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गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने दिया विदेशियों को सीमा पर छोड़ने के निर्देश

  • भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी : गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने कोरोना संक्रमण के चलते असम की जेलों में बंद

विदेशी नागरिकों की रिहाई की शर्तो में ढील देकर उन्हें जल्द रिहा करने का फैसला किया

है। ये वे विदेशी नागरिक हैं, जो घुसपैठ करके प्रदेश में घुसे और उन्हें जांच और सुनवाई के

बाद विदेशी घुसपैठिया करार दिया गया। जेल में बंद इन विदेशियों को फॉरनर्स ट्रिब्यूनल

ने विदेशी घुसपैठिया करार दिया है। उच्च न्यायालय ने कहा है कि जो विदेशी कैदी अपने

कारावास के दो साल पूरे कर चुके हैं। उन्हें पांच हजार रुपये के निजी मुचलके पर दो लोगों

की गारंटी लेते हुए रिहा कर देश की सीमा पर छोड़ा जाए। उच्च न्यायालय के मुख्य

न्यायाधीश जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस मानस रंजन पाठक की पीठ ने यह

आदेश सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के आलोक में दिया है। पीठ ने यह आदेश विदेशी घोषित

किए गए समसुल हक की याचिका पर सुनवाई करने के बाद दिया है। इसलिए उसे आदेश

का लाभ मिलेगा। पीठ ने कहा है कि आदेश की प्रति सभी सीमावर्ती जिलों के पुलिस

प्रमुखों, जेल अधीक्षकों और अन्य उच्च अधिकारियों को भेजी जाए। जिससे वहां की जेलों

में बंद दो साल की सजा पूरी कर चुके विदेशी बंदियों को रिहा किया जा सके। आदेश में

कहा गया है कि अगर किसी बंदी के पक्ष में गारंटी देने वाले दो स्थानीय लोग न हों, तो उसे

एक स्थानीय की गारंटी के आधार पर ही रिहा कर दिया जाए। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट

अपने एक आदेश में असम के छह बंदी शिविरों में कैद विदेशी घुसपैठियों की रिहाई के

लिए नियमों को आसान कर चुका है।

गुवाहाटी उच्च न्यायालय के आदेश से कैद विदेशी छूट सकेंगे

उल्लेाखनीय है कि असम के नए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा उग्रवादी संगठनों

से हिंसा से दूर रहने और मुख्यधारा में शामिल होने की अपील करने के कुछ दिनों बाद

प्रतिबंधित यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम-इंडिपेंडेंट (उल्फा-आई) ने तत्काल प्रभाव

से तीन महीने के लिए एकतरफा संघर्षविराम की घोषणा की। स्वयंभू कमांडर-इन-चीफ

परेश बरुआ के नेतृत्व में उल्फा-आई ने एक बयान में कहा कि कोविड-19 महामारी को

देखते हुए संगठन ने 15 मई से तीन महीने के लिए असम में सभी तरह के सैन्य अभियानों

को एकतरफा निलंबित कर दिया है। उल्फा की इस पहल से माना जा रहा है कि इससे

शांति के लिए प्रदेश में अनुकूल माहौल बनेगा। प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन उल्फा-आइ

(यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट आफ असम-इंडिपेंडेंट) ने कोरोना संक्रमण के चलते तीन माह के

लिए एकतरफा संघर्ष विराम का एलान किया है। उधर, उल्फा की इस पहल पर मुख्यमंत्री

हिमंत विश्व शर्मा ने कहा कि इससे शांति के लिए प्रदेश में अनुकूल माहौल बनेगा।

उग्रवादी संगठन के कमांडर-इन-चीफ परेश बरूआ ने मीडिया को भेजे ई-मेल में कहा,

‘संघर्ष विराम तत्काल प्रभाव लागू हो गया है और उनका संगठन तीन महीने तक किसी भी

तरह के आपरेशन से दूर रहेगा।

उल्फा ने किया एकतरफा संघर्ष विराम का एलान

बरुआ ने कहा, ‘प्रदेश के लोग कोरोना महामारी से दिक्कतों से जूझ रहे हैं। इसी के चलते

हमने अगले तीन महीने तक किसी भी तरह की गतिविधि से दूर रहने का फैसला किया

है।’ बरूआ ने तिंगराई में हुए ग्रेनेड हमले में अपने संगठन का हाथ होने से भी इन्कार

किया है। इस हमले में एक व्यक्ति की जहां मौत हो गई थी वहीं दो लोग घायल हुए थे।

बरूआ ने कहा कि यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण इस कठिन समय में सुरक्षा बलों से जुड़े लोग

संगठन को बदनाम करने करने की कोशिश कर रहे हैं।

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