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हरमू रोड काली पूजा स्वागत समिति की प्रतिमा विसर्जन




  • कोरोना से मुक्ति की मांग के साथ विदा किया माता को

  • आनलाइन महाआरती में देश विदेश के भक्त शामिल

  • कोरोना गाइड लाइन का पालन करते हुए पालकी यात्रा

राष्ट्रीय खबर

रांचीः हरमू रोड काली पूजा स्वागत समिति की काली प्रतिमा का विसर्जन आज पूर्व

निर्धारित कार्यक्रम के तहत संपन्न हुआ। कोरोना गाइड लाइन के तहत इस बार प्रतिमा

का आकार भी छोटा रखा गया था। इस वजह से संस्थापक अध्यक्ष प्रेम वर्मा और पूजा

समिति के अन्य सदस्य इसे अपने कंधे पर लेकर ही निकले। आम तौर पर सिर्फ रांची

दुर्गाबाड़ी में दुर्गा प्रतिमा का विसर्जन कंधे पर किया जाता है। शाम को पूजा पंडाल से

प्रतिमा का विसर्जन जुलूस निकाला गया। हरमू बाई पास रोड पर इस दौरान वाहनों की

काफी भीड़ होने की वजह से विसर्जन जुलूस को काफी सावधानी के साथ निकाला गया।

इस दौरान कोरोना गाइड लाइन का ध्यान रखते हुए सदस्यों ने भी सामाजिक दूरी के

नियमों का पालन करते हुए क्रमवार तरीके से प्रतिमा को अपने अपने कंधे पर लिया।

उल्लेखनीय है कि इस बार की पूजा में भव्य महाआरती के बदले वर्चुअल महाआरती का

आयोजन किया गया था। वरना यहां की महाआरती देखने दूर दराज से भी लोग आया

करते थे। वैसे ऑनलाइन महाआरती का आयोजन करने का लाभ यह हुआ कि इसमें देश

विदेश के अन्य लोग भी शामिल हुए थे।  वैसे महाआरती के बाद भोग का वितरण नहीं

होने के बाद भी ग्यारह हजार महिलाओं के बीच मां की पूजा के सिंदूर की डिब्बी पहुंचायी

गयी थी। इस दौरान भीड़ लगाने पर प्रतिबंध होने के बाद भी कल से आज के विसर्जन

जुलूस के पहले भी अनेक भक्त यहां मां के दर्शन करने पहुंचे थे।

हरमू रोड काली पूजा पंडाल  से बड़ा तालाब पहुंचा जुलूस

जगत् जननी माँ काली की विसर्जन यात्रा में शामिल काली पूजा स्वागत समिति, हरमू

रोड, रांची के श्रद्धालुओ ने माँ काली को विदा करते हुये माँ से कोरोना आपदा से मुक्ति और

जगत् कल्याण की करूण- कामना की। शासकीय पूजन दिशा निर्देश का पालन करते हुये

संस्थापक अध्यक्ष प्रेम वर्मा के नेतृत्व में माँ काली की पालकी विसर्जन यात्रा पूरे भक्ति

भाव से निकाली गई। पालकी विसर्जन शोभा यात्रा  को भक्तों ने पंडाल से करूण भाव से

विदाई दी। शासकीय निर्देश का अनुपालन सुनिश्चित करते हुये काली पूजा स्वागत

समिति हरमू रोड रांची के सीमित सदस्यों ने माँ की पालकी अपने कंधों पर उठाकर

जयकारा लगाते हुये बड़ा तालाब ले गये। तालाब तट पर पूरे वैदिक विधान से आरती कर

मूर्ति का विसर्जन किया गया।

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