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गुजरात के बॉयोटेक्नोलॉजी केंद्र ने सार्स कोव 2 के 131 जिनोम खोज निकाले

  • दवा या वैक्सिन बनाने में मदद मिलेगी

  • दुनिया को जारी किय गये सारे जिनोम कोड

  • मुख्यमंत्री रुपाणी ने ट्विट कर दी जानकारी

  • आंकड़ों के इस्तेमाल के लिए अनुमति आवश्यक नहीं

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः गुजरात की कंपनी बॉयोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर ने सार्स कोव 2 के 131

जिनोम श्रृंखलाओं को दर्ज करने में सफलता पायी है। इसकी जानकारी दुनिया भर के

वैज्ञानिकों को भेज दी गयी है। दुनिया के अन्य हिस्सों में चल रहे शोध के क्रम में अन्य

वैज्ञानिकों को इन जिनोम कोड के उपलब्ध होने से दवा अथवा वैक्सिन बनाने में मदद

मिलेगी। गुजरात सरकार द्वारा संचालित इस अनुसंधान केंद्र में कोरोना के मरीजों से

मिले नमूनों के आधार पर जिनोम की यह कोडिंग की गयी है। जिन जिनोम कोडिंग के

पूरा करने का दावा किया जा रहा है, उन्हें ही शरीर के अंदर वायरस की वजह से जानलेवा

प्रतिक्रियाओं के लिए जिम्मेदार माना जाता है। पूरी दुनिया के लिए फिलहाल यही वायरस

सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है जबकि लगातार इसका दायरा और उससे पीड़ित होने वालों

की संख्या में बढ़ोत्तरी होती जा रही है। इसी वजह से दुनिया भर के चिकित्सा और

जेनेटिक विशेषज्ञ इसकी काट खोजने में लगे हुए हैं।

गुजरात की इस उपलब्धि पर खुद गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने सोशल मीडिया

पर इसकी जानकारी दी है। उन्होंने इस शोध से जुड़े वैज्ञानिकों को धन्यवाद देते हुए यह

कहा है कि इससे पूरी दुनिया में जो शोध चल रहा है, उसमें बड़ी मदद होगी। वह ऐसे

वैज्ञानिकों के साथ जुड़े होने पर खुद गर्व महसूस करते हैं। शोध संस्थान ने दुनिया भर के

वैज्ञानिकों के बीच यह जिनोम कोड शेयर करते हुए अपना अपना अनुसंधान आगे बढ़ाने

की बात कही है। इस शोध के निष्कर्षौं को बांटने का मकसद भी यही है कि दुनिया में जल्द

से जल्द इसका कोई ठोस समाधान का रास्ता निकलकर सामने आये।

गुजरात के इस केंद्र ने कुछ भी गोपनीय नहीं रखा

गुजरात के अनुसंधान केंद्र ने आंकड़े अपनी वेबसाइट ( सीओविआइडी. जीबीआरसी.

ओआरजी.इन) पर उपलब्ध कराते हुए साफ कर दिया है कि इससे आगे के अनुसंधान को

जारी रखने के लिए किसी भी वैज्ञानिक को मूल संस्था से अनुमति लेने की आवश्यकता

नहीं है। यह आंकड़े इसलिए जारी किये जा रहे हैं ताकि जहां जो काम हो रहा है, वहां वह

काम और तेज गति से आगे बढ़ सकते और इसमें लालफीताशाही का अड़ंगा नहीं लगे। इस

उपलब्धि के बारे में आम जनता को इस बात की जानकारी दी गयी है कि राज्य में कोरोना

संक्रमण के फैले होने के दौरान 17 अलग अलग स्थानों से कोरोना वायरस के नमूने

हासिल किये गये थे। इन्हीं नमूनों के आधार पर जिनोम की इन श्रृंखलाओं को खोज

निकाला गया है। वैसे इससे पूर्व पुणे की सिरम इंस्टिटियूट ने भी जिनोम की कड़ियों का

विश्लेषण किया था। पुणे की संस्थान की तरफ से गत 15 अप्रैल को इसकी जानकारी दी

गयी थी। उसके बाद गुजरात की सरकारी शोध संस्थान ने इस काम को 25 मई को पूरा

करने की बात बतायी है।

आंकड़ों से दवा या वैक्सिन बनाने में मदद मिलेगी

अधिक संख्या में जिनोम की कड़ी उपलब्ध होने की वजह से वैज्ञानिकों को कोरोना की

दवा अथवा वैक्सिन बनाने में मदद मिलेगी, यह तय है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए

बिना कोई गोपनीयता रखने इसकी सारी जानकारी वैज्ञानिकों के लिए उपलब्ध करायी

गयी है। साथ ही भारत में इस जिनोम शृंखला के अध्ययन से इस बात को भी समझने में

मदद मिलेगी कि यह वायरस अब तक कितना बदला है। दरअसल वायरस बाहर आने के

बाद उसे नियंत्रित करने में सबसे बड़ी चुनौती इसके स्वरुप में निरंतर बदलाव होना भी है।

अलग अलग परिस्थितियों में यह वायरस अलग अलग स्वरुप में क्या आचरण करता है

अथवा भविष्य में क्या कुछ कर सकता हैं, इसके बारे में भी इन जिनोम शृंखला के

विश्लेषण से पता लगाया जा सकता है। गुजरात राज्य में भी कोरोना चरम की तरफ

अग्रसर हो रहा है। वहां इस रिपोर्ट के जारी होने तक 14829 लोग कोरोना से पीड़ित तथा

915 लोग इस वायरस से मृत पाये जा चुके हैं।


 

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