fbpx Press "Enter" to skip to content

जीएसटी का संग्रह बढ़ा तो राज्यों का बकाया भुगतान हो

जीएसटी का संग्रह यानी वस्तु एवं सेवा कर संग्रह नंवबर में लगातार दूसरे महीने एक

लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। जीएसटी संग्रह के आंकड़े अर्थव्यवस्था में सुधार को

दर्शाते हैं। हालांकि नवंबर महीने में जीएसटी संग्रह अक्टूबर की तुलना में थोड़ा कम है।

विशेषज्ञों का कहना है कि त्योहारी मांग की वजह से जीएसटी संग्रह बढ़ा है और आगे

इसमें तेजी बने रहने पर संशय है। लेकिन इस संशय की स्थिति के बाद भी बाजार की

हालत में धीरे धीरे सुधार होने के संकेत बाजार से ही मिलने लगे हैं। लोगों के पास फिर से

जैसे जैसे पैसे का प्रवाह बढ़ रहा है, बाजार में कारोबार में तेजी आ रही है। उम्मीद है कि

राज्य और केंद्र सरकार की तरफ से फसल की कीमतों को अदा करने की योजना अगर

सही ढंग से काम करती रही तो आने वाले दिनों में फसल की आमद के साथ साथ ग्रामीण

भारत में भी नकदी का प्रवाह जब बढ़ जाएगा तो पूरे देश को इस बात का एहसास होगा कि

कोरोना जैसे भीषण संकट से तबाह हो चुकी देश की अर्थव्यवस्था फिर से ठीक उसी तरह

से उग रही है, जैसे बीज से छोटे छोटे कोंपलें निकलती हों। जो विशालकाय ढांचा हम खड़ा

देख पा रहे हैं, कोरोना ने उन्हें पूरी तरह खोखला कर दिया है। लेकिन इस पूरी उम्मीद के

साथ साथ यह सवाल यथावत है कि फिर से सरकार बैंकिंग व्यवस्था की खामियों का लाभ

उठाते हुए औदयोगिक घरानों की कर्जमाफी के खेल में ना जुटे। वित्त मंत्रालय की ओर से

जारी आंकड़ों के अनुसार नवंबर में जीएसटी संग्रह 1.04 लाख करोड़ रुपये रहा जबकि

अक्टूबर में 1.05 लाख करोड़ रुपये जीएसटी मिला था। यह लगातार तीसरा महीना है जब

सालाना आधार पर जीएसटी संग्रह में सुधार हुआ है।

जीएसटी का संग्रह नवंबर में पहले से बेहतर रहा है

नवंबर में जीएसटी संग्रह पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 1.42 फीसदी अधिक

रहा। हालांकि नवंबर में जीएसटी संग्रह मूल रूप से अक्टूबर में हुए लेनदेन का हिस्सा है,

जिसमें त्याहारी मांग का असर हो सकता है। नवंबर में ई-वे बिल जेनरेशन 5.53 करोड़ रहा

जो अक्टूबर के 6.41 करोड़ ई-वे बिल से कम है। इससे संकेत मिलता है कि दिसंबर में

जीएसटी संग्रह में कमी आ सकती है। अनुमान है कि दिसंबर में जीएसटी संग्रह के आंकड़े

आने के बाद पूरी तरह स्पष्ट होंगे क्योंकि उसमें नवंबर में हुए लेनदेन का पता चलेगा।

जीएसटी ई-वे बिल जेनरेशन में कमी मुख्य रूप से त्योहारों के कारण कामकाज के दिन में

कमी की वजह से हो सकती है। अक्टूबर-नवंबर में औसत जीएसटी ई-वे बिल जेनरेशन

सितंबर 2020 की तुलना में ज्यादा रहा है। पिछले वित्त वर्ष में सात महीने जीएसटी संग्रह

1 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा था। नवंबर में केंद्रीय जीएसटी अक्टूबर के 44,285

करोड़ रुपये से घटकर 41,482 करोड़ रुपये रहा, वहीं राज्य जीएसटी संग्रह 41,826 करोड़

रुपये रहा जबकि अक्टूबर में यह 44,839 करोड़ रुपये रहा था। मुआवजा उपकर संग्रह

नवंबर में जरूर थोड़ा बढ़ा है और यह इस साल सबसे अधिक 8,011 करोड़ रुपये रहा।

नवंबर महीने में कुल 81 लाख जीएसटीआर-3बी रिटर्न भरे गए जबकि अक्टूबर में 80

लाख रिटर्न भरे गए थे। सरकार ने अक्टूबर में 500 करोड़ रुपये और उससे अधिक के

सालाना कारोबार वाली फर्मों के लिए ई-इन्वॉयस की व्यवस्था लागू की थी। हालांकि 1

अप्रैल, 2021 से 100 करोड़ रुपये सालाना कारोबार वाली फर्मों को भी इसके दायरे में लाया

जाएगा।

कारोबार में यह तेजी त्योहारी मौसम की वजह से भी थी

इन तमाम आंकड़ों और उनके विश्लेषण के आधार पर ही यह माना जा रहा है कि कोरोना

संक्रमण और बाद के लॉकडाउन से जो हालात बहुत बुरी हालत में पहुंच गये थे, वे फिर से

पटरी पर आ रहे हैं। वैसे भी यह सामान्य बात थी कि लॉकडाउन के दौरान जब कारोबार ही

नहीं हो रहा था तो किसी किस्म की गति की कोई उम्मीद नहीं थी। अब धीरे धीरे बाजार में

तेजी आने के साथ साथ नकदी का प्रवाह भी इसमें क्रमवार तरीके से गति प्रदान करता जा

रहा है। लेकिन इन तमाम अच्छी संभावनाओं के बीच यह कठोर आत्मानुशासन का विषय

है कि हम अपने अपने स्तर पर कोरोना के संक्रमण को रोकने की दिशा में सजग रहें।

पश्चिमी देशों के अलावा एशिया के भी कई देशों में कोरोना से बचाव के प्रावधानों को हल्के

में लेने का नतीजा हमारे सामने है। इसलिए जीएसटी का संग्रह बढ़ा है तो यह और भी

आगे बढ़े उसके लिए जरूरी है कि हमारा कारोबार भी कोरोना काल के पहले जैसी स्थिति

में पहुंचे। दूसरी तरफ ग्रामीण इलाकों से फसल की आमद मंडियों तक होने से इस

जीएसटी का संग्रह का आयतन और बढ़ने की पूरी उम्मीद है। अब कोरोना का प्रसार नहीं

हुआ तो अपनी रफ्तार से भी अर्थव्यवस्था अपनी पूर्वावस्था की तरफ लौटती जाएगी।

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »
More from देशMore posts in देश »
More from राज काजMore posts in राज काज »
More from व्यापारMore posts in व्यापार »

Be First to Comment

Leave a Reply

... ... ...
%d bloggers like this: