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जेनेटिक्स के वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में तैयार किये ब्रेन के सेल




  • दस हफ्ते में तैयार किये प्रारंभिक अंश

  • अब विकसित होने के बाद अधिक जीवंत हैं

  • अनेक किस्म की बीमारियों को हो पायेगा स्थायी ईलाज

  • कृत्रिम तरीके से विकसित ब्रेन सेल में भी जीवन के संकेत


प्रतिनिधि

नयीदिल्लीः जेनेटिक्स के वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में कृत्रिम ब्रेन सेल बनाने में सफलता पायी है।

यूं तो इस किस्म के जेनेटिक विकास के तहत सेल पहले भी बनाये गये थे।

इस बार के सेल की विशेषता यह है कि इस विधि से तैयार ब्रेन सेल के भीतर से दिमागी संकेत

अर्थात जीवंत होने के प्रमाण भी मिल रहे हैं।

इस निष्कर्ष से वैज्ञानिक काफी उत्साहित हैं।

उनका मानना है कि इस विधि को और विकसित कर दिमागी बीमारियों से पीड़ित गंभीर किस्म के रोगियों का

स्थायी उपचार किया जाना संभव होगा।


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कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने अपनी प्रयोगशाला में इस ब्रेन सेल को विकसित किया है।

अत्यंत सुक्ष्म आकार के ब्रेन को सही तरीके से बनाने के बाद जब इसकी जांच की गयी तो उसमें से ब्रेन से

जारी होने वाले संकेतों का भी पता चला।

इससे अब माना जा रहा है कि इस विधि की मदद से भविष्य में इंसानी दिमाग के मध्य का हिस्सा जिसे कॉरटेक्स कहते हैं,

उसे भी सुधारा और नये सिरे से बनाया भी जा सकता है।

इस बारे में प्रकाशित शोध प्रबंध के मुख्य लेकर एलिसन मुओत्री ने कहा कि हमलोग अब ब्रेन को

नये सिरे से बनाने की तरफ एक बड़ा कदम बढाने में सफल रहे हैं।

इससे आगे ब्रेन की पूरी संरचना के बारे में अब तक जितनी जानकारी है, उसके आधार पर

दिमाग के इस सेल को और विकसित किया जा सकता है।

इस सेल को तैयार करने के पूर्व दिमागी संरचना का मॉडल बनाया

इस सेल को बनाने के लिए वैज्ञानिकों के दल ने पहले इंसानी दिमाग की संरचना का प्रतिरुप तैयार किया।

उसके छोटे से हिस्से को समझने के बाद उस हिस्से के एक खास सेल को तैयार करने का यह काम प्रारंभ किया गया था।

इस प्रयोग के सफल होने के बाद ऐसा माना जा रहा है कि इंसानी शरीर की सबसे जटिल संरचना वाले

ब्रेन के अंदर के अन्य सेलों का भी क्रमवार तरीके से निर्माण प्रयोगशाला में किया जा सकता है।

इसके अंदर से ब्रेन के संकेत मिलने की वजह से यह तय है कि इंसानी ब्रेन की तरह इसमें भी न्यूरॉन की शक्ति पैदा की जा सकती है।

उसके बाद इन तमाम सेलों को आपस में सही तरीके से जोड़ देने से ब्रेन के किसी खास हिस्से का जीवंत प्रतिरूप तैयार हो जाएगा।


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सेल कल्चर विधि से इस प्रयोग को आगे बढ़ाते हुए इनलोगों ने इसे तैयार किया है।

इसके तहत प्रारंभिक अवस्था में जिससे सेल तैयार होते हैं, वे आर्गेनायड बनाये गये थे।

पिछले दस महीनों में सैकड़ों की संख्या में आर्गेनायड तैयार करने के बाद उनमें विद्युतीय गतिविधि के प्रवाह को निरंतर नापा जाता रहा।

दो माह पूर्व इनमें से वैद्युतिक गतिविधियों के संकेत आने प्रारंभ हुए थे।

उस वक्त यह कभी कभार आने वाले संकेत थे।

लेकिन जैसे जैसे ये विकसित होते गये, संकेतों में स्थायित्व आता चला गया।

इससे समझा जाता है कि जैसे जैसे यह सेल परिपक्व होते चले गये उन्होंने खुद ही खुद को विकसित करने का काम पूरा कर लिया।

जेनेटिक्स के वैज्ञानिकों ने पाया कि विकसित होने के साथ साथ इनका गुण विकसित हुआ

अब वे आपस में संकेतों का आदान प्रदान भी करने लगे हैं। इसी वजह से ब्रेन के अंदर की गड़बड़ियों को सुधारने की उम्मीद बढ़ी है।

इसे इंसानी ब्रेन के विकास की प्रारंभिक कड़ी के जैसा देखा गया है।




जाहिर है कि आने वाले दिनों में इसके और विकसित होने की स्थिति में दरअसल यह अनुसंधान किस दिशा में आगे बढ़ रहा है,

उसका पता चल जाएगा।

वर्तमान में इन कृत्रिम सेलों से जो संकेत आ रहे हैं, वे किसी गर्भस्थ शिशु के जैसे ही हैं।

अब उनके विकास की रुपरेखा भी तैयार की जा रही है

ताकि आम इंसानी के दिमागी विकास के साथ उसकी तुलना की जा सके।

शोध से जुड़े वैज्ञानिक मानते हैं कि यह ब्रेन तैयार करने की बिल्कुल प्रारंभिक अवस्था जैसी स्थिति है।

प्रयोगशाला में सिर्फ सेल ही बनाये गये हैं। नये सिरे से ब्रेन बनाने के लिए जरूरी अन्य हिस्से और ढांचे उपलब्ध नहीं हैं।


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लेकिन अगर यह प्रयोग सफल हुआ तो शेष काम भी पूरा कर लिया जाएगा और तब नये सिरे से

इंसानी ब्रेन को प्रयोगशाला में तैयार कर पाना भी संभव हो जाएगा।

दरअसल इन सेलों के विकास से वैज्ञानिक दिमागी बीमारी से पीड़ित लोगों के दिमागी सेल की दशा सुधारने की उम्मीद कर रहे हैं।

उनका मानना है कि बीमारी व्यक्ति के दिमाग में ऐसे स्वस्थ ब्रेन सेलों की प्रतिक्रिया से बीमारी को दूर किया जा सकेगा।

इस विधि से मिर्गी, सिजोफ्रेनिया और भूलने जैसी बीमारी से ग्रस्त मरीजों को बहुत फायदा होगा।


विज्ञान की कुछ और सूचनाएं

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