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हेड ट्रांसप्लांट से मरा हुआ शख्स भी हो सकता है जिंदा




  • एडवांस टेक्नोलॉजी की मदद से हेड ट्रांसप्लांट किया जा सकता है

  • अमेरिका ने  इस रिसर्च को लागू करने की नहीं दी अनुमति

  • ब्रिटेन के एक पूर्व न्यूरोसर्जन और रोबोटिक्स एक्सपर्ट ने किया दावा

प्रतिनिधि

नई दिल्ली: हेड ट्रांसप्लांट के जरिए किसी मृत व्यक्ति को भी जीवित किया

जा सकता है। ऐसा दावा ब्रिटेन के एक पूर्व न्यूरोसर्जन और रोबोटिक्स

विशेषज्ञों का है। यूं तो हम जानते हैं कि जन्म और मृत्यु पर किसी का जोर

नहीं है। क्योंकि ये भगवान के हाथ में होती है। मगर कुदरत के इस करिश्मे

को ब्रिटेन के वैज्ञानिक चैलेंज कर रहे हैं। दरअसल वहां के वैज्ञानिकों ने दावा

किया कि हेड ट्रांसप्लांट के जरिए मृत व्यक्ति को जिंदा किया जा सकता है।

इसके अलावा जिनके हाथ-पैर कट गए हैं उन्हें भी इससे फायदा हो सकता है।

ब्रिटेन के एक पूर्व न्यूरोसर्जन और रोबोटिक्स एक्सपर्ट ने इस बारे में नई बात

की है। ब्रिटेन की हल यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल्स के पूर्व क्लिनिकल प्रमुख

डॉ. ब्रूस मैथ्यू ने दावा किया है कि अगले 10 सालों में हेड ट्रांसप्लांट संभव

होगा। इसमें रोबोटिक्स, स्टेम सेल ट्रांसप्लांट्स और नर्व सर्जरी की एडवांस

टेक्नोलॉजी मदद करेगी। हालांकि, यूरोप और अमेरिका में हेड ट्रांसप्लांट के

रिसर्च को नैतिक कारणों से इसे लागू करने से मना कर रहे हैं। मगर चीन ने

इसके लिए अनुमति दे दी है।

हेड ट्रांसप्लांट का दावा चीनी वैज्ञानिक द्वारा 

मालूम हो कि साल 2017 में जिआओपिंग रेन नाम के चीनी साइंटिस्ट ने दावा

किया था कि उन्होंने एक सफल हेड ट्रांसप्लांट किया है। उन्होंने एक मृत

व्यक्ति के सिर को दूसरे मृत व्यक्ति की बॉडी पर ट्रांसप्लांट किया था। चीन

के हार्बिन मेडिकल यूनिवर्सिटी में की गई सर्जरी में 18 घंटे लगे थे। सर्जरी के

बाद स्पाइन,नर्व्स और ब्लड वेसल्स को दोबारा जोड़ा गया था।

वैसे जेनेटिक्स और स्टेम सेल के अनुसंधान पर वैज्ञानिक खुद भी बहुत

संभलकर काम कर रहे हैं। कई देशों में इस किस्म के शोध पर कड़े प्रतिबंध

लगे हुए हैं। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि अति उत्साह में किये गये किसी

अनुसंधान से कोई ऐसा विकार न पैदा हो जो बाद में पूरी दुनिया को प्रभावित

कर सके। इस विधि से अति शक्तिशाली मानव तैयार करने की सैद्धांतिक

तकनीक विकसित होने के बाद भी उसे अब तक आजमाया नहीं गया है।

ख्यातिप्राप्त वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंस ने अपनी मौत के पहले ही इस बारे में

आगाह किया था। उन्होंने कहा कि अति उत्साह में इस किस्म का महामानव

तैयार करने से इंसान की वर्तमान प्रजाति ही पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।

नया इंसान इस पीढ़ी के इंसान से शक्तिशाली और अधिक बुद्धिमान होगा।

इसलिए वह अपने तौर पर शीघ्र ही अपनी प्रजाति को आगे बढ़ाते हुए इस

प्रजाति को पूरी तरह समाप्त कर देगा।



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