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दुनिया भर के जेनेटिक वैज्ञानिकों ने फिर से खास चेतावनी जारी कर दी

  • स्वरुप बदलने वाला कोरोना वायरस और खतरनाक होगा

  • ब्रिटेन में पता जल्दी चला फिर भी तेजी से फैला

  • नये वायरस स्वरुप का पता कई अन्य महादेशों में

  • टीकाकरण का कितना असर उसकी जांच बाकी है

राष्ट्रीय खबर

रांचीः दुनिया भर के जेनेटिक वैज्ञानिक इस बात को लेकर चिंतित हैं कि कोरोना का

वायरस अब अजीब अजीब ढंग से स्वरुप बदल रहा है। नये स्ट्रेन की जानकारी तो पहली

बार ब्रिटेन से मिली थी। इसी नये स्ट्रेन की वजह से वहां नये सिरे से लॉकडाउन लगाया

गया है। इसके अलावा दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया से भी नये किस्म के कोरोना

वायरस के पाये जाने की सूचना है। इन तीनों देशों से दुनिया भर में कोरोना वायरस का

नया स्वरुप बहुत दूर तक फैलता चला जा रहा है। कई देशों में ब्रिटेन से अपनी उड़ाने रद्द

कर दी थी। अब पड़ोसी देशों से संपर्क कट जाने की वजह से ब्रिटेन के कई इलाकों में

भोजन सामग्री तक का अभाव हो गया है। लेकिन दुनिया भर के जेनेटिक वैज्ञानिक इन

संकटों के मुकाबले स्वरुप बदलने वाले कोरोना वायरस को लेकर अधिक चिंतित हैं।

क्योंकि इस स्वरुप बदलने वाले वायरस का मारक प्रभाव पहले के वायरस के मुकाबले

अधिक है और इसके प्रमाण कई स्थानों से मिल रहे हैं। आज की बात करें तो अमेरिका के

कई इलाकों में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ने की वजह से वहां के अस्पतालों में

ऑक्सीजन की कमी की भी रिपोर्ट आयी है। इसी वजह से जेनेटिक वैज्ञानिक मानते हैं कि

जैसे जैसे यह वायरस अपना स्वरुप बदलेगा उससे मुकाबला करना और भी कठिन होता

चला जाएगा। इनलोगों ने कोरोना को वैक्सिन के टीकाकरण के बाद भी हल्के में नहीं लेने

की खास तौर पर चेतावनी दी है। दक्षिण पूर्वी इंग्लैंड में सबसे पहले कोरोना का यह बदला

हुआ स्वरुप पाया गया है। वहां से यह अनेक देशों तक जा पहुंचा है। इस नये स्वरुप के

कोरोना वायरस को बी 1.1.7 बताया गया है जो अत्यधिक तेजी से फैलने वाला साबित

हुआ है।

दुनिया भर के वैज्ञानिकों ने हर बार सही चेतावनी दी है

वैज्ञानिकों द्वारा बार बार चेतावनी दिये जाने के बाद भी जिनलोगों ने सामाजिक दूरी और

मास्क के प्रति लापरवाही बरती है, वे एक ही झटके में इसकी चपेट में आ चुके हैं। इसलिए

कोरोना की यह दूसरी सूनामी और भी खतरनाक हो सकती है, ऐसा वैज्ञानिकों का मानना

है। वेलकम ट्रस्ट के प्रमुख और इस किस्म की संक्रामक बीमारियों के विशेषज्ञ जेरेमी

फरार का मानना है कि यह शायद पहले वाली लहर से अधिक खतरनाक होगा क्योंकि

इसमें कई किस्म की परेशानियां अतिरिक्त नजर आने लगी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि

वूहान शहर के जब पहली बार यह वायरस फैला तो इसका पता चलने में भले ही देर हुई

लेकिन विशेषज्ञ यह समझ गये थे कि इसकी चपेट में कितने लोग आयेंगे, भले ही इसका

कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गयी थी। ऐसा आकलन इसलिए किया गया था क्योंकि

यह वायरस हमारी दिनचर्या के आचरण के खिलाफ था और कोरोना से बचाव के प्रावधानों

का पालन करने की हमें आदत नहीं थी। इसलिए आकलन सही था कि यह किस तरीके से

फैलेगा और कितना व्यापक स्तर पर होगा। लेकिन यह जो नई परेशानी आयी है, उसके

बारे में कोई आकलन नहीं किया जा सका है जबकि वायरस के स्वरुप बदलने की

जानकारी समय पर ही मिल गयी थी। फिर भी इसके दायरे के बारे में कोई आकलन नहीं

किया जा सका है। कोरोना के टीकाकरण की विश्वव्यापी तैयारियों के बीच यह भी चिंता

का नया सवाल है कि क्या कोरोना की वैक्सिन इस नये स्वरुप पर भी कारगर होगी।

ब्रिटेन में मजबूरी में दोबारा प्रतिबंध लगाना पड़ा है

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को मजबूरी में पूरे देश में नये किस्म के प्रतिबंधों का

एलान करना पड़ा है। उन्होंने अपना भारत दौरा भी इसी वजह से रद्द कर दिया है। जो देश

फिर से कड़ाई करने में हिचक रहे हैं, वहां यह खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है क्योंकि

संक्रमित रोगी के संपर्क में आने की वजह से विषाणु फैलाने वालों की न तो पहचान हो रही

है और न ही किस दायरे तक यह फैलता जा रहा है, उसका कोई ओर छोर मिल पा रहा है।

जंगली जानवरों ने नये वायरस का भी खतरा होगा

इस आशंका के बीच ही इबोला वायरस की पहचान करने वाले वैज्ञानिक डॉ टामफूम ने एक

नये पशुजनित वायरस के हमले की भी चेतावनी दी है। उन्होंने ही पहली बार इबोला

वायरस का पता लगाया था। उनके मुताबिक इंसानों के भोजन की आदतों की वजह से यह

नया वायरस कोरोना से भी अधिक तेज गति से पूरी दुनिया में फैल सकता है। उनके

मुताबिक यह वायरस अफ्रीका के जंगलों से निकलता हुआ शहरों तक पहुंचेगा। ऐसी

आशंका इसलिए है क्योंकि जंगल कम होने की वजह से जंगली जानवरों के रहने का

इलाका घट रहा है। इसी वजह से वे पहल के मुकाबले अब इंसानों के अधिक करीब तक आ

रहे हैं। उनके शरीर में मौजूद वायरस इंसानों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

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