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हनुमान घायल होकर खुद के ईलाज के लिए पहुंचा दवा दुकान







प्रतिनिधि

बाकुंड़ाः हनुमान इंसानों का पूर्व पुरुष माना जाता है। कई बातों में हमारे साथ उनकी जीवन चर्या मेल खाती है।

लेकिन आपसी लड़ाई में घायल होने के बाद ऑटो की सवारी कर किसी दवाई दुकान तक पहुंचने की पहली घटना

सामने आयी है। कोई इंसान अगर ऐसा करता तो शायद यह खबर नहीं बनती।

लेकिन यहां के एक टोटो (ऑटो रिक्शा) पर सवार होकर उसका जाना लोगों को हैरान कर गया है।

दरअसल यह घटना बीरभूम के मल्लारपुर स्टेशन की है।

वहां दो हनुमानों के बीच हुई लड़ाई में एक हनुमान घायल हो

गया था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हनुमानों को लड़ते अनेक लोगों ने देखा था।

कुछ लोगों ने यह लड़ाई खत्म कराने का प्रयास भी किया था।

लेकिन कहानी का क्लाइमैक्स इसके बाद सामने आया।

घायल हनुमान नीचे लोगों की नजर के सामने बैठा हुआ था।

लोग देख रहे थे कि लड़ाई में उसके शरीर पर कई जख्म बन गये हैं।

अपने विरोधी के वहां से गायब होते ही यह घायल हनुमान एक टोटो पर सवार हो गया।

सभी की तरफ कातर नजरों से देखने की वजह से किसी ने उसे भगाने की कोशिश भी नहीं की।

इस ऑटो में दूसरे यात्री भी सवार थे। ऑटो चालक उसे शांत देखकर गाड़ी आगे बढ़ा ले गया।

रास्ते में एक दवाई दुकान नजर आते ही यह हनुमान ऑटो से उतरकर सीधे दवाई की दुकान पर पहुंचा।

उसे ऐसा करते देख ऑटो चालक और यात्री भी रूक गये।

हनुमान इस दवाई दुकान के काउंटर पर चढ़ गया।

वहां मौजूद दुकानदार को उसने इशारे से अपना घाव भी दिखाया।

यह हालत देखकर दो स्थानीय युवक वहां आ गये।

हनुमान अपने ईलाज के बाद फिर से ऑटो पर बैठकर चला गया

इनलोगों ने हनुमान को अलग ले जाकर बैठाया और उसके घावों पर मलहम लगाये।

हालत देखते हुए उसे पानी में घोलकर कुछ दवाई भी पिलायी गयी।

इस अवस्था तक हनुमान चुपचाप और शांत बैठा रहा।

सारा काम होने के बाद जब लोगों ने उसे इशारे से बताया कि उसका ईलाज हो चुका है तो वह बाहर निकला

और फिर से एक ऑटो पर सवार हो गया। इसके पहले वह युवकों द्वारा दिये गये कुछ केलों को भी खा गया।

इस घटना के बारे में अलीपुर चिड़ियाघर के प्रशासक आशीष कुमार सामंत कहते हैं कि हाव भाव से ही

स्पष्ट हो जाता है कि वह जंगली हनुमान नहीं था।

काफी समय से आबादी के बीच रहते हुए उसने इंसानों की गतिविधियों को गौर किया है।

इसी वजह से वह अपने अनुमान के आधार पर ही सीधे दवाई की दुकान तक जा पहुंचा था।

जहां से ईलाज होने के बाद वह फिर से अपने दल की तरफ लौट गया है।



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