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पर्यावरण संकट के बीच ही ऑस्ट्रेलिया के समुद्र से आयी अच्छी खबर




ग्रेट बैरियर रीफ फिर से रंग बिरंगा हुआ

पूरे इलाके में रीफ की हो रही वंशवृद्धि

बेरंग हो गया था इसका अधिकांश इलाका

फिर से सुधार कैसे हुआ कारण का पता नहीं

राष्ट्रीय खबर

कैनबेराः पर्यावरण संकट के बीच ही विश्वप्रसिद्ध कोरल रीफ का इलाका फिर से गुलजार है। दरअसल इस समुद्री स्थान में प्रदूषण की वजह से जो परिस्थितियां बनी थी, उसे लेकर समुद्री वैज्ञानिक बहुत चिंतित थे। अब वहां से उत्साहजनक जानकारी मिली है। यहां के ग्रेट बैरियर रीफ का यह समुद्री जंगल फिर से हरा भरा हो गया है




और वहां के रंग बिरंगे कोरलों की वजह से अनेक किस्म के छोटे समुद्री जीव फिर से वहां लौट भी आये हैं।यह बता दें कि समुद्री तल पर बने ऐसे ही प्रवाल के द्वीप का समुद्री पर्यावरण के साथ बहुत नजदीकी रिश्ता होता है। जब ऐसे कोरल द्वीप ठीक रहते हैं तो उनके जरिए अनेक किस्म के समुद्री जीवों का गुजर बसर होता है।

अनेक समुद्री प्राणियों की प्रजातियों का विकास भी इन पर आधारित है। इसलिए जब ऐसे कोरल रीफ पर्यावरण संकट की वजह से नष्ट होते हैं तो इन समुद्री प्राणियों का जीवन भी खतरे में पड़ जाता है।

ऑस्ट्रेलिया के इस ग्रेट बैरियर रीफ को वैश्विक धरोहर इसी वजह से घोषित किया गया था। उसे बचाने के हर संभव प्रयास के बाद भी पर्यावऱण संकट और प्रदूषण की वजह से यह विश्व प्रसिद्ध इलाका नष्ट होने लगा था।

समुद्री वैज्ञानिकों ने पाया था कि वहां के प्रवाह नष्ट होते जा रहे हैं। दरअसल ऐसे इलाकों के नष्ट होने का पता उनके बेरंग होने से चल जाता है। ग्रेट बैरियर रीफ का अधिकांश इलाका पूरी तरह बेरंग हो गया था।

अचानक से वहां बदलाव दिखने लगा है क्योंकि लगभग पूरा इलाका फिर से हरा भरा हो चला है। प्रवाल द्वीप के हर भरा होने को खुली आंखों से वैज्ञानिक देख पा रहे हैं।




पर्यावरण संकट की वजह से बेरंग हो गया था इलाका

ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड इलाके के तट पर यह क्षेत्र प्रशांत महासागर में स्थित है। अब गत मंगलवार की रात को समुद्री वैज्ञानिकों ने वहां के मुआयना कर पाया है कि फिर से वहां कोरल खुद अपनी वंशवृद्धि कर रहे हैं। इसी वजह से यह इलाका फिर से कई रंगों वाला नजर आ रहा है। इसके फिर से सक्रिय होने की पहचान ही है कि वह रंग बिरंगा हो जाता है।

वहां फिलहाल पर्यावरण संकट के बाद भी ऐसा ही नजारा नजर आ रहा है। ऐसा देखकर समुद्री वैज्ञानिक काफी उत्साहित हैं। यह बताया गया है कि फिलहाल वहां जो स्थिति है वह अगले कुछ दिनों तक लगातार जारी रहेगा और कोरल की अपनी वंशवृद्धि की इस प्रक्रिया के बाद यह इलाका फिर से और बेहतर हो जाएगा। यह जान लें कि ग्रेट बैरियर रीफ का यह इलाका करीब 348 हजार वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। यहां पर रीफ के ढाई हजार से अधिक प्रजातियां हैं।

इसी वजह से इसे एक वैश्विक धरोहर घोषित किया गया था। हाल के दिनों में पर्यावरण संकट बढ़ने तथा अत्यधिक प्रदूषण की वजह से इस पर जबर्दस्त कुप्रभाव पड़ा था। प्रारंभ में यह पाया गया था कि समुद्री जल का तापमान बढ़ने की वजह से इस इलाके पर कुप्रभाव पड़ने लगा था। वर्ष 2016 में पहली बार इस प्रभाव को देखा गया था जब यहां के प्रवाल बेरंग होने लगे थे। वर्ष 2017 और पिछले वर्ष भी लगभग यही स्थिति रही थी। नतीजा था कि प्रवाल द्वीप का लगभग दो तिहाई इलाका नष्ट हो गया था।

अनुमान है कि शायद लॉकडाउन से स्थिति में सुधार

समुद्री वैज्ञानिक गैरथ फिलिप ने इस बारे में बुधवार को कहा कि स्थिति को देखकर अच्छा लगता है जबकि वहां के हालात देखकर ऐसा लगता है कि प्रकृति के पास अपनी खामियों को सुधारने की वह क्षमता है, जिसके बारे में आधुनिक विज्ञान अब तक कुछ नहीं जान पाया है। वहां की परिस्थितियों पर निरंतर नजर रखने वाले वैज्ञानिकों का मानना है कि यह सुधार डेढ़ साल पहले ही प्रारंभ हो गया था लेकिन तब यह बात समझ में नहीं आयी थी।

अब इस सुधार की गति अत्यंत तेज होने की वजह से उसे साफ साफ देखा जा रहा है। कुछ लोगों का मानना है कि शायद वैश्विक लॉकडाउन का भी इसमें कोई योगदान रहा है क्योंकि उन दिनों अचानक से सारी चहल पहल समाप्त होने के साथ साथ पर्यावरण संकट भी घट गया था क्योंकि प्रदूषण की स्थिति में सुधार तो धरती के ऊपर भी देखा गया था।

जब शांति होने की वजह से गर्म इलाको में भी प्रदूषण से बढ़ने वाला तापमान रूक गया था। शांति की वजह से जंगली जानवर भी शहरों के अंदर आने लगे थे। वजह चाहे जो भी हो, पर्यावरण संकट के बीच इस पूरे इलाके का फिर से रंग बिरंगा होना समुद्री पर्यावरण में सुधार का ही संकेत है। 



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