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तिब्बत पर कब्जा के बाद अरुणाचल पर साजिशें जारी है चीन की

  • अरुणाचल प्रदेश में साउथ चाइना सी वाली चाल चल रहा

  • आर्मी इंटेलिजेंस ने भारत सरकार को सूचित किया

  • भूटान की जमीन पर भी चीन ने बसाया है गांव

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी: तिब्बत पर कब्जा कर चीन ने शुरुआत की है, उसके निशाने पर फाइव फिंगर

कहे जाने वाले इलाके भी हैं। हिमालयी क्षेत्र में विवादित सीमाओं पर नागरिक बस्तियां

बनाने के लिए चीन की साजिश भारत के लिए एक बड़ी नई चिंता के रूप में उभरा है

क्योंकि भारत में सेना की खुफिया जानकारी का कहना है कि यह दक्षिण चीन सागर में

दावों को मजबूत करने की बीजिंग की रणनीति को दोहराता है ।आर्मी इंटेलिजेंस का कहना

है कि क्षेत्र में गांव के निर्माण का भी भारत ने दावा किया है कि जमीन पर तथ्यों में

फेरबदल कर क्षेत्र में चीन के दावे को मजबूत करने की रणनीति है ।भारतीय सेना के

इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आज तेजपुर में कहा कि इस मामले को लेकर

भारत सरकार को सतर्क कर दिया गया है।चीन अब भारत के साथ सीमा विवाद बनाए

रखना चाहता है। तिब्बत पर कब्जा चीन की शुरुआत थी। अब वह उससे आगे बढ़ना चाह

रहा है। उसके निशाने पर फाइव फिंगर हैं। इन पर कब्जा कर वह पूरे इलाके में अपनी

स्थिति मजबूत करना चाहता है। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी तिब्बत को हथेली मानती है

जबकि लद्दाख, नेपाल, सिक्किम, भूटान और अरुणाचल प्रदेश को पांच फिंगर मानती है।

इन पर कब्जा करना अपना धर्म मानती है। ऐसा कर वह अपने हाथ को मजबूत करना

चाहती है। इस बीच, नई दिल्ली के सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च रणनीतिक अध्ययन के

प्रोफेसर ब्रह्मा चेलानी के हवाले से बताया कि भारत को यह बात समझनी चाहिए। देखना

चाहिए कि शिनजियांग और हांगकांग में क्या हो रहा है। सभी बातों को समझते हुए चीन

के साथ संबंध बनाने चाहिए। शिनजियांग का मामला किसी एक देश और समुदाय का

नहीं है।

तिब्बत पर कब्जा करने का नतीजा पूरी दुनिया भोग रही है

इसके लिए पूरी विश्व बिरादरी को एकजुट होकर खड़े होना चाहिए। क्योंकि अगर अभी

उन्होंने ऐसा नहीं किया तो चीन का दायरा बढ़ता जाएगा और वह अपनी सुविधा के

अनुसार इलाकों पर कब्जा करता चला जाएगा। एक समय के बाद कोई उसका कुछ नहीं

कर पाएगा। सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च, नई दिल्ली की रिपोर्ट के अनुसार भारतीय सेना के

इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आरोप लगाए कि चीन की विस्तारवादी

नीतियां विश्व समुदाय के लिए ‘‘खतरा’’ है।चीन का बनाया गया नया गांव भारत के लिए

बहुत बड़ी चिंता की बात है। क्योंकि, यह इलाका काफी संवेदनशील माना जाता है। चीन

अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा बताते हुए मान्यता देने से इनकार करता

है, वहीं भारत ने समय-समय पर दो टूक लहजे में चीन को यह बात साफ की है कि

अरुणाचल प्रदेश हमारा अभिन्न हिस्सा है। भारतीय सेना के इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक

वरिष्ठ अधिकारी ने यह भी बताया कि पिछले साल ही चीन ने इस इलाके से कुछ

भारतीयों को अगवा किया था, जिसे बाद में दबाव बनने पर उसे लौटाना पड़ा था।आईं

सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा हुआ था कि चीन ने भूटान की जमीन पर भी दो गांवों को

बसाया है। भूटान के जिस क्षेत्र में चीन ने अपनी नई बस्तियां बसाई है वह 2017 के

डोकलाम फेसऑफ की जगह से केवल 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। चीन ने भूटान

की अमो चू नदी के साथ लगने वाली जमीन पर यह निर्माण किया हुआ है।

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