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एचएएल अब इजरायल के साथ मिलकर मानव रहित विमान बनायेगा

नईदिल्लीः एचएएल अब नयी तकनीक के सहारे भारतीय सुरक्षा

व्यवस्था में नया योगदान देने जा रहा है। मिली जानकारी के मुताबिक

एचएएल ने मानव रहित विमान बनाने की जिम्मेदारी उठायी है।

इसके लिए वह इजरायल की एक निजी कंपनी के साथ तकनीकी

कुशलता हासिल करेगी। इस प्रस्ताव के तहत यह भारतीय कंपनी

मध्यम और लंबी दूरी का उड़ान भरने में सक्षम मानव रहित विमानों

का निर्माण करेगी। युद्ध और सीमा पर निरंतर निगरानी के लिए अब

ऐसे विमानों की सख्त आवश्यकता महसूस की जा रही है। इससे

मानव श्रम की बचत होने के साथ साथ काम में इंसानी भूल की

संभावनाएं भी शून्य हो जाती हैं। भारत में ऐसे मानव रहित विमान

बनाने की यह पहली कोशिश है। जिस इजरायली कंपनी के साथ

मिलकर इस योजना को अमल में लाना है, वह कंपनी पहले से ही

ऑटोमैटिक हथियारों के लिए दुनिया की अग्रणी कंपनी में से एक

मानी जाती है। जिस श्रेणी के मानव रहित विमान बनाने की तैयारी हैं,

वे लगातार 36 घंटों तक आसमान में रहकर निगरानी करने में सक्षम

होंगे। इनके आने से भारतीय सुरक्षा पंक्ति और अधिक मजबूत होगी,

ऐसा रक्षा विशेषज्ञों का मानना है। मिली जानकारी के मुताबिक

एचएएल इस तकनीक से जो कुछ प्रगति करेगा उससे तीसरी दुनिया

के देशों को भी फायदा होगा क्योंकि अगले चरण में यह कंपनी इस

श्रेणी के मानव रहित विमान अन्य देशों को भी उपलब्ध करायेगी।

वर्तमान में इस तकनीक पर चंद देशों का ही एकाधिकार है।

एनएएल के साथ साथ अडानी को भी वर्क आर्डर

एचएएल को इस बारे में बताया गया है कि वर्तमान में भारत को अपनी

सीमाओं की निगरानी के लिए एक सौ ऐसे मानव रहित विमानों की

जरूरत है। जिन मानव रहित विमानों का पहले चरण में निर्माण

एचएएल में किया जाने वाला है, वे हेरोन टीपी श्रेणी के हैं। लेकिन

भारत में उन्हें बनाते वक्त उनमें कुछ तकनीकी सुधार भी किये

जाएंगे। अच्छी बात यह भी है कि भारत में इन विमानों की निर्माण

होने के बाद भारतीय सेना के तीनों अंगों को इस अत्याधुनिक मानव

रहित विमानों का लाभ बराबर मिल पायेगा। साथ ही आपसी तालमेल

की वजह से कम विमानों की बदौलत भी सेना के तीनों अंग एक दूसरे

से तालमेल बैठाकर अपनी अपनी जिम्मेदारियों का पालन कर सकेंगे।

इस बीच यह जानकारी भी मिली है कि इस योजना के धरातल पर

उतरने के बाद अडानी समूह भी अलग से रक्षा कारोबार में पैठ जमाने

जा रहा है। वे एलबिट के साथ मिलकर हारमिस 900 श्रेणी के ड्रोनों का

निर्माण करने जा रहा है। बताया गया है कि इस काम के लिए अडानी

की कंपनी को विदेश से भी आर्डर मिलने वाले हैं। एनएएल के चैयरमैन

ने बताया है कि कंपनी अपनी तरफ से 200 किलो श्रेणी के मानव रहित

रोटोर विंग विमान बनाने की दिशा में काम कर रही है। इन विमानों का

उपयोग कठिन इलाकों में आपूर्ति पहुंचाना होगा। खास तौर पर

सियाचीन ग्लेशियर के लिए यह यूएवी भारतीय सेना के लिए काफी

मददगार साबित होगा

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