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गिर वन में तीन माह में 20 से अधिक एशियाई शेरों की मौत

अहमदाबादः गिर वन ही एशियाई शेरों की एकमात्र शरणस्थली है। गुजरात के गिर वन में

पिछले तीन माह में 20 से अधिक शेरों की बाबेसिया नाम की परजीवी जनित बीमारी से

मौत होने का खुलासा हुआ है। जूनागढ़ के मुख्य वन संरक्षक डी टी वसावड़ा ने आज इसकी

पुष्टि करते हुए यूएनआई को बताया कि पिछले लगभग तीन माह में 23 शेरों की मौत हुई

है। इनमें से अधिकतर बाबेसिया नामक प्रोटोजोआ परजीवी जनित बीमारी से मरे हैं।

इनसे प्रभावित लगभग 18 अन्य शेरों को जसाधार के पशु चिकित्सा केंद्र में रखा गया था

और स्वस्थ हुए छह को देर रात वापस जंगल में छोड़ दिया गया है। जिनको वापस में

जंगल में छोड़ा गया है उनमें पांच मादाएं थीं। उन्होंने बताया कि यह बीमारी जानवर से

जानवर में फैलने वाली संक्रामक बीमारी नहीं है। श्री वसावड़ा ने बताया कि अधिकतर मौतें

गिर वन के पूर्वी क्षेत्र में तुलसीश्याम और जसाधार रेंज में हुई हैं।

गिर वन में पहले से ही शेरों की मौत का क्रम जारी

ज्ञातव्य है कि गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में जूनागढ़, गिर सोमनाथ और अमरेली के अलावा

भावनगर के कुछ हिस्सों तक फैले गिर वन क्षेत्र में वर्ष 2015 की पिछली सिंह गणना के

अनुसार 500 से अधिक शेर थे। वर्ष 2018 के अंतिम कुछ माह में पूर्व गिर वन के

दलखानिया रेंज में विषाणु जनित कैनाइन डिस्टेंपर रोग से दो दर्जन से अधिक शेरों की

मौत की पुष्टि हुई थी। इसके पहले भी इस गिर वन संरक्षणी के इलाके में बसे गांवों के

लोगों ने भी अपने अपने इलाकों में शेरों की मौत की सूचना दी थी। इनमें से कुछ के बारे में

यह पता चल गया था कि कुछ अधिक उम्र के कारण और कुछ आपसी संघर्ष की वजह से

जान गवां चुके हैं। फिर भी यहां किसी खास बीमारी का ऐसा प्रकोप होना पशु विशेषज्ञों को

चिंता में डाले हुए हैं क्योंकि शेर अक्सर ही झूंड में रहते हैं और ऐसी स्थिति में संक्रमण

फैलने की आशंका बहुत अधिक बढ़ जाती है।


 

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