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हजाम गांव में खेती के लिए स्वयं ही नाला तैयार कर रहे हैं ग्रामीण

सिल्लीः हजाम गांव में धान की खेती करने के लिये ग्रामीण स्वयं ही श्रमदान करके पानी

के निकासी के लिये नाला की सफाई व मरम्मत का काम कर रहे हैं। काम कर रहे ग्रामीणों

ने बताया कि पहाड़ों से उतरा हुआ पानी से करीब एक एकड़ 84 डिसमिल जमीन पूरी तरह

तालाब बन गया है। इस कारण पिछले तीन सालों से इस पर खेती नहीं की जा रही है।

हजाम गांव के गंगा नारायण सिंह मुंडा के इस जमीन पर हम आधबंटाई पर काम करते हैं।

पानी के निकास के लिए हम ग्रामीणों ने श्रमदान व निजी खर्च पर नाले की मरम्मत करवा

रहे हैं।  इस बात की जानकारी स्थानीय मुखिया को भी है लेकिन उन्होंने इस काम के लिए

अब तक कोई मदद नहीं की है। हजाम गांव के किसानों की इस पहल की इलाके में अच्छी

खासी चर्चा हो रही है। उम्मीद की जा सकती है कि इस एक निजी प्रयास के सफल होने के

बाद आस पास के कृषि प्रधान इलाकों के अन्य किसान भी अपने स्तर पर ऐसी पहल कर

कृषि उपज बढ़ाने की दिशा में अपनी भूमिका अदा करेंगे। दरअसल सिंचाई का अतिरिक्त

साधन यहां की जमीन पर खेती के लिए एक वरदान साबित हो सकती है। जिन इलाकों में

पानी की अधिकता है, वहां के किसान मौसमी फसल के साथ साथ सब्जियों का भी अब

अच्छा खासा उत्पादन कर लेते हैं। इससे उन्हें आर्थिक लाभ भी अधिक होता है।

हजाम गांव में श्रमदान तो गोडाडीह से डीडीटी का छिड़काव शुरू

सिल्ली के गोड़ाडीह पंचायत से प्रखंड के विभिन्न गांव में डीडीटी का छिड़काव कार्यक्रम

गुरुवार को शुरू किया गया। उद्घाटन के मौके पर गोड़ाडीह पंचायत की मुखिया रोमा देवी,

पूर्व मुखिया डब्लू महली, एमपीडब्ल्यू सुरेंद्र महतो एवं एएनएम सुनीता डोडराय आदि

मौजूद थे। इलाके में पहले से ही कोरोना संक्रमण के मद्देनजर काफी सावधानी बरती जा

रही है। साथ ही सफाई का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है।


 

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