fbpx Press "Enter" to skip to content

जेनेटिक संरचना के विश्लेषण से हमले के तरीकों का पता चला

  • शोधकर्ताओं ने तैयार किये कोरोना वायरस के मैप

  • सामूहिक तौर पर आंकड़ों के विश्लेषण का काम

  • संक्रमण के हरेक कोष की अलग से जांच हो रही

  • भारत में पहली बार नजर आया है बदलाव

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः जेनेटिक संरचना जैसे जैसे समझ में आ रही है,कोरोना के ईलाज की गति तेज

हो रही है। वैसे इस दौरान बुरी बात यह भी है कि अब यह वायरस कई इलाकों में अपने

आप में बदलाव करता नजर आ रहा है। वैसे भी इस किस्म के वायरस में अपने आप को

बदलने का पुराना इतिहास रहा है। इसे हम पहले के वायरस हमलों के दौरान भी देख चुके

हैं। लेकिन शोधकर्ताओं ने इसके मैप तैयार किये हैं। इस मैप के जरिए यह वायरस कैसे

हमला करता है उसे सुनिश्चित किया जा रहा है। इसका असली मकसद कोई

मान्यताप्राप्त दवा मिलने के पहले तक संक्रमण को फैलने से रोकना है। कोविड 19 के

मरीजों का अध्ययन करने के बाद यह देखा गया है कि विषाणु का आक्रमण आंतरिक

अंगों को नुकसान पहुंचाता है। दरअसल वायरस के शरीर के अंदर आने के बाद उसके

संकेतों के आधार पर शरीर की आंत में उन संकेतों के अनुरुप प्रतिक्रिया करने की स्थिति

मौजूद होती है। इससे 20 प्रतिशत मरीजों के हृदय पर असर होने के बाद हार्ट अटैक की

घटनाएं घटित हो रही है।

कई संस्थान एक साथ मिलकर कर रहे हैं यह काम

कई विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों के संयुक्त प्रयास से यह नतीजे सामने आये हैं।

इसी वजह से अब इन तमाम आंकड़ों को विश्लेषित करने के साथ साथ शोध को आगे

बढ़ाया जा रहा है। शोध वैज्ञानिकों ने इसकी जेनेटिक संरचना का गहन अध्ययन कर दो

प्रमुख प्रोटिनों की पहचान की है। इन्हें एसीई 2 और टीएमपीआरएसएस 2 बताया गया है।

यही प्रोटिन इंसानी शरीर के कोष में प्रवेश कर रहे हैं। इनमें से पहला वायरस के प्रवेश का

रास्ता तैयार करता है जबकि दूसरा कोष को वायरस की वंश वृद्धि के लिए संकेत देता है।

इस शोध के आगे बढ़ाने के लिए वैज्ञानिकों ने बीस अलग अलग टिश्यूज का परीक्षण

किया है। इसी आधार पर यह समझा जा सका है कि दरअसल यह वायरस हमला और

हमला करने के बाद शरीर को संक्रमण से प्रभावित कैसे करता है।

इस शोध से जुड़े डॉ मिशेली नोसेडा ने कहा है कि शोध दल ने इस काम के लिए पांच लाख

की तादाद में उन एक सेलों का अध्ययन किया है जो 14 अलग अलग मरीजों से हासिल

किये गये थे। इसी आधार पर अब यह नतीजा निकाला गया है कि यह वायरस इंसान के

मुंह अथवा नाक और कई मौकों पर आंख के जरिए शरीर में प्रवेश करता है। यह गले में

अपना पहला घर बनाता है। लेकिन उसे सक्रिय करने वाले अन्य तत्व इंसानी शरीर के

अंदर पहले से मौजूद होने की वजह से बाद का काम अपने आप होता चला जाता है।

जेनेटिक संरचना समझने से ईलाज आसान होगा

वेलकम रिसर्च इंस्टिटियूट के निदेशक प्रोफसर सर जेरेमी फरार कहता हैं कि इसे और

गहराई से समझ लिया जाना चाहिए क्योंकि यह अभी दुनिया के लिए सबसे बड़ी चुनौती

बना हुआ है। इसलिए वायरस के हमले के बाद इसके संपर्क में आने वाले हर कोष की

गतिविधियों को अलग अलग तरीके से विश्लेषित किया जा रहा है।

शोध के जारी रहने के दौरान ही यह जानकारी भी सामने आयी है कि यह वायरस अब

अपना चेहरा भी बदल रहा है। ऑस्ट्रेलिया और ताइवान के शोधकर्ता इसे पहली बार इसे

समझने में कामयाब हुए हैं कि अब यह वायरस अपना चेहरा बदल रहा है। उसकी जेनेटिक

संरचना में यह बदलाव देखा जा सका है। इनमें से पहला बदलाव भारत में ही देखा गया

था। जनवरी 2020 में भारत के एक कोरोना मरीज में यह परिवर्तन पाया गया था। इसके

तहत शरीर में प्रवेश करने वाला वायरस किन्हीं कारणों से अपनी क्षमता खो बैठा था।

इसकी वजह से शरीर के जो रिसेप्टर कोष थे वे सक्रिय नहीं हो पाये। इसके बाद इस

कोरोना वायरस से जो शरीर के अंदर जिनोम परिवर्तन की 39 प्रक्रियाओँ पर भी एक एक

कर गौर किया गया है। दुनिया भर के वैज्ञानिक इस चुनौती से इसलिए भी निपटना चाहते

हैं क्योंकि इस एक वायरस की वजह से सारी दुनिया की तमाम गतिविधियों पर विराम

लग चुका है। यहां तक कि दुनिया में चल रहे अंतरिक्ष अनुसंधान भी अब इसकी चपेट में

आ चुके हैं। कोई प्रामाणिक दवा अथवा वैक्सिन बनने तक इस बीमारी के हमले से दुनिया

को छुटकारा मिलने की फिलहाल कोई उम्मीद भी नहीं है। लेकिन यह शोध इसलिए जरूरी

समझा जा रहा है क्योंकि अनेक देशों के तापमान में अंतर होने के बाद भी यह वायरस एक

तरीके से क्यों काम कर रहा है, यह बात भी शोधकर्ताओँ को परेशान कर रहा है।


 

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

One Comment

Leave a Reply