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हमीरपुर में करोड़ों की लागत से तैयार मंडियां खंडहर में तब्दील

हमीरपुरः हमीरपुर जिले में बु्न्देलखंड पैकेज से चार साल पहले 82 करोड़ रुपये की लागत

से बनायी गयी 23 मंडियां धीरे धीरे खंडहर में तब्दील होती जा रही है। इनका कीमती

सामान आसपास के ग्रामीण उठा कर ले गये है। अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व

विनय प्रकाश श्रीवास्तव ने बताया कि बुन्देलखंड पैकेज से जिले की सबसे बड़ी एवं

विशिष्ट मंडी 48 करोड़ 41 लाख 75 हजार रुपये कीमत की निर्मित की गयी थी मगर

किसी भी व्यापारी ने आज तक हमीरपुर की इन मंडी में व्यवसाय शुरु नही किया है

जिससे किसान अपना गल्ला बिक्री करने नही आये है। इसी प्रकार गोहांड, चंडौत डाडा,

धनौरी, पौथिया,मुंडेरा, विदोखर, टेढ़ा, बेरी में हर एक के निर्माण में एक करोड़ 44 लाख

80 हजार रुपये खर्च किये गये थे वहीं मंडी कुछेछा, सिसोलर, इचौली,रीवन, गहरौली,

चिल्ली, पहाढ़ी गढी, मझगवा, अटगाव, ममना, उमरिया, मगरौठ, धौहल बुजुर्ग, चंडौत

डाडा आदि हर एक मंडी एक करोड़ 44 लाख 80 हजार कीमत की बनायी गयी थी।

इन मंडियों के अलावा भी वहां दूसरे संसाधन थे

उन्होने बताया कि ये मंडिया तीन साल से लेकर चार साल के अन्तराल में बनायी गयी

थी। जिसमें पेयजल के अलावा कई रिहायशी आवास भी बनाये गये थे। लाखो रुपये तो

रंग रोगन मे लगाये गये थे। मंडी का निर्माण कार्य मंडी समिति उरई ने कराया था।

हालाकि सपा सरकार मे इन मंडियों के निर्माण में जमकर धांधली हुयी थी जिसमे बाद में

जांच मे लीपापोती कर दी गयी थी। मंडी प्रभारी एवं अतिरिक्त एसडीएम अशोक यादव ने

बताया कि मंडी की देखरेख की जिम्मेदारी संबंधित एसडीएम जो मंडी के सभापति है

उनको जिम्मेदारी सौपी गयी है। मंडियों में कई सालो ताला बंद है जिससे धीरे धीरे ये

मंडियां खंडहर में तब्दील होती जा रही है।

हमीरपुर के खंडहर होते भवनों की जिम्मेदारी लेगा आखिर कौन

एसडीएम सदर आरके चौरसिया का कहना है कि मंडिया उनके कार्यकाल में निर्मित नही

करायी गयी थी इस बजह से उनको कोई जानकारी नही है। एसडीएम मौदहा अजीत परेश

का कहना है कि मंडियों में कोई शिकायत आयेगी तो वे जांच करेगे मगर पुरानी मंडियों से

उनक कोई लेना देना है। राठ व सरीला एसडीएम को तो इन पुरानी मंडियों के बारे में कोई

जानकारी नही है। किसान नेता निरंजन सिंह राजपूत व भगवानदास दीक्षित का कहना है

कि बुन्देलखंड किसान कई सालों से सूखे से जूझ रहा है खेतो में गल्ला पैदा नही हो रहा है

मगर इन मंडियों को जानबूझकर ठेकेदारों को लाभ पहुचाने के लिये सपा सरकार ने

जबरदस्ती मंडिया निर्मित करा दी थी जब कि मंडियों का कोई औचित्य नही था। यही

नही मंडिया तो बन गयी है मगर वहा तक पहुचने के लिये कोई रास्ता नही बनाया गया

है।

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