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आ देखें जरा किसमें कितना है दम .. .. ..

आ देखें जरा किसमें कितना है दम, यह तो बिल्कुल फिल्म जैसी स्थिति बन रही है

किसान आंदोलनकारियों और केंद्र सरकार के बीच। दूसरी तरफ हर तरफ से ट्रैक्टरों को

हुजूम है कि दिल्ली की सीमा की तरफ बढ़ता ही चला आ रहा है। जो दावा किया जा रहा है

और जो कुछ दूसरे इलाकों से संकेत मिल रहे है, उससे तो यही लगता है कि देश की

राजधानी के बाहर यह किसानों की अब तक की सबसे बड़ी परेड होने जा रही है। वैसे भी

जो आकलन है उसके मुताबिक इतना बड़ा प्रदर्शन तो किसी राजनीतिक दल ने कभी नहीं

किया था। दूसरी तरफ सरकार अब तक अपने प्रस्ताव से आगे बढ़कर इस आंधी को रोकने

की दिशा में सिर्फ पुलिस प्रबंध में ही जुटी है। किसान नेता पहले ही साफ कर चुके हैं कि

ट्रैक्टर परेड में भाग लेने वाले किसान दिल्ली की परिधि में अपनी परेड तिरंगा के साथ

करेंगे। इस परेड के समाप्त होने के बाद सभी आंदोलनकारी अपने अपने इलाकों में लौट

जाएंगे। यह परेड भी पूरी तरह शांतिपूर्ण हुआ। लेकिन किसान नेता यह कहने से भी नहीं

चूक रहे हैं कि अगर पुलिस के सहारे उनकी परेड को रोकने की साजिश हुई तो उसके

खतरनाक नतीजे हो सकते हैं और तब जहां किसानों को रोका जाएगा, वहीं पर आंदोलन

प्रारंभ कर दिया जाएगा। कुल मिलाकर जोर आजमाइश में दोनों पक्ष यही कह रहे है कि

आ देखें जरा किसमें कितना है दम

अपने जमाने में लीक से हटकर बनी फिल्म रॉकी सुपरहिट रही थी। जिस गीत की याद आ

रही है, उसे इस फिल्म के लिए लिखा था आनंद बक्षी ने और सुरों में ढाला था राहुल देव

वर्मन ने। इसे किशोर कुमार और आशा भोंसले ने अपना स्वर दिया था। गीत के बोल कुछ

इस तरह हैं।

आ देखें ज़रा किसमें कितना है दम
जम के रखना कदम मेरे साथिया
आ देखें ज़रा, किसमें कितना है दम
जम के रखना कदम, मेरे साथिया

देखें ज़रा किसमें कितना है दम
जम के रखना कदम मेरे साथिया
आगे निकल आये हम वो पीछे रह गये
आगे निकल आये हम वो पीछे रह गये
ऊपर चले आये हम वो नीछे रह गये
ऊपर चले आये हम वो नीछे रह गये

वो हमसे हारेंगे हम बाज़ी मारेंगे
हम उनसे क्या हैं कम, नाचेंगे ऐसे हम
नाचेंगे ऐसे हम नाचेंगे वो क्या
आ देखें ज़रा किसमें कितना है दम
जम के रखना कदम मेरे साथिया

आ देखें ज़रा किसमें कितना है दम
जम के रखना कदम मेरे साथिया
शिवप्पा शिवप्पा हो हो हो
चा चा चा शा ला
शिवप्पा शा ला
शिवप्पा शिवप्पा शिवप्पा शिवप्पा शिवप्पा

सारे शहर में हमीं हैं हमसा कौन है
सारे शहर में हमीं हैं हमसा कौन है
देखो इधर हम यहीं हैं हमसा कौन है
देखो इधर हम यहीं हैं हमसा कौन है

देखेंगे देखा है जादू क्या है
यारों से जलने का काँटों पे चलने का
काँटों पे चलने का क्या है फ़ायदा

आ देखें ज़रा किसमें कितना है दम

जम के रखना कदम मेरे साथिया

आ देखें ज़रा किसमें कितना है दम
जम के रखना कदम मेरे साथिया

दूसरी तरफ पूछता है भारत वाले अर्णव भइया से अब देश ही पूछता है कि बता दो भाई

बालाकोट हमले की सूचना किसने दी थी। इधर उधऱ की फेंकने वाले फेंकू महाराज इस बार

मुंबई पुलिस की जाल में ऐसे फंसे हैं कि उनके साथ साथ भाजपा के कई नेताओं के लिए

पत्रकारों के सवालों को जबाव देना कठिन हो रहा है। कुछ लोग तो संकट को भापते हुए

मीडिया से दूरी बनाकर ही चल रहे हैं। लेकिन असली सवाल यह खड़ा हो गया है कि ऐसी

गलती के लिए बकरे की मां कब तक खैर मनायेगी। अब तो छुरी कद्दु पर गिरे या कद्दु छुरी

पर कटना तो कद्दु को ही है। अपने कद्दु बाबा अपने साथ और किन्हे ले डूबते हैं, यह देखने

वाली बात होगी। भाई साहब दूसरों से कहते थे कि पूछता है भारत। अब जब भारत वाकई

पूछने लगता है तो चेहरा बचाने की कोशिशें भी नाकामयाब हो रही हैं।

अपने झारखंड के मुखिया जी फिर से एक्टिव नजर आने लगे हैं। लेकिन पार्टी के अंदर

यानी भाजपा के भीतर ही उनके समर्थकों की संख्या उनके सीएम रहते ही इतनी कम हो

चुकी थी कि अब उनके झंडाबरदार भी गिने चुने ही नजर आते हैं। दूसरी तरफ हेमंत भइया

चुपके चुपके क्या गुल खिला रहे हैं, किसी को पता नहीं। दिल्ली गये तो दोनों खेमा से

रिश्ता सुधारकर चले आये। अब अंदरखाने में क्या कुछ हुआ है, उसका पता तो बाद में ही

चल पायेगी।

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