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गूगल ने अदालत को बताया केंद्र का कानून हमपर लागू नहीं

  • राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः गूगल ने केंद्र सरकार को फिर से परेशानी में डाल दिया है। देश के नये आइटी

कानून का पालन करने के संबंध में गूगल ने अदालत में यह दलील दी है कि वे सोशल

मीडिया प्लेटफॉर्म नहीं हैं। इसलिए यह कानून भी उनपर लागू नहीं होता है। गूगल

इनकॉरपोरेशन की तरफ से अदालत को बताया गया है कि वह सर्च इंजन का काम करती

है। जो सोशल मीडिया नहीं हैं। इसमें लोगों को किसी विषय पर राय जाहिर करने की छूट

भी नहीं है। गूगल सर्च इंजन की अपनी तकनीक के आधार पर वह दुनिया भर से प्रसारित

होने वाली सूचनाओं को समेटती है और अपने सर्च इंजन के माध्यम से लोगों तक

पहुंचाती है। इसलिए उसे सोशल मीडिया के दायरे में नहीं रखा जा सकता है। गूगल की इस

दलील के साथ साथ एक जज द्वारा पारित आदेश को भी रद्द करन की मांग की गयी है।

गूगल ने पूर्व में पारित आदेश को रद्द करने की मांग की

इस मुद्दे पर दिल्ली हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह

ने अदालत ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने को कहा है। अदालत ने

स्पष्ट कर दिया कि इस मामले की सुनवाई के बीच वह कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं

करने जा रही है। गूगल ने एक जज के उस फैसले पर आपत्ति जतायी है जिसमें उसे भी

सोशल मीडिया के दायरे में रखते हुए वहां उपलब्ध कुछ सूचनाओं को हटाने को कहा गया

था। दरअसल यह मामला अभद्र तस्वीर से जुड़ा हुआ था, जिसे कुछ शरारती लोगों ने

अपलोड किया था। गूगल की तरफ से दलील दी गयी है कि किसी भी आपत्तिजनक

सूचना को हटाने का आदेश वेबसाइट्स पर अथवा सोशल मीडिया पर लागू करने के लिए

नया कानून बनाया गया है। लेकिन गूगल की प्रक्रिया दुनिया भर में जारी होने वाली

सूचनाओं को एकीकृत कर उन्हें सर्च इंजन के जरिए लोगों को उपलब्ध कराना भर है।

इसलिए किसी भी तरीके से यह नहीं कहा जा सकता है कि गूगल एक सोशल मीडिया है।

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