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सरकारी रकम को सृजन के खाते में जमा करने का आदेश किसका था

  • लंबे समय से कार्यरत पत्रकार राहुल ठाकुर की राय

  • सीबीआई की जांच भी संदेह के घेरे में है

  • इस घोटाले में नेताओँ का गठजोड़ रहा है

दीपक नौरंगी

भागलपुरः सरकारी रकम को सृजन संस्था के खाते में रखने का विभागीय आदेश तो

तत्कालीन जिलाधिकारी केपी रमैय्या की तरफ से जारी किया गया था। सरकारी विभागों

को यह निर्देश दिया गया था कि सरकारी खातों का पैसा किसी सरकारी बैंक में नहीं रखकर

सृजन संस्था के खाते में जमा किया जाए। लंबे समय तक यह घोटाला चलता रहा। यहां

तक कि सृजन की मुख्य कर्ताधर्ता मनोरमा देवी जीवित रहीं, इस घोटाले की भनक किसी

एजेंसी को नहीं होना, अपने आप में बड़ा सवाल है। भागलपुर में लंबे समय से कार्यरत

पत्रकार राहुल ठाकुर के स्थानांतरण सम्मान समारोह में यह विचार व्यक्त किये।

वीडियो में देखिये उनसे हुई पूरी बात चीत

 

कोरोना गाइड लाइन के तहत आयोजित इस सम्मान समारोह के बाद राहुल ठाकुर से

भागलपुर से जुड़े मुद्दों पर उन्होंने गंभीर सवाल खड़े कर दिये। वर्ष 2003 में ईटीवी से जुड़ने

के बाद वह चंपारण के बाद सीमांचल के बाद भागलपुर आये थे।

सम्मान समारोह के बाद भागलपुर के विभिन्न मुद्दों पर उनसे लंबी बातचीत की। उन्होंने

इसी क्रम में सृजन घोटाले पर अपनी बात रखते हुए कहा कि इस बिहार के सबसे बड़े

घोटाला के मुख्य आरोपी अमित कुमार और रजनी प्रिया का अब तक कोई अता पता नहीं

होना, अपने आप में कई नये सवाल खड़ा करता है। इन दोनों मुख्य अभियुक्तों को

सीबीआई आज तक गिरफ्तार क्यों नहीं कर पायी है। इन दोनों का अब तक गिरफ्तार नहीं

होना भी खुद सीबीआई को जांच के घेरे में ला देता है। अब तक यह भी स्पष्ट नहीं हो पाया

है कि आखिर कितने रकम का घोटाला हुआ है। किस विभाग से कितना पैसा सृजन

घोटाले में डूबा है और उस पैसे की वापसी कैसे होगी, इस पर खुद सीबीआई को ही सफाई

देनी है। उनके परिवार में राजनीतिक कम और सामाजिक कार्यों में रूचि की ललक रही है।

वैसे राहुल ठाकुर की नानी भी बिहार में विधायक रही हैं। उन्होंने बताया कि उनके पिता

सामाजिक कार्यों से जुड़े रहे हैं और अभी भी वकालत करते हैं। बात-चीत के क्रम में उन्होंने

भागलपुर के उप महापौर राजेश वर्मा और गोड्डा के सांसद निशिकांत दुबे के बीच की

लड़ाई का भी जिक्र किया।

सरकारी रकम के अलावा विकास पर भी अपनी राय दी

श्री ठाकुर ने कभी यह दोनों लोगों के बीच बहुत अच्छे संबंध थे। लेकिन बाद में दोनों के

बीच मतभेद प्रारंभ होते होते मनभेद होता चला गया। उसका बढ़ता जाना ही आज की

परिणति के तौर पर दिख रहा है। आज भी नगर निगम के हर मामले में विवादों में घेरने

की वजह भी यही विवाद है। श्री ठाकुर मानते हैं कि राजेश वर्मा युवा नेता हैं और हाल के

दिनों में काफी तेजी से उभरे हैं। यहां तक कि भागलपुर विधानसभा के चुनाव में भी राजेश

वर्मा को प्राप्त वोट इसके प्रमाण हैं। जिसकी वजह से भाजपा का प्रत्याशी को पराजित

होना पड़ा। दोनों के बीच अहं का टकराव ही भागलपुर के विकास में अड़ंगे लगा रहा है।

बातचीत के मुद्दे पर स्थानीय विधायक अजीत शर्मा द्वारा गरीबों को कंबल बांटने के मुद्दे

पर भी चर्चा हुई। इस क्रम में श्री ठाकुर ने सवाल उठा दिया कि आखिर नगर निगम हर

साल गर्मी के मौसम में ही कंबल क्यों बांटा करती है। कंबल खरीद में सरकारी रकम की

गड़बड़ी का मामला तो पहले ही प्रकाश में आ चुका है। उन्होंने राय दी कि निशिकांत दुबे

और राजेश वर्मा के बीच तालमेल अगर बन पाया तभी स्मार्ट सिटी घोषित भागलपुर का

बेहतर विकास हो पायेगा।

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