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हरसिमरन कौर बादल केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देंगी

  • अन्य दलों ने कहा नौटंकी है यह मंत्री पद छोड़ना

  • प्रस्तावित किसान विरोधी बिल को समर्थन नहीं

  • एनडीए में अब चौड़ी होती विभाजन की दरार

विशेष प्रतिनिधि

नईदिल्लीः हरसिमरन कौर बादल ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से त्यागपत्र देने का एलान कर

दिया है। दरअसल उसकी तरफ से पार्टी ने इसकी घोषणा की है। इसमें बताया गया है कि

प्रस्तावित किसान विरोधी बिल की वजह से वह केंद्रीय मंत्रिमंडल से त्यागपत्र देने जा रही

हैं। दूसरी तरफ अन्य विरोधी दलों ने इस फैसले को नौटंकी करार दिया है। इन दलों का

आरोप है कि अगर वाकई अकाली दर किसानों के समर्थन में होती तो उसे एनडीए और

भाजपा से अपना रिश्ता पहले तोड़ना चाहिए था। सिर्फ एक मंत्री के त्यागपत्र के बाद भी

भाजपा से दोस्ती बनाये रखना उसकी राजनीतिक चाल भर है। हरसिमरन कौर के पति

और अकाली दल के प्रमुख सुखबीर बादल ने उनके त्यागपत्र का एलान कर निश्चित तौर

पर एनडीए के अंदर विभाजन की खाई को चौड़ी होते देखने का अवसर प्रदान किया है।

कुछ लोग मानते हैं कि प्रस्तावित बिल के बारे मे पंजाब के किसानों की प्रतिक्रिया को

भांपकर ही अकाली दल ने ऐसा कदम उठाया है क्योंकि पंजाब के किसान इस बिल से

अत्यधिक नाखुश हैं।

हरसिमरन कौर के इस्तीफे की भी आलोचना हो रही

जब इस बिल के मसविदे पर चर्चा हो रही थी तो अकाली दल ने इसका समर्थन किया था।

राजनीति के जानकार मानते हैं कि दरअसल उस वक्त शायद अकाली दल को इस बात का

एहसास नहीं था कि पंजाब के किसानों के बीच इस बिल को लेकर इतनी तीखी प्रतिक्रिया

होगी। लेकिन जैसे जैसे पंजाब के किसानों की नाराजगी का बात जाहिर होती चली गयी

अकाली दल ने भी बिल पर पहले समर्थन देने के बाद अपने पैर पीछे खींच लिये। अब यह

एलान किया गया है कि अकाली दल इस बिल के खिलाफ है। संसद में इस पर अकाली दल

के पीछे हटने की विपक्षी दलों ने कड़ी आलोचना भी की है। लेकिन फिलहाल जो स्थिति है,

उसके मुताबिक भाजपा अपने इस सुधार बिल से पीछे हटने को तैयार नहीं है। लिहाजा

ऐसा हो सकता है कि पंजाब में अपनी राजनीति जमीन बचाने के लिए अंततः अकाली दल

भाजपा से अपना रिश्ता ही खत्म कर ले।

अमरिंदर सिंह ने कहा बहुत देर कर दी फैसले में 

धार्मिक बेअदबी मामले में सुखबीर हताशा में झूठ का सहारा ले रहे : अमरिंदरइस पूरे प्रकरण में पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि हरसिमरन कौर

का फैसला काफी देर से आया है। अगर अकाली दल को पहले से किसानों के हितों की चिंता

होती तो जब कांग्रेस सहित अन्य दल बिल के विरोध में दलीलें दे रहे थे तो अकाली दल को

उसी समय यह फैसला लेना चाहिए था। अब तो अकाली दल ने फैसला लेने में काफी देर

कर दी है और पंजाब के किसान यह अच्छी तरह समझ चुके हैं कि अकाली दल का राज्य

के किसानों के साथ कोई लगाव नहीं है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर वाकई देर

से ही अकाली दल को यह बात समझ में आयी है तो उसे एनडीए से खुद को अलग कर

लेना चाहिए था। लेकिन अकाली दल ने ऐसा नहीं किया है, इसलिए हरसिमरन कौर के

त्यागपत्र को गंभीरता से नहीं लिया जा सकता।


 

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