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स्वास्थ्य अध्ययनों के मुताबिक लंबे समय पर बैठे रहना खतरनाक




  • चार घंटा टीवी देखना इनमें सबसे खतरनाक

  • टीवी देखना ही है तो खड़े होकर भी देखिये

  • अकाल मृत्य को बढ़ाता है लगातार बैठे रहना

  • सेहत के लिए बीच बीच में चलते फिरते रहिये


प्रतिनिधि

नईदिल्लीः स्वास्थ्य अध्ययनों का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है।

वैज्ञानिक इसके लिए लोगों की आदतों और चिकित्सा शास्त्र को मिलने वाली

नई नई चुनौतियों का लगातार विश्लेषण करते आ रहे हैं।

इस बार यह निष्कर्ष निकाला गया है कि लंबे समय तक काम अथवा निठल्ला बैठना

दोनों ही स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है।


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पूरा दिन बैठकर काम करना और घर में बैठकर टीवी देखना दोनों ही स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डाल रहे हैं।

तमाम परिस्थितियों और लोगों के बैठने की आदतों एवं मुद्राओं का

अध्ययन करने के बाद ही वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं।

उनलोगों ने साफ साफ चेतावनी दी है कि इससे कई किस्म की परेशानियां पैदा हो सकती हैं।

अमेरिकी हार्ट एसोसियेशन की पत्रिका में इस बारे में जानकारी प्रकाशित की गयी है।

इसमें स्पष्ट किया गया है कि काम के लिए किसी ऑफिस में लगातार बैठना भी बुरा है

लेकिन उससे भी ज्यादा खतरनाक निठल्ला बैठकर टीवी देखना है।

वैसे ऑफिस में बैठकर काम करने की स्थिति का अध्ययन करते हुए वैज्ञानिकों ने

बार बार यह दलील सुनी है कि लोग अपनी नौकरी की मजबूरी बताकर ऐसा कर रहे हैं।

लेकिन वैज्ञानिकों ने इसके खतरों के साथ साथ इससे बचने के उपाय भी बताये हैं।

इंसानों की यह बैठने की आदत उनमें हृदय की बीमारी और मोटापा पैदा करता है।

इससे इंसान की आयु भी तेजी से घटती है।

खासकर टीवी देखने में इसके ज्यादा खतरे सामने आये हैं।

इस कड़ी को समझने के लिए शोध कर्ताओं ने साढ़े तीन हजार से अधिक लोगों का सर्वेक्षण किया था।

स्वास्थ्य अध्ययनों में हरेक की आदतों को भी नोट किया गय




इन तमाम लोगों की हर आदत को दर्ज किया गया था।

उनके काम के घंटे और टीवी देखने की आदतों के साथ साथ कितने समय पर

वह लगातार बैठे रहते हैं, इसके विवरण भी नोट किये गये थे।

इन्हीं आंकड़ों के बाद लोगों की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी भी जुटायी गयी थी।

इनलोगों से मिले आंकड़ों के आधार पर उनके स्वास्थ्य की स्थिति का गहन विश्लेषण किया गया है।

इसी आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया है कि जो लोग हर रोज चार घंटा

या उससे अधिक समय तक टीवी देखते हैं, उनमें हार्ट अटैक का खतरा दोगुना बढ़ जाता है।

इसी अभ्यास की वजह से ह्दय संबंधी बीमारियों का खतरा भी 50 प्रतिशत तक

अधिक होता है और समय से पूर्व मौत होने के प्रमुख कारणों में से एक यह होता है।

चार घंटा या उससे अधिक एवं दो घंटा या उससे कम टीवी देखने वालों के बीच

यह तुलनात्मक अध्ययन किया गया था।

इसी आधार पर शोधकर्ता इस नतीजे पर भी पहुंचे है कि कुर्सी पर बैठकर लगातार काम करने के मुकाबले बैठकर टीवी देखना ज्यादा खतरनाक है।

लेकिन लगातार कुर्सी पर बैठने के खतरे निश्चित तौर पर इंसान को कई तरीकों की बीमारियों की तरफ धकेल देते हैं।

टीवी के सामने बैठकर गरिष्ठ भोजन भी परेशानी बढ़ाता है

शोध में यह भी पाया गया है कि दिन के अंत में जब लोग अपने घरों में बैठकर आराम से टीवी देखते हैं तो अक्सर ही वे कुछ न कुछ खाते भी रहते हैं।

यह भी बीमारी को बढ़ावा देने वाला कारण बनता है।

अधिक खाने और सिर्फ बैठे रहने की वजह से इस किस्म के भोजन से शरीर का वजन और हृदय पर खून पंप करने का बोझ बढ़ने लगता है।

शोध के दायरे में यह भी पाया गया है कि टीवी पर बैठकर अथवा ऑफिस का काम निपटाने के बीच जल्दी से खाना खाने के दौरान लोग गलत किस्म का ही भोजन ग्रहण करते हैं।

सोने से पहले खाया यह भोजन एक गलत आदत है और यह सोने के बाद भी लोगों के शरीर के अंदर प्रतिकूल प्रतिक्रिया पैदा करता है।

वैज्ञानिकों ने इससे बचाव के तरीके भी बताये हैं। उनके मुताबिक टीवी देखने वालों को अपना बैठकर टीवी देखने का समय कम कर देना चाहिए।

यदि टीवी देखने की आदत नहीं छूट रही है तो बैठने के बदले कुछ न कुछ कसरत करते हुए यह मनोरंजन करना चाहिए।

इससे शरीर के आंतरिक अंगों में गतिविधियां होती रहती है।

इस अभ्यास से मोटापा भी नहीं बढ़ता।

दूसरी तरफ ऑफिस में लगातार काम करने वालों को भी बताया गया है कि

थोड़े थोड़े समय के अंतराल में बैठने के बाद उठ जाने

और चल फिर लेने से इस खतरे को कम किया जा सकता है।

इससे शरीर में गतिशीलता बनी रहती है।


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Rashtriya Khabar


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