पर्यटकों के आकर्षण का अद्भुत केंद्र हैं हरियोखार झरना

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प्रकृति की छटा का अद्भुत नजारा

सूर्य की रौशनी बिखेरती है सतरंगी किरणें

नमकीन मछली पर टिकी है की जिंदगी

सत्येंद्र कुमार

चतरा: पर्यटकों के लिए हरियोखार झरना एक अद्भुत केंद्र है।

यहां लोग सिर्फ घूमने नहीं बल्कि यहां की प्रसिद्ध नमकीन मछली खाने में आते हैं।

कान्हाचट्टी का तमासीन जलप्रपात एवं हरियोखार झरना अब पर्यटकों को लुभाने लगा है।

तमासीन में आपको प्रकृति का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है

उससे कहीं न कहीं हरियोखार झारना में उससे भी ज्यादा आनंद लेने लायक जगह है।

हरियोखार झरना में मानो प्रकृति ने सब कुछ यहीं छोड़ दिया हो।

सुबह जब सूर्य उदय होता है उस समय का नजार कुछ और ही देखने को मिलता है।

सुबह की किरणे जब निकलती है और उस सूर्य की रौशनी पत्थरों के बीच से

बहती झरना से सतरंगी छटा का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है।

ऐसा नजारा झारखंड और बिहार के किसी भी जिले में देखने को नहीं मिलता है।

झरना देखने के लिए पहुंचने वाले लोग जब केन्दुवा सहोर गांव पहुचते है

तथा सहोर से हरियोखार पहुचते तो पहाड़ के ऊपरी छोर से पतझड़ नुमा

झाड़ियों को पकड़ पकड़ कर नीचे उतरने का मजा ही कुछ और है।

हालांकि इस बार केन्दुवा सहोर के ग्रामीणों ने गांव से हरियोखार के

तलहट्टी तक जाने के लिए युवाओं ने सीढ़ी नुमा रास्ते की ब्यवस्था कर दिए हैं।

ग्रामीणों ने पन्द्रह दिनों से लगातार मेहनत कर झरना तक की सड़क को

दुरुस्त कर लोगो को झरना तक पहुचने की मुक्कमल ब्यवस्था किया है।

पर्यटकों के लिए नमकीन मछलियाँ है अलग आकर्षण

इस झरना में 30 से 40 किलो की मछली पाई जाती है तथा मछलियाँ भी नमकीन लगती है।

यहां की मछलियों का स्वाद जो एक बार चख ले वो कभी नहीं भूलेगा।

सहोर निवासी और समाज सेवी नरेश सिंह खरवार ने बताया कि

सहोर और सिसिया तरी गांव के आधी आबादी कि जिंदगी मछली पर ही चलती है।

कैसे पहुंचे हरियोखार झरना

हरियोखार झरना पहुंचने के लिए चतरा से उत्तर दिशा कान्हाचट्टी 22 किलोमीटर,

कान्हाचट्टी से करमा मोड़ (तुलबुलद्) 8 किलोमीटर और फिर करमा मोड़ से

केन्दुवा सहोर 5 किलोमीटर एवं सहोर से उत्तर दक्षिण के कोने में झरना स्थित हैं।

वहीं इटखोरी तरफ से झरना पहुंचने के लिए इटखोरी से पितिज

7 किलोमीटर पितिज से कान्हाचट्टी 6 किलोमीटर

एवं कान्हाचट्टी से करमा 8 किलोमीटर तथा करमा मोड़ से बाएं

केन्दुवा सहोर होते हरियोखार झरना की दूरी 7 किलोमीटर पड़ता है।

ग्रामीणों कर रहे है पहल

सहोर गांव के ग्रामीण के पहल से हरियोखार झारखंड ही नहीं बल्कि कई राज्यों के पटल पर भी आने लगे हैं।

ग्रामीणों के सहयोग से ही आज हजारों लोग इस झरना को देखने के लिए आ रहे है।

इस वर्ष भी ग्रामीण नरेश सिंह खरवार, सन्तोष खरवार, छोटू सिंह खरवार, राजू खरवार, चुरामन सिंह खरवार आदि लगे हुए हैं।

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