विश्व आदिवासी दिवस राज्यपाल द्रोपदी मुर्मू ने कहा प्रेरित करना ही दिवस का असली मकसद

विश्व आदिवासी दिवस समारोह में राज्यपाल द्रोपदी मुर्मू
  • जोहार से प्रारंभ किया संबोधन

  • पर्यावरण संरक्षण भी इसमें शामिल

  • आदिवासियों को और जागरुक बनाने की जरूरत

संवाददाता

रांची : विश्व आदिवासी दिवस पर झारखंड अनुसूचित जनजाति सरकारी सेवक संघ के कार्यक्रम में राज्यपाल द्रोपदी मुर्मू भी शामिल हुई।

इस कार्यक्रम में उन्होंने सभी को बधाई देते हुए इस विश्व आदिवासी दिवस के आयोजन तथा राष्ट्र संघ द्वारा इसे मान्यता दिये जाने पर प्रकाश डाला।

उन्होंने इस दिवस के मौके पर जिला समाहरणालय में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि इस दिवस को मनाये जाने का मूल मकसद उनके संरक्षण के साथ इस समुदाय का विभिन्न क्षेत्रों में योगदान को बढ़ावा देने हेतु प्रेरित करना और पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनके अंदर निहित संवेदनशीलता को बढ़ावा देना है।

हमारे देश एवं राज्य में पूरे उत्साह एवं उमंग के साथ इस दिवस को मनाया जाता है

तथा इस अवसर पर कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।

श्रीमती मुर्मू ने कहा कि झारखण्ड राज्य वीरों की भूमि है।

इस राज्य में धरती आबा बिरसा मुण्डा, बीर बुधु भगत, सिद्धो-कान्हु, चाँद-भैरव, फूलो-झान्हो समेत अनेक सपूत हुए हैं,

जिन्होंने देश एवं समाज के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। इनका जन्म जनजाति कुल में ही हुआ।

मैं इस अवसर पर इन महान सपूतों के साथ अन्य सभी विभूतियों के प्रति सम्मान प्रकट करती हूँ,

जिन्होंने देश एवं राज्य के लिए संघर्ष किया तथा अपनी जान तक की परवाह न की।

आदिवासियों की कला और परंपरा हमेशा समृद्ध रही है

जनजातियों की कला, संस्कृति, लोक सहित्य, परंपरा एवं रीति-रिवाज समृद्ध रही है।

जनजातीय गीत एवं नृत्य बहुत मनमोहक है। ये प्रकृति प्रेमी होते हैं।

इसकी झलक इनके पर्व-त्योहारों में भी दिखती है।

इस राज्य में ही विभिन्न अवसरों पर देखते हैं कि जनजातियों के गायन

और नृत्य उनके समुदाय तक सीमित नहीं हैं, सभी के अंदर उस पर झूमने के लिए इच्छा जगा देती है।

झारखंड राज्य में लगभग 3.25 करोड़ से अधिक की आबादी में जनजातियों की संख्या आबादी का लगभग 27 प्रतिशात है।

राज्य में 30 से अधिक प्रकार की अनुसूचित जनजातियाँ हैं, जिनमें आदिम जनजातियाँ भी शामिल हैं।

जनसंख्या का अधिकांश हिस्सा गाँवों में बसता है।

विश्व आदिवासी दिवस पर सभी बुद्धिजीवी लोगों को जागरुक करने का संकल्प लें

प्राकृतिक सौन्दर्य से सुशोभित इस राज्य को संविधान की पाँचवीं अनुसूची में शामिल किया गया है

ताकि इस क्षेत्र में निवास कर रहे जनजातियों का सर्वांगीण विकास हो सके।

अनुसूचित जनजातियों के विकास के लिए केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा विभिन्न कल्याणकारी योजनायें संचालित है।

इन योजनाओं का बेहतर तरीके से लागू होने पर इनका विकास जरूर होगा।

इसलिए सभी से आह्वान है कि बुद्धिजीवी लोग सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का

आम जन तक प्रचार-प्रसार कर उन्हें लाभान्वित करने की पहल करें।

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