़ का पानी

मवेशियों को लेकर ग्रामीण कर रहे पलायन

मधुबनीः नेपाल की बारिश के बाद गंडक बराज से चार लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़ा

गया है। जिस कारण दियारा के निचले क्षेत्रों में बाढ़ का पानी भर चुका है। ग्रामीणों को

मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। घरों में पानी घुस जाने की वजह से इन्हें खाने पीने

की भी मुश्किलें बढ़ गई है। साथ ही मवेशियों को चारा भी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।

मधुबनी प्रखंड के 2 पंचायत सीसही एवं चिउरही के लोग बाढ़ के प्रभाव में है। सिसई

पंचायत के पंचायत समिति सदस्य जयप्रकाश यादव ने बताया कि ग्रामीणों के घर में बाढ़

का पानी घुसने की वजह से लोगों को इस तरह की परेशानी उठानी पड़ रही है। उन्होंने कहा

कि अंचल कार्यालय के द्वारा नाव की भी ब्यस्तथा नहीं किया गया था। जिसके सहारे

ग्रामीण सुरक्षित ऊंचे स्थान पर जा सके हैं। उन्होंने बताया कि अभी तक अंचल कार्यालय

के द्वारा इन बाढ़ पीड़ितों का हाल खबर पूछने वाला कोई नहीं पहुंचा । जिसके कारण

ग्रामीणों में काफी आक्रोश है।

मवेशियों को साथ लेकर ऊंचाई पर जा रहे लोग

ग्रामीण बाढ़ के कारण बाल बच्चे व मवेशियों के साथ ऊंचे स्थानों पर पलायन करने के

लिए मजबूर हैं । बाढ़ की वजह से इन पंचायत के ग्रामीणों की प्रतिवर्ष दयनीय स्थिति

बनी रहती है। वर्षो से गण्डक नदी के कटाव से विस्थापित होने वाले लोगो का अब जीवन

समापत होने के कगार पर है। लेकिन आज बढ़ की स्थिति जस की तस बनी रहती है।ऐसे

ही रहा तो आने वाली पीढ़ी भी इसी विस्थापन और पुनः घर वापसी में ही जीवन जीने को

मजबूर होकर रह जायेगी।

नेपाल की बारिश का असर कि थाना में भी पानी घुसा

सुगौली, पू. चंपारण : नेपाल की बारिश के चलते सिकरहना नदी में अचानक बढ़ी गई है।

जिससे थाना परिसर में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। वहीं गांवों को भी बाढ़ ने अपनी

आगोश में ले लिया है। जिससे ग्रामीण सुरक्षित स्थानों की तलाश में घर से पलायन करना

शुरू कर दिए हैं। कई लोग एनएच किनारे टेंट बना कर रहने को विवश हैं। नगर पंचायत के

विशुनपुरवा, नयका टोला, निमुई, बेलाइठ, खाप टोला, अमीर खां टोला सहित कई जगहों

पर बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया। वहीं प्रखंड के भेड़िहारी,रौशनपुर, सपहा, मल्लाह टोली,

बुच्चा लालपरसा, शुकुल पाकड़ सहित कई गांव में बाढ़ आते ही बाढ़ पीड़ित अपने परिवार

के साथ जरूरी सामानों के साथ सुरक्षित स्थान की ओर पलायन करने लगे। घरों में पानी

घुस जाने के कारण लोगों को घर को छोड़ना मजबूरी हो गई। बेघर हुए लोग अपनी जान

की रक्षा के लिए ऊंचे जगहों पर शरण ले रहे है। बाढ़ आने के पूर्व प्रशासन के द्वारा टूटे

रिंग बांधो का मरम्मत नही कराया गया। सिकरहना नदी के किनारे बसे गांव के कई घर

ध्वस्त हो गए । एक बार फिर बाढ़ पीड़ितों के सामने बाढ़ ने जीवन को संकट में डाल दिया

है।

कई अन्य नदियों का जलस्तर भी बढ़ता जा रहा है

सिकरहना नदी का बढ़ रहा जल स्तर से कई गांव को बाढ़ अपने चपेट में लेने के लिए

व्याकुल है। प्रखंड के भवानीपुर, अमीर खान टोला,मधुमालती सहित कई जगहों पर हो रहे

कटाव के चलते लोग अपने अपने घर के समान को हटाने में लगे हैं। बाढ़ ने ग्रामीणों के

जीवन को संकट में डाल दिया है।सबसे बड़ी समस्या पशुपालकों के लिए भी हो गया है।

पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था कैसे करे। बाढ़ व कटाव ने कई लोगो का आशियाना छीन

लिया। जिससे उन्हें खुले आसमान के नीचे ही गुजर बसर करना पड़ेगा। पीड़ित परिवारों के

सामने भुखमरी की स्थिति आ गई है।

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