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सरकारी पैसों से अब मदरसे नहीं संचालित होंगे असम में

  • 614 मदरसे बंद होंगे पर चालू रहेगा संस्कृत स्कूल

  •  संस्कृत स्कूलों में धार्मिक पढ़ाई नहीं होती

  •  सारे मदरसे भी अब सामान्य स्कूल बनेंगे

  •  धार्मिक पढ़ाई सरकार का काम नहीः सरमा

भूपेन गोस्वामी


गुवाहाटी : सरकारी पैसों से अब असम की सरकार ने मदरसों को लेकर बड़ा फैसला लिया

है। सरकार ने सरकारी पैसों से धार्मिक शिक्षा को बंद करने का फैसला लिया है। असम

सरकार का कहना है कि जनता के पैसों की फिजूलखर्ची अब नहीं होगी। असम सरकार ने

कहा है कि जनता के पैसे से धार्मिक शिक्षा का प्रावधान नहीं है। ये आदेश असम के

संस्कृत स्कूलों पर भी भी लागू होने वाला था लेकिन आज एक सरकारी अधिकारियों ने

बताया कि संस्कृत स्कूल में धार्मिक शिक्षा नहीं दिया जाता है ,इसीलिए  संस्कृत  स्कूल

नहीं बंद होगा। शिक्षक संस्कृत सहित सभी विषयों की पढ़ाई करवा रहा है। देवभाषा कही

जाने वाली संस्कृत भाषा के प्रचार प्रसार  होना ही चाहिए, अधिकारियों ने बताया। असम

सरकार ने कहा कि हमने सभी मदरसों विद्यालयों को हाई स्कूल और उच्चतर माध्यमिक

स्कूलों में बदलने का फैसला किया है। मदरसों कोबंद करने के फैसले पर शिक्षा मंत्री ने

कहा कि जनता का पैसा का प्रयोग धार्मिक शिक्षा देने में प्रयोग करने का कोई प्रावधान

नहीं है , इसलिए अब इन्हें बंद किया जाएगा। हिमंत विश्व शर्मा ने कहा, ‘किसी भी मदरसे

 स्कूल में धार्मिक उद्देश्यों के लिए धर्म, धार्मिक शास्त्र, अरबी या फिर कोई अन्य भाषा की

पढ़ाई कराने का काम सरकार का नहीं है। अगर कोई गैर सरकारी संगठन या सामाजिक

संगठन इन स्कूलों के लिए फंड की व्यवस्था करता है तो मुझे इससे कोई आपत्ति नहीं है।

सरकारी पैसों को सिर्फ सामान्य शिक्षा के लिए खर्च करेंगे

उन्होंने कहा कि लेकिन इन गैर सरकारी संस्थानों को भी एक नियम के मुताबिक ही ऐसे

स्कूलों को चलाने का अधिकार दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अगर मदरसों में

कुरान को पढ़ाने के लिए राज्य सरकार की ओर से धन दिया जाता है तो हमें गीता,

बाइबिल भी सिखानी होगी।हिमंत विश्व शर्मा ने साफ किया कि इस तरह धार्मिक उद्देश्य

के लिए चलाए जाने वाले स्कूलों के लिए सरकार फंड नहीं देगी इसलिए इन्हें बंद किया जा

रहा है।असम सरकार में मंत्री हेमंता बिस्वा शर्मा ने घोषणा की है कि राज्य के सभी

सरकारी मदरसे बंद किए जाएंगे।  उन्होंने कहा है कि पब्लिक के रुपयों से धार्मिक शिक्षा

देने का प्रावधान नहीं है।  इसलिए सरकारी मदरसे अब नहीं संचालित होंगे।  बता दें कि

असम में सरकारी मदद से करीब 614 मदरसे और 100 संस्कृत स्कूल चलाए जा रहे हैं।

इस बीच, असम सरकार के इस बयान पर, एआईयूडीएफ प्रमुख और लोकसभा सांसद

मौलाना बदरुद्दीन अजमल ने कहा कि अगर असम राज्य की भाजपा की अगुवाई वाली

सरकार ने सरकारी मदरसों को बंद कर दिया, तो एआईयूडीएफ और कांग्रेस गठबंधन

उनकी सरकार को फिर से खड़ा करेंगे। बता दें कि अगले साल अमास में विधानसभा

चुनाव प्रस्तावित हैं। विपक्ष इसे चुनावी मुद्दा बनाने के लिए तैयार है।


 

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  1. […] सरकारी पैसों से अब मदरसे नहीं संचालित … 614 मदरसे बंद होंगे पर चालू रहेगा संस्कृत स्कूल  संस्कृत स्कूलों में धार्मिक पढ़ाई नहीं होती  सारे … […]

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