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गलत तरीके से जमीन लेने पर हेमंत सोरेन पर कसा शिकंजा




  • सील हो सकता है सोहराय भवन
  • उनकी पत्नी के नाम पर है जमीन

रांची : गलत तरीके से छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम का उल्लंघन कर ली

गई जमीन और उसपर भवन बनाना झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकारी

अध्यक्ष सह नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन को महंगा पड़ सकता है।

महाधिवक्ता ने इसपर विधिक राय देते हुए पूरी प्रक्रिया को गलत ठहराया है।

इसके बाद भूमि सुधार एवं राजस्व विभाग ने इस मामले में नोटिस जारी किया है।

संभावना जताई जा रही है कि हरमू में

गलत तरीके से ली गई जमीन पर बने सोहराय भवन को सील भी किया जा सकता है

यह भवन हेमंत सोरेन की धर्मपत्नी कल्पना सोरेन के नाम पर है।

जानकारी हो कि छोटानागपुर काश्तकारी

अधिनियम के तहत जनजातीय समुदाय के लोग भी उसी थाना क्षेत्र में जमीन की

खरीद-बिक्री कर सकते हैं जहां के वे मूल निवासी हैं। ऐसे में हेमंत सोरेन की

मुश्किलें बढ़ सकती है। इस मामले की शिकायत खिजरी से भाजपा विधायक

रामकुमार पाहन ने की थी। इसके बाद जांच शुरू की गई।

इस प्रकरण में सरकार ने महाधिवक्ता से विधिक राय मांगी थी।

उन्होंने प्रतिकूल कार्रवाई की अनुशंसा की है। शिबू सोरेन परिवार भाजपा के

निशाने पर है। भाजपा ने सोरेन परिवार की संपत्ति को लेकर कई दफा निशाना साधा है।

भाजपा नेताओं ने इसकी पूरी सूची भी जारी की थी। हेमंत सोरेन से यह भी पूछा था कि

वे कहां के निवासी हैं? इस पूरे प्रकरण में हेमंत सोरेन और उनकी पार्टी

झारखंड मुक्ति मोर्चा बैकफुट पर रही है। हेमंत सोरेन अक्सर इस पर घिरने के

बाद जांच की बात कहते रहते हैं।

सूत्रों के मुताबिक इसके लिए राज्य के महाधिवक्ता से भी कानूनी राय लेने के बाद

आगे की कार्रवाई की जाएगी। वैसे सामान्य तौर पर सीएनटी एक्ट के प्रावधानो के

मुताबिक एक गांव के आदिवासी की जमीन उसी राजस्व गांव का दूसरा आदिवासी ही

खरीद सकता है। रांची में जमीन खरीदने वाले हेमंत सोरेन का स्थायी पता बोकारो है

जबकि उनके पिता शिबू सोरेन मूल रुप से रामगढ़ के निवासी हैं जबकि

उनका असली कार्यक्षेत्र संथाल परगना रहा है।



Rashtriya Khabar


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