ग्लोबल वार्मिंग से नये किस्म के युद्ध की शुरुआत आपस में लड़ रहे हैं देश

ग्लोबल वार्मिंग से सीमा लांघ रहे मछुआरे
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  • समुद्री मछलियां छोड़ रही हैं अपना इलाका

  • बदल रहा है मछुआरों के शिकार का क्षेत्र

  • खई इलाकों में समुद्र का पानी हो रहा है गर्म

  • गर्मी छोड़कर ठंडे पानी में जा रही मछलियां

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः ग्लोबल वार्मिंग का एक नया खतरा सामने आ रहा है।

यह खतरा मछली मारने के मुद्दे पर विभिन्न देशों का एक-दूसरे की सीमा का अतिक्रमण है।

इससे अक्सर ही यूरोपिय इलाके में अत्यधिक तनाव उत्पन्न हो रहा है।

मछुआरों के विवाद में कई बार संबंधित देशों की नौसेना तक को हस्तक्षेप करना पड़ा है।

इससे यह खतरा बढ़ता ही जा रहा है कि मछली उद्योग की वजह से

किसी भी देश पड़ोसी देश आपस में भिड़ सकते हैं।

ऐसा इसलिए है क्योंकि सभी संबंधित पक्षों की आर्थिक गतिविधियों का एक मुख्य आधार समुद्री मछलियों पर आधारित उद्योग भी है।

मछलियों के इलाका बदलने पर शोध करने वालों का मानना है कि ग्लोबल वार्मिंग की वजह से समुद्री मछलियां अपने पारंपरिक इलाकों को छोड़कर अपेक्षाकृत ठंडे इलाकों के पानी में चली जा रही हैं।

इससे देशों की आपसी समुद्री सीमा भी ध्वस्त हो रही है।

समुद्र में इन इलाकों की कोई रेखांकित सीमा नहीं होती।

इस वजह से मछली मारने के प्रयास में एक देश की नौकाएं दूसरे देश की समुद्री सीमा में प्रवेश कर रही हैं।

संबंधित देश के मछुआरे जब इसका विरोध करते हैं तो दोनों देशों की नौसेना का हस्तक्षेप करना पड़ रहा है।

इस कड़ी में हाल ही में फ्रांस और ब्रिटिश मछुआरों के बीच भीषण तनाव की स्थिति बन आयी थी।

समुद्र में पाये जाने वाली एक खास प्रजाति की मछली के स्थान बदलने की वजह से मछली मारने समुद्र में आये मछुआरे दूसरे देश की सीमा में प्रवेश कर गये थे।

मछुआरों का तर्क है कि आम तौर पर वे सदियों से मछलियों की स्थिति देखकर ही जाल डाला करते हैं।

इस काम में कौन सा इलाका किसके देश का है, यह पता भी नहीं चलता।

ग्लोबल वार्मिंग से मछली मारने वालों को भी परेशानी

अब जिन इलाकों में मछली है ही नहीं, वहां जाल डालने से तो बेहतर है कि उन इलाकों की तलाश की जाए, जहां मछलियां मौजूद हैं।

समुद्र में विवाद उत्पन्न होने पर मछुआरे यह तर्क भी देते हैं कि वे किसी दूसरे देश के नियमों का पालन करने के लिए बाध्य नहीं हैं।

दूसरी तरफ समुद्री जीवन की हर गतिविधि का बारिकी से विश्लेषण करने वाले वैज्ञानिक यह मान रहे हैं कि ग्लोबल वार्मिंग का असर समुद्री जल पर पड़ा है।

अब समुद्र में जिन इलाकों का पानी गर्म हो रहा है, वहां की मछलियां जगह बदल रही हैं।

इससे संबंधित देशों के मछली उद्योग पर भी खतरा होना स्वाभाविक है।

वैज्ञानिक यह चेतावनी पहले ही दे चुके हैं कि अगर समुद्र की स्थिति नहीं सुधरी तो

समुद्री जनजीवन तबाह हो जाएगा।

उस वक्त सभी देशों के लिए समुद्र आधारित खाद्य का नया संकट पैदा हो जाएगा।

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