हाईबुसा 2 ने उल्कापिंड पर खोजा गहरा काला धब्बा

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  • उल्कापिंड रिगुयू पर ठीक ठाक काम कर रहा है जापान का हाईबुसा 2
  • धब्बे की वजह समझना चाहते हैं वैज्ञानिक
  • यान ने इस पर दागी है पांच ग्राम की गोली
  • अगले चरण में ढाई किलो का विस्फोट होगा

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः हाईबुसा 2 ने उल्कापिंड रिगुयू पर उतरने के बाद

अपने कैमरे में एक गहरे काले रंग के धब्बा कैद किया है।

अब तक वैज्ञानिक यह समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर यह काला धब्बा किस चीज का हो सकता है।

वहां अपने दो छोटे यान उतारने के बाद जापान की अंतरिक्ष एजेंसी जाक्सा का

यह यान खुद भी उल्कापिंड पर उतर चुका है।

जानकारी के मुताबिक इस यान ने उल्कापिंड की सतह पर एक पांच ग्राम की गोली भी दागी है।

गोली दागकर यान पीछे हट गया था ताकि यान को कोई नुकसान नहीं पहुंचे।

वैसे गोली दागने और गोली दागकर कितना नमूना मिल पाया है, इस बारे में अब तक कोई जानकारी नहीं मिल पायी है।

अब काला धब्बा नजर आने की वजह से यह उम्मीद जतायी जा रही है कि यह शायद उसी गोली के चलने का निशान भी हो सकता है। कुछ लोग इसे उल्कापिंड पर यान के उतरने का निशान भी मान रहे हैं।

उल्कापिंड की सतह काफी उबड़ खाबड़ होने की वजह से हाईबुसा का कार्यक्रम काफी पीछे टला है।

इस यान को पिछले साल ही वहां से नमूना एकत्रित करना था।

लेकिन यान को किसी समतल जगह पर उतारने के लिए वहां काम करने वाले रोबरों और लैंडर के आंकड़ों की मदद लेकर स्थान निर्धारित करने में काफी समय लग गया।

अन्यथा यान उतारते वक्त ही वहां के उबड़ खाबड़ इलाके में क्षतिग्रस्त हो जाता।

अब वैज्ञानिक यह मान रहे हैं कि रिगुयू पर गोली दागे जाने से उसके कुछ छोटे हिस्से अवश्य ही छिटके होंगे, जिन्हें हाईबुसा ने अपने पकड़ा होगा।

इसके लिए अंतरिक्ष यान में एक सींगनुमा यंत्र लगाया गया है।

हाईबुसा 2 के जिम्मे है अन्य वैज्ञानिक अनुसंधान भी

अब काला धब्बा नजर आने की वजह से इस धब्बे के कारणों की भी तलाश की जा रही है।

लेकिन कितना नमूना अब तक मिल पाया है इसकी जानकारी नहीं है।

अंतरिक्ष यान ने जो तस्वीर भेजी है, उसमें यान का अपना प्रतिबिंब भी दिखाई पड़ रहा है।

इसलिए यह संभावना भी जतायी गयी है कि कहीं यान के उतरने के दौरान उसके इंजनों के प्रभाव की वजह से उल्कापिंड पर यह दाग तो नहीं पड़ा।

हाईबुसा 2 ने यह तस्वीर तब खींची जब वह उल्कापिंड से करीब 25 मीटर की ऊंचाई पर था।

इस दाग के विश्लेषण के साथ ही वैज्ञानिक इस उल्कापिंड पर होने वाले अन्य प्रयोगों पर जुट गये हैं।

इसके तहत भविष्य में एक सीमित विस्फोट करना भी शामिल है।

इसके लिए यान पर पहले से ही ढाई किलो विस्फोटक का एक बम भेजा गया है।

यह विस्फोट करने के पूर्व खुद को सुरक्षित रखने के लिए अंतरिक्ष यान उल्कापिंड के दूसरे छोर पर चला जाएगा।

विस्फोट होने के करीब एक सप्ताह बाद वह वापस लौटकर उल्कापिंड की सतह के अंदर की धरती के नमूने एकत्रित करेगा।

विस्फोट इसी वजह से किया जा रहा है ताकि उल्कापिंड की सतह के अंदर की स्थिति क्या है, इसका पता लगाया जा सके।

वैज्ञानिकों का अनुमान है कि लगातार विकिरण के प्रभाव में होने की वजह से इसकी सतह की संरचना शायद बदल गयी  है।

विस्फोट से जो अंदर की मिट्टी अथवा पत्थर बाहर निकलेंगे, वे विकिरण के प्रभाव से मुक्त अथवा कम प्रभाव के विकिरण वाले होंगे।

इससे उल्कापिंड की वास्तविक संरचना का पता चल पायेगा।

अप्रैल में हाईबुसा यहां पर गहराई में खनन भी करने वाला है।

यह सारा काम पूरा करने के बाद वहां के नमूने लेकर इस यान को वर्ष 2020 में वापस पृथ्वी पर वापस लौट आना है।

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