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गुरु हनुमान के जाने माने कोच सुजीत मान ने कहा नाम कटने से टूटा है मनोबल







नयी दिल्ली: गुरु हनुमान अखाड़े के जाने माने कोच सुजीत मान का नाम इस साल

द्रोणाचार्य पुरस्कार दिए जाने वाले खिलाड़ियों की सूची से कट गया है जिससे उन्हें भारी

निराशा हुई है। 43 साल के सुजीत को हाल ही में जब द्रोणाचार्य पुरस्कार देने की सिफारिश

हुई थी तब उन्होंने इस पुरस्कार को गुरु हनुमान और अपने दादा जी को समर्पित किया

था। लेकिन मंगलवार रात जब खेल मंत्रालय ने नामों की आधिकारिक घोषणा की तो

पुरस्कार सूची में अपना नाम न पाए जाने पर सुजीत बेहद निराश हो गए।

द्रोणाचार्य पुरस्कार न मिलने के सन्दर्भ में उनकी प्रतिक्रिया पूछे जाने पर उन्होंने इतना

ही कहा, मुझे बहुत दु:ख हुआ है। ऐसा करने से किसी भी खिलाड़ी का मनोबल गिरता है।

सुजीत आज तड़के भारतीय टीम के कोच के रूप में अंडर 23 विश्व चैंपियनशिप में हिस्सा

लेने सर्बिया रवाना हुए हैं। एक दशक से राष्ट्रीय कुश्ती टीम के साथ कोच पद की

जिम्मेदारी संभाल रहे सुजीत ने पिछले साल किसी सक्रिय मौजूदा कोच के नाम की

द्रोणाचार्य पुरस्कार के लिए सिफारिश नहीं किये जाने पर नाराजगी जताई थी।

गुरु हनुमान के जाने माने कोच सुजीत मान का लगातार तीसरे वर्ष द्रोणाचार्य के लिए नाम गया था

कुश्ती इस समय देश का एकमात्र ऐसा खेल है, जिसमें भारत ने पिछले चार

ओलंपिक में लगातार पदक जीते हैं। इस साल टोक्यो ओलम्पिक में भारत ने कुश्ती में दो

पदक रवि दहिया ने रजत और बजरंग ने कांस्य पदक जीता था।

पिछले वर्ष खुद सुजीत का लगातार तीसरे वर्ष द्रोणाचार्य के लिए नाम गया था लेकिन

नियमों के अनुसार सर्वाधिक अंक होने के बावजूद उन्हें एक बार फिर नजरअंदाज कर

दिया गया था । इस बार पुरस्कार समिति ने उनके नाम की द्रोणाचार्य पुरस्कार के लिए

सिफारिश की लेकिन उनका नाम सूची में से कट गया है। सुजीत ने कहा कि उन्हें पता

चला है कि खेल मंत्री ने उनका नाम काटा है। उन्होंने कहा कि भारतीय पहलवानों ने

टोक्यो ओलम्पिक में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया लेकिन किसी भी कोच को लाइफ

टाइम और नियमित वर्ग में द्रोणाचार्य पुरस्कार न देना हैरान करता है।

समझा जाता है कि लाइफ टाइम वर्ग में भी एक कुश्ती कोच का नाम शामिल था लेकिन

उनका नाम भी कट गया है। सुजीत ने कहा कि किसी नियमित कोच को यह पुरस्कार

देना सवाल खड़े करता है। पहले उनके नाम की घोषणा हो गयी, मीडिया में खबरें भी छप

गयीं लेकिन अब जब उन्होंने लिस्ट देखी तो उनका नाम नदारद है।

उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों में ऐसा हो चुका है जब किसी भी कुश्ती कोच को

नियमित वर्ग में यह पुरस्कार नहीं दिया गया है। सुजीत 2018 के एशियाई खेलों में कुश्ती

टीम के कोच थे, जिसमें बजरंग ने स्वर्ण जीता।

एशिया में चार बार पदक मिल चुके हैं

वह 2014 के ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में भी टीम के साथ कोच थे जिसमें सुशील कुमार ने

स्वर्ण जीता था। वर्ष 2014 से 2017 तक लगातार विश्व सीनियर चैंपियनशिप में टीम के

साथ कोच के रूप में गये सुजीत ने 2004 के एथेंस ओलंपिक में पहलवान के रूप में हिस्सा

लिया था। उन्हें 2002 में अर्जुन पुरस्कार, 2004 में हरियाणा सरकार से भीम अवार्ड और

2005 में रेल मंत्री अवार्ड मिला था। वह 2003 की राष्ट्रमंडल चैंपियनशिप में स्वर्ण जीतने

के अलावा सर्वश्रेष्ठ पहलवान भी रहे थे। उन्हें एशिया में चार बार

पदक मिल चुके हैं जिनमें एक रजत और तीन कांस्य पदक शामिल हैं।

गुरु हनुमान बिड़ला व्यायामशाला में सुजीत देश के उभरते पहलवानों को भविष्य के लिए

तैयार कर रहे हैं। सुजीत ने ओलंपिक पदक विजेता सुशील और योगेश्वर को राष्ट्रीय

शिविर में ट्रेनिंग दी है। सुजीत ने इसके अलावा बजरंग पुनिया, राहुल अवारे, दीपक

पुनिया, रवि कुमार, सुमित, सोमवीर, मौसम खत्री, अमित कुमार, पवन कुमार, अमित

धनकड, विनोद कुमार जैसे विख्यात पहलवानों को राष्ट्रीय शिविर में ट्रेनिंग दी है।

वह विश्व चैंपियनशिप, एशियाई खेल, कामनवेल्थ गेम्स और वर्ल्ड रैंकिंग चैंपियनशिप में

भारतीय टीम के कोच की भूमिका निभा चुके हैं।



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