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गाइड लाइन को लेकर दुर्गापूजा मनाने वालों में बहुत नाराजगी

  • आम जनता मानती है कि धार्मिक स्वतंत्रता का हनन

  • लॉक डाउन में भोजन बंटा तो कोरोना नहीं फैला

  • मां के भोग में कोरोना के नाम पर प्रतिबंध क्यों

राष्ट्रीय खबर

रांचीः गाइड लाइन को मुद्दे पर दुर्गापूजा का माहौल अंदर ही अंदर गर्म है। अनेक धर्मप्रेमी

खुलकर नहीं बोल रहे हैं लेकिन वे सरकार के इस फैसले से इत्तेफाक नहीं रखते। इस मुद्दे

पर सामाजिक कार्यकर्ता और हरमू रोड काली पूजा स्वागत समिति के संस्थापक अध्यक्ष

प्रेम वर्मा ने बेबाक तरीके से अपनी बात रखी है। इसके अलावा रांची के प्रमुख धर्माचार्य 

स्वामी दिव्यानंद पहले ही इस  गाइड लाइन को लज्जाजनक बता चुके हैं। 

वीडियो में देखिये श्री वर्मा इस विषय पर क्या बोल रहे हैं

लेकिन यह दरअसल अकेले प्रेम वर्मा की बात नहीं है बल्कि यह रांची के अधिसंख्य हिंदू

धर्मप्रेमियों की सोच है। कोरोना संकट को देखते हुए वे फिलवक्त चुप हैं लेकिन आने वाले

दिनों में यह चुप्पी कायम रह पायेगी, इस पर निश्चित तौर पर संदेह है। कई लोगों का

मानना है कि ऐसा बेतूका गाइड लाइन जारी करने के बाद अब सरकार को उसके पक्ष में

वैज्ञानिक तथ्य भी पेश करना चाहिए। यदि सरकार ऐसा नहीं करती है तो यह समझा

जाना चाहिए कि सरकार फिर से हिंदुओं की धार्मिक आस्था के साथ खिलवाड़ कर रही है।

श्री वर्मा के साथ साथ कई अन्य लोगों ने कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि पूजा

पंडालों में माइक बजाने पर प्रतिबंध क्यों हैं। क्या इससे कोरोना का संक्रमण फैलता है।

और अगर वाकई कोरोना का संक्रमण माइक बजाने से फैलता है तो अन्य धार्मिक

प्रसारणों को इस सरकार ने बंद क्यों नहीं किया है। माइक बजने का फायदा यह होता है कि

जो लोग किसी कारण से पूजा पंडाल नहीं जा सकते, वे अपने अपने घरों से ही पूजा कर

लिया करते हैं।

गाइड लाइन की कुछ बातें तो स्वीकार्य हैं पर सभी नहीं

आम लोग मानते हैं एक दूसरे से दूरी बनाकर रखना कोरोना के नियमों में उचित है।

लेकिन इसी बहाने मां का भोग वितरण बंद करना भी धार्मिक आस्था से खिलवाड़ करना

है। श्री वर्मा के साथ साथ कई अन्य लोगों ने स्वीकार किया कि भोग का इंतजार लोगों को

साल भर से रहता है। इस बार सरकार ने उस पर प्रतिबंध लगाया है। कोरोना लॉक डाउन

के दौरान जब गरीबों के बीच अनेक संस्थाओं की तरफ से भोजन बांटा जा रहा है, उस

वक्त तो कोरोना नहीं फैला था तो इस बार हिंदुओं के इस सबसे बड़े त्योहार पर ऐसे

प्रतिबंध लगाकर राज्य सरकार जनता के बीच क्या संदेश देना चाहती है।

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