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गोरिल्ला संरक्षण से अब राष्ट्रीय आय बढ़ा रहा है रवांडा




किगालीः गोरिल्ला संरक्षण ही अब रवांडा जैसे संकटग्रस्त देश के लिए कमाई के नये रास्ते खोल रहा




है। वहां के लोगों ने पर्यावरण संरक्षण और इस प्रजाति को विलुप्त होने से बचाने के लिए इसपर

ध्यान दिया था। अब वहां गोरिल्ला की आबादी पर्याप्त होने की वजह से वह देश पश्चिमी देशों के

लिए एक पसंदीदा पर्यटन क्षेत्र बन गया है। इससे रवांडा देश की आमदनी तेजी से ऊपर जा रही है।

साथ ही बाहर से आने वाले पर्यटकों की वजह से वहां पर्यटन आधारित रोजगार के नये अवसरों का

सृजन हो रहा है। इसकी कहानी भी कम रोचक नहीं है। जब डियान फौसी पहली बार साठ के दशक

में वहां यानी रवांडा पहुंची थी तो स्थिति बिल्कुल उलट थी। वहां के पहाड़ी गोरिल्ला को आम आदमी

बहुत ही आक्रामक और खतरनाक मानता था। दूसरी तरफ उसके अंगों की बिक्री के लिए लगातार

गोरिल्ला का शिकार भी हो रहा था। रवांडा के जंगलों में उस वक्त गोरिल्ला की प्रजाति खतरे में पड़ी

हुई थी। उनकी रिसर्च और रिपोर्ट के आधार पर जब इस तरफ वैश्विक ध्यान गया तो दुनिया भर के

लोगों ने इस प्रजाति को बचाने के लिए किये जाने वाले प्रयासों की भरपूर मदद की। उसके बाद से




स्थानीय स्तर पर भी लोगों की सोच बदलने लगी।

गोरिल्ला संरक्षण का काम डियान फौसी की रिसर्च पर प्रारंभ

फौसी की रिसर्च के आधार पर वहां गोरिल्ला संरक्षण के काम से स्थानीय लोगों को भी जोड़ा गया।

इससे धीरे धीरे उनकी आबादी बढ़ने लगी। उस वक्त स्थानीय लोग सिर्फ एक विलुप्त होती जंगली

प्रजाति को बचाने के काम से जुड़े थे। लेकिन इन गोरिल्ला को स्वतंत्रता के साथ जंगलों में विचरण

करने दिया गया तो स्थानीय लोग उनके बारे में ज्यादा समझ पाये। अब यह पश्चिमी देशों के

पर्यटकों के लिए एक पसंदीदा केंद्र बन गया है। विदेशी पर्यटक खास तौर पर वहां के जंगलों में

गोरिल्ला देखने आते हैं। इस वजह से वहां पर्यटन आधारित उद्योग पनप चुका है और स्थानीय

लोगों को इसके जरिए रोजगार भी काफी मिल रहा है। यानी सिर्फ पर्यावरण संरक्षण और एक

प्रजाति को बचाने के लिए किया गया प्रयास अब लोगों की कमाई का मूल जरिया बन गया है। इससे

देश की आर्थिक हालात भी धीरे धीरे सुधरती जा रही है।



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