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हरमू रोड इलाके में दुर्गा पूजन की सामाजिक विधियों का पालन होगा

  • कुमारी कन्याओं का पूजन और सम्मान का फैसला

  • नारी के सम्मान के बिना सृष्टि ही अधूरी है

  • नवमी के बदले हर दिन चलेगा कार्यक्रम

  • पैर धुलाकर उनका सम्मान किया गया

राष्ट्रीय खबर

रांचीः हरमू रोड इलाके में कुमारी कन्याओँ का पूजन आज से प्रारंभ हो गया। पुरानी रांची

में आयोजित मुहल्ला विकास समिति के कार्यकर्ताओं की बैठक में यह फैसला लिया गया।

आज की बैठक में यह तय किया गया कि वहां 101 कुवांरी कन्याओं का न सिर्फ पूजन

किया जाएगा बल्कि उनके पैर धोकर, चुनरी ओढ़ाकर स्वच्छ भोजन भी कराया जाएगा।

हरमू रोड में इस कार्यक्रम की आज से शुरुआत भी कर दी गयी है।

आज की बैठक में मुख्य तौर पर इस बात की चर्चा हुई कि जिस दौर में यह समाज गुजर

रहा है, उसमें महिलाओं के प्रति सम्मान का भाव जागृत करने के लिए दुर्गा पूजा का

अवसर बिल्कुल सही है। वैसे भी इस पूजा के दौरान कुंवारी कन्याओं का पूजन इस विधि

की एक अनिवार्य विधान के तौर पर स्वीकृत है। सामान्य तौर पर नवरात्र की नवमी के

मौके पर ही कन्या पूजन किया जाता है। लेकिन हरमू रोड री बैठक में मौजूद सदस्यों ने

यह महसूस किया कि समाज में जिस किस्म की विकृतियां आयी हैं, उसमें इसका व्यापक

प्रसार किये जाने की सख्त आवश्यकता है ताकि पूरे समाज में आधी आबादी की भूमिका

और समाज में उनका सम्मान फिर से स्थापित हो सके। इसी पहल की शुरुआत आज से

ही कर दी गयी है। इस बैठक में कई वक्ताओं ने इस बात को रेखांकित किया कि जिस

समाज में नारी का सम्मान नहीं हो तो सृष्टि का कोई औचित्य ही नहीं रह जाती है।

हरमू रोड इलाके में  भी गाइड लाइन की आलोचना

इसलिए महिलाओं के सम्मान की रक्षा के लिए कन्या पूजन के कार्यक्रम को किया जाना

चाहिए। दूसरी तरफ दुर्गा पूजा के गाइड लाइनों पर भी सरकार से नाराजगी व्यक्त की

गयी।  यह सवाल उठा कि इसके जरिए वर्तमान राज्य सरकार क्या संदेश देना चाहती है।

श्रद्धालुओं की नाराजगी इसलिए जायज है क्योंकि अधिक उम्र के अनेक लोग अब पूजा

पंडालों तक नहीं जाते। वे तो पूजा पंडाल से उच्चारित होने वाले शब्दों और मंत्रों के साथ

साथ घर पर बैठकर अपनी पूजा संपन्न करते हैं। राज्य सरकार ने ऐसे लोगों को इस

धार्मिक पर्व के पालन से रोक दिया है। वैसे भी पंडालों पर भीड़ लगाने की पाबंदी है तो

अनेक वैसे लोग, जो सरकार के निर्देशों का मन से पालन करते हैं, इस बार पंडालों पर जाने

से परहेज करेंगे। वरना अन्य समय में तो पूजा के चार दिन पूजा पंडालों में ही दिन

गुजारने की आदत ही लोगों को रही है। ऊपर से भोग वितरण पर भी दुर्गा पूजा गाइड

लाइन के तहत इस बार रोक लगी है।

भक्तों की नाराजगी पूजा कमेटी के पदाधिकारियों पर भी

लोग यह स्वाभाविक तौर पर पूछ रहे हैं कि जब गरीबों के लिए सरकार और स्वयंसेवी

संस्थाएं खाना बांट रही थी तो यही सवाल क्यों नहीं खड़ा हुआ था। इस विवाद के चक्कर

में रांची शहर की पूजा कमेटियों के पदाधिकारी भी श्रद्धालुओं की नाराजगी के निशाने पर

है। लोगों की नाराजगी इस बात को लेकर है कि इनलोगों को तो पूजा के विधि विधान और

आम लोगों की परंपरा और अभ्यास की पूरी जानकारी थी। इसके बाद भी सारे पदाधिकारी

चुप्पी साधे क्यों बैठे रहे। सोशल मीडिया के विस्तार की वजह से चौक चौराहों पर यह चर्चा

आम हो चली है कि पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल में खुद मुख्यमंत्री सुश्री ममता बनर्जी

इसमें शामिल हो रही हैं। पड़ोसी देश बांग्लादेश में भी दुर्गा पूजा की धूम मची हुई है। इस

बार बांग्लादेश में सिर्फ स्वास्थ्य संबंधी हिदायतें दी गयी हैं। पूजा पंडालो मे प्रतिमाओं का

आकार पूर्ववत ही है।


 

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