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जेनेटिक संरचना से निर्देशित होते हैं शरीर के अनेक अंग

  • बायें हाथ का इस्तेमाल भी इसकी विशेषता

  • दिमागी गतिविधियों का पैमान भी दर्ज हुआ था

  • कौन हाथ इस्तेमाल करेगा, गर्भ में भी पता चला

  • 17 लाख लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया

रांचीः जेनेटिक संरचना की विविधता के बारे में हमारा विज्ञान पहले से ही जानता है। अब

इस बात की जानकारी मिली है कि जो लोग अपने दैनिक कार्यों में बायें हाथ का ज्यादा

इस्तेमाल करते हैं, वे दरअसल उनकी जेनेटिक संरचना की वजह से ही होता है। एक बहुत

बड़े शोध के तमाम आंकड़ों का विश्लेषण करने के बाद वैज्ञानिक इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं।

वर्तमान में भी कोरोना की वजह से मरीजों के गहन अध्ययन का सिलसिला जारी है।

इसके तहत ही संक्रमण से जेनेटिक और आंतरिक संरचना पर पड़ रहे प्रभावों को भी जांचा

परखा जा रहा है। इस बार बायें हाथ के बारे में जो निष्कर्ष निकाला गया है, वह पूरी दुनिया

में 17 लाख लोगों के आंकड़ों के विश्लेषण का परिणाम है। इस अनुसंधान में 41 किस्म की

जेनेटिक विशेषताओं का पता चला है। यह सभी जेनेटिक कारणों से इंसान की

गतिविधियों के संचालन में अलग अलग भूमिका निभाते हैं। इसमें से सात को बिल्कुल

खास पहचाने गये हैं। ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने इन

आंकड़ों को एकत्रित करने के बाद उनका विश्लेषण किया था। इस शोध दल के नेता

प्रोफसर डेविड इवांस थे। उनके मुताबिक इस बार चूंकि आंकड़ों की संख्या बहुत अधिक

थी, इसलिए नतीजा निकालना ज्यादा आसान रहा क्योंकि अधिक नमूनों में उन बातों को

ज्यादा गहराई से परखा जा सकता है जबकि नमूनों की संख्या कम होने पर ऐसी जांच की

गुंजाइश कम हो जाती है। प्रो इवांस वहां के डियामानटिना इंस्टिट्यूट से जुड़े हुए हैं।

जेनेटिक संरचना पर इस बार बड़ा शोध हो पाया है

कुल 48 अलग अलग किस्म की जेनेटिक विविधताओं का पता चलने के बाद उनका शरीर

के आचरण पर पड़ने वाले प्रभाव का एक एक कर विश्लेषण किया गया था। इसी से यह

बात निकलकर सामने आयी कि दरअसल जो लोग बायें हाथ का इस्तेमाल करते हैं, वे

अपनी जेनेटिक संरचना की वजह से ऐसा करते हैं। इस शोध के निष्कर्ष को कल यानी गत

मंगलवार को सार्वजनिक किया गया है। शोध वैज्ञानिक यह परख चुके हैं कि आम तौर पर

इंसान के दाहिने हाथ के बदले जो लोग बायें हाथ का इस्तेमाल करते हैं, वे अपने जेनेटिक

संरचना की वजह से ऐसा करते हैं। बाद में उनकी परवरिश जिस माहौल में होती है, वे उसी

के अनुरुप ढलते जाते हैं। इसी वजह से चंद लोगों में ही यह विशेषता होती है कि वह

लिखने में दोनों हाथों का एक समान इस्तेमाल कर पाते हैं, वरना आम आदमी के लिए यह

बहुत कठिन काम होता है। खेल के मैदान में भी बायें हाथ के खिलाड़ी औसतन कम होते हैं

लेकिन अपनी इस विशेषता की वजह से वे बेहतर प्रदर्शन कर पाते हैं। दूसरी तरफ चूंकि

औसत व्यक्ति का मानसिक विकास दाहिने हाथ के लिए होता है, इसलिए खास तौर पर

क्रिकेट के मैदान में बायें हाथ के खिलाड़ी को समझ पाना दूसरों के लिए थोड़ा कठिन कार्य

बन जाता है।

हाथों का इस्तेमाल करने की आदत महज संयोग नहीं

इस शोध से जुड़ी रही प्रोफसर साराह मिडलैंड कहती हैं कि दोनों हाथों के इस्तेमाल का यह

अंतर महज कोई संयोग नहीं होता। जेनेटिक संरचना की वजह से ही इंसान अपने दिमाग 

से प्राप्त होने वाले संकेतों के आधार पर ऐसी प्रतिक्रिया देता है। बाद में यह अभ्यास में

तब्दील हो जाती है। शोध दल ने अपने इस काम के लिए बायें हाथ का इस्तेमाल करने

वाले लोगों की दिमागी संरचना का भी अध्ययन किया है। वहां इस जेनेटिक संरचना की

वजह से होने वाली गतिविधियों को भी दर्ज किया गया है। आंकडों में उनका भी विश्लेषण

करने के बाद ही वैज्ञानिक बायें हाथ के बारे में इस निष्कर्ष पर पहुंच पाये हैं। अनुसंधान

करने वालों ने बताया है कि इंसान के दिमाग के संरचना कुछ ऐसी है कि अलग अलग

काम के लिए दिमाग से जो निर्देश जारी होते हैं, वे दिमाग के अलग अलग हिस्सों से जारी

होते हैं। इन निर्देशों को सही तरीके से पहुंचाने में जो रास्ता तैयार होता है वह प्रोटिन की

प्रतिक्रिया है। इससे दिमाग और संबंधित अंग के बीच एक विद्युतीय संपर्क बनता है

जबकि यह सब कुछ जेनेटिक संरचना की विभिन्नता की वजह से अलग अलग तरीके से

संचालित होता है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि जेनेटिक संरचना की विविधता का पता तो

गर्भस्थ शिशु में भी दिख जाता है। गर्भ में पलते शिशु के हाथ के संचालन की प्रक्रिया से ही

समझा जा सकता है कि वह जन्म लेने के बाद किस हाथ का कुशलता के साथ इस्तेमाल

करने वाला है।


 

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