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सरकार अब जवाब दे कि सृजन घोटाले में किसे बचाया जा रहा हैः अजीत शर्मा

  • तीन साल में सीबीआई की जांच का कोई नतीजा नहीं

  • इतने बड़े घोटाले पर हर स्तर पर चुप्पी क्यों

  • घोटालेबाजों को आखिर किसका संरक्षण है

दीपक नौरंगी

भागलपुरः सरकार अब जवाब दे कि सृजन घोटाले की सीबीआई जांच आखिर किसे बचाने

के लिए हो रही है। यह सवाल भागलपुर के विधायक अजीत शर्मा ने उठाया है। उन्होंने

कहा कि पिछले तीन सालों से सीबीआई का इस कांड की जांच में उपलब्धि क्या है, यह भी

पूछने का वक्त आ गया है।

वीडियो में देखिये विधायक अजीत शर्मा ने क्या कहा

प्रेस से बात करते हुए श्री शर्मा ने इस मुद्दे पर केंद्र और  राज्य सरकार पर निशाना साधा।

उन्होंने कहा कि घटनाक्रम ही बताते हैं कि सीबीआई जांच की अनुशंसा सिर्फ जांच को

लटकाने और दोषियों को बचाने की साजिश भर है। विधायक ने यह सवाल उठाकर

सीबीआई के लिए कठिन परिस्थिति पैदा कर दी है कि आखिर इस कांड की जांच का

ऑनलाइन एफआइआर अब तक दर्ज क्यों नहीं किया गया है। सामान्य मामलों में भी

सीबीआई ऑनलाइन एफआइआर दर्ज करती है। फिर जांच के नाम पर इतनी लेटलतीफी

आखिर क्या है। सरकार अब जवाब दे कि इसका असली राज क्या है। 

श्री शर्मा ने कहा कि हजारों करोड़ रुपये सरकारी ट्रेजरी से गायब हो गये। पुलिस की जांच

में यह पता चल गया कि ट्रेजरी से यह धन सृजन संस्था के खाते में भेजे गये थे। वहां से

यह धन किस किसके खाते में गया और घोटाले की रकम कहां है, यही तो सीबीआई को

जांचना था। लेकिन पिछले तीन वर्षों में तो सीबीआई की जांच बिहार पुलिस यानी

भागलपुर पुलिस की जांच से भी सुस्त रही है। यह स्पष्ट कर देता है कि सीबीआई को इस

मामले को लटकाने का निर्देश ऊपर से प्राप्त है। इसलिए केंद्र और राज्य सरकार को

इसका उत्तर देना चाहिए कि आखिर दोनों सरकार किसे बचाना चाहती है।

सरकार अब बताये कि सीबीआई को क्या निर्देश है

एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि सार्वजनिक चर्चा में अनेक मुद्दे सामने आ चुके हैं

लेकिन बिना सीबीआई की औपचारिक पुष्टि के किसी नेता अथवा व्यक्ति का इस घोटाले

में शामिल होने का आरोप लगाना गलत होगा। लेकिन इतना तो स्पष्ट है कि जब जिला

पुलिस जांच करने लगी थी तो धड़ाधड़ बैंक से लेकर जिला समाहरणालय तक के लोग

गिरफ्तार किये गये। आनन फानन में सीबीआई को जांच सौंपने के बाद से ही पूरी जांच

की सुस्त पड़ गयी है। श्री शर्मा ने इस मुद्दे पर कहा कि पूरे शहर ने यह देखा है कि कैसे इसी

मामले का एक अभियुक्त आराम से अपनी पूरी संपत्ति बेचकर निकल गया। उसके साथ

किस नेता और अफसर के क्या रिश्ते थे, यह भी जगजाहिर है। इसलिए बड़ा सवाल यह है

कि आखिर घोटाले का पैसा किसके पास है और सीबीआई उस पैसे को बरामद करने में देर

क्यों कर रही है। उन्होंने कहा कि जिन अफसरों के नामों की चर्चा हुई थी, उनकी बात छोड़

भी दें तो इस कांड में मुख्य अभियुक्त बनाये गये अमित और प्रिया यानी स्वर्गीय

मनोरमा देवी के पुत्र और पुत्रवधु को सीबीआई इन तीन वर्षों में नहीं तलाश पायी है, यह

भी सीबीआई के लिए बड़ा सवाल बना हुआ है।


 

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