fbpx

सरकारी आवास नहीं मिला तो शौचालय को बनाया ठिकाना

सरकारी आवास नहीं मिला तो शौचालय को बनाया ठिकाना
  • दिव्यांगों के प्रति सरकारी बेरुखी का नमूना

  • सपत्नीक इसे ही बनाया है अपना आशियाना

  • सरकारी पेंच की वजह से पेंशन भी वर्षों से रुका पड़ा

अमित कुमार नाग

जामताड़ाः सरकारी आवास काफी प्रयास करने के बाद भी नहीं मिल पाया। यह स्थिति

तब है जबकि पंचायती राज व्यवस्था के तहत गांव स्तर पर लोगों को सुख सुविधा मुहैया

कराने के लिए की गई थी। झारखंड में पंचायती राज व्यवस्था लागू हुए 10 साल से अधिक

समय हो रहा है लेकिन अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को गरीबों को दिव्यांगों को

समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है।

वीडियो में देखिये इस दिव्यांग की मजबूरी

पंचायती राज व्यवस्था के तहत चुने गए लोग लोगों की मदद के बजाय अपना काम

निकाल कर चुप रहते हैं। सरकार दिव्यांग जनों को सरकारी योजनाओं में प्राथमिकता के

आधार पर जोड़ने का दावा कर रही है। लेकिन नाला विधानसभा में कई ऐसे दिव्यांग जन

है जो सरकारी लाभ से अब तक वंचित हैं। ऐसा ही मामला कुंडहित प्रखंड के भेलुवा

पंचायत का है। जहां नाटुलतला गांव निवासी दिव्यांग भूतनाथ घोष सरकारी योजनाओं

का मोहताज बना हुआ है ।भूतनाथ घोष को आंखों से नहीं दिखाई पड़ता है। हालांकि उसे

पहले दिव्यांग पेंशन का लाभ मिलता था लेकिन आधार कार्ड ना होने के कारण वह पेंशन

भी बरसों से मिलना बंद हो चुका है सबसे बड़ी बात यह है कि उसे आज तक सरकारी

आवास का लाभ नहीं मिला है। वह और उसकी पत्नी किसी तरह शौचालय को आशियाना

बनाकर गुजर बसर कर रहा है। एक शौचालय के सामने चूल्हा बना कर उसकी पत्नी खाना

पकाते हैं। हालांकि भूतनाथ घोष दिव्यांग होने के बावजूद काम कर अपने परिवार का

भरण पोषण कर रहा है।वही भूतनाथ घोष के भाई का पीएम आवास बना है। बावजूद वह

अपने मां और भाई से अलग रहता है।

सरकारी आवास के लिए लगातार कोशिश करता रहा है

हालांकि मां और भाई की जिद के कारण वह अपने भाई के पीएम आवास में सर तो छुपाता

है। लेकिन अपने और अपनी पत्नी का सामान शौचालय में ही रखता है। कभी कभार

शौचालय में ही दिन गुजरता भी है। मां और भाई की जिद के बावजूद वह साथ रहने को

राजी नही है। इस संबंध में दिव्यांग भूतनाथ घोष ने कहा कि उसको पहले पेंशन मिलता

था अभी बंद है और आज तक उसके नाम से सरकारी आवास नहीं बना है। वही पत्नी को

भी पेंशन नहीं मिलता है ।इस संबंध में ग्रामीणों का कहना है कि भूतनाथ घोष दिव्यांग है

इसको सरकारी आवास प्राथमिकता के तौर पर मिलना चाहिए। पेंशन के लिए भी इसको

कोई मदद नहीं कर रहा है। वही इस संबंध में उप मुखिया निखिल माजि ने कहा कि

भूतनाथ घोष को सरकारी सहायता प्राथमिकता के तौर पर मिलनी चाहिए। बहरहाल जो

भी हो दिव्यांगों के लिए सरकार सरकारी योजनाओं का पिटारा खोल कर रखती है ।लेकिन

भूत नाथ घोष जैसो को सरकारी योजना का लाभ नहीं मिलना कहीं ना कहीं पंचायती राज

व्यवस्था की जमीनी हकीकत को बयां करता है।

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
Rkhabar

Rkhabar

... ... ...
error: Content is protected !!
%d bloggers like this: