Press "Enter" to skip to content

जेनेटिक दोष को भी सही अभिभावक अगली पीढी में रोक सकते हैं


पीढ़ियों से जारी गड़बड़ी भी दूर हो सकती है

नेमाटोड की कई सौ पीढ़ियों पर हुआ प्रयोग

माता पिता के जैविक संकेत का आचरण भिन्न

राष्ट्रीय खबर

रांचीः जेनेटिक दोष तो कई बार कई पीढ़ियों से चली आ रही होती है। अब पता चला है कि

सही अभिभावक आपस में मिलकर पहले से चले आ रहे जेनेटिक दोष को भी दूर कर

सकते हैं। ऐसा माना जाता है कि शिशु के जन्म के वक्त वह अपने माता पिता के जेनेटिक

गुणों को लेकर पैदा होता है। अब वैज्ञानिक इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि अगर सही

अभिभावकों का मेल हो तो ऐसे जेनेटिक सुधार होते हैं, जो पीढ़ियों से किसी परिवार में

चले आ रहे हैं। दूसरे शब्दों में अगर माता अथवा पिता को विरासत में कोई जेनेटिक दोष

मिला है तो यह सही अभिभावकों के द्वारा अनिश्चितकाल के लिए रोका जा सकता है।

जेनेटिक गतिविधियों पर निरंतर शोध के बाद जेनेटिक दोष को दूर करने के इस उपाय के

बारे में वैज्ञानिकों ने राय दी है। वैसे हिंदू मान्यताओं में इसी जेनेटिक दोष की वजह से ही

कुंडली मिलाने की प्रथा शायद प्राचीन काल में प्रारंभ की गयी थी। वर्तमान में प्रेम विवाह

बढ़ने की वजह से इस कुंडली मिलान में कमी जरूर आयी है लेकिन अनेक परिवारों में

इसपर ध्यान दिया जाता है। अब वैज्ञानिक निष्कर्ष  है कि सही अभिभावक अगर आपस

में मिले तो दोनों से मौजूद जेनेटिक दोष आपसी जीनों के मेल से अनिश्चितकाल के लिए

रोका जा सकता है। वैज्ञानिकों ने अपने परीक्षण में इन दोषों के स्थायी तौर पर दूर होने की

बात नहीं कही है। उनके मुताबिक जीन में मौजूद तत्व भविष्य में कभी भी फिर से सक्रिय

हो सकते हैं लेकिन सही अभिभावकों के मेल से जेनेटिक दोष रोके अवश्य जा सकते हैं, जो

अनिश्चितकालीन होंगे। गड़बड़ी को दूर करने के लिए किसी जेनेटिक सुधार के कृत्रिम

उपाय अथवा डीएनए श्रृंखला में जिनोम की कड़ी में बदलाव भी बाहरी तरीके से नहीं करना

पड़ता है।

जेनेटिक दोष को स्थगित कर सकती है यह विधि

यूनिवर्सिटी ऑफ मेरीलैंड के वैज्ञानिकों ने इस पर अपना शोध सार्वजनिक किया है। वरना

इससे पहले पीढ़ी दर पीढ़ी कोई जेनेटिक गड़बड़ी क्यों कायम रह जाती है, इसके बारे में

पता था। उस गड़बड़ी को प्राकृतिक तौर पर दूर करने का कोई वैज्ञानिक उपाय जानकारी में

नहीं था। प्रयोगशाला में सुक्ष्म जीवों पर यह प्रयोग भी किया गया है। दावा किया गया है

कि प्रयोगशाला में नेमाटोड कीड़ों की तीन सौ पीढ़ियों में लगातार इस सुधार को देखा गया

है और यह निष्कर्ष निकाला गया है कि जेनेटिक दोष दूर हो सकते हैं वशर्ते की

अभिभावकों का मेल जेनेटिक तौर पर इन गड़बड़ियों को नियंत्रित करने के लायक हो। इस

विश्वविद्यालय के सेल बॉयोलॉजी विभाग के एसोसियेट प्रोफसर एंटोनी जोस कहते हैं कि

पीढ़ी दर पीढ़ी जारी रहने वाला कोई भी ऐसा दोष निश्चित तौर पर परेशानी का कारण

बनता है। इसके कारणों का साफ तौर पर पता नहीं जा सकता है। इसकी खाज वजह

संबंधित व्यक्ति की जीवन शैली में हर आचरण के लिए लगातार होने वाला बदलाव है,

जिसका असर अगली पीढ़ी तक पड़ता है। कई बार एक खास किस्म की परेशानी एक दो

पीढ़ी तक निष्क्रिय रहने के बाद फिर से सक्रिय हो जाती है। ऐसा शायद इसलिए होता है

कि किसी खास जेनेटिक परिवेश की वजह से सुप्त पड़े जेनेटिक गुण दोबारा कई पीढ़ियों

के बाद भी जागृत हो जाते हैं। इसकी वजह किसी खास जीन के कई पीढ़ियों के बाद

अचानक से सक्रिय हो उठना है। लेकिन सही अभिभावकों के मेल से इसे भी

अनिश्चितकाल के लिए रोका जा सकता है, ऐसा शोधदल का निष्कर्ष है। जिस कीड़े पर

इसे आजमाया गया है वह दुनिया में विविध प्रजाति का होता है। इस कीड़े में जेनेटिक

सुधार देखने के लिए तीन सौ पीढ़ियों का जेनेटिक विश्लेषण किया गया है।

वर्ष 2013 से लगातार शोध के बाद सफलता मिली है

बताया गया है कि इस शोध दल ने वर्ष 2013 में अपना यह काम प्रारंभ किया था। इसके

तहत वह कीड़ों की पीढ़ी दर पीढ़ी जेनेटिक विश्लेषण करते जा रहे थे और वंशवृद्धि के

दौरान होने वाले बदलावों को भी दर्ज करते जा रहे थे। इसी क्रमिक प्रयोग के दौरान किसी

खास जोड़े के बच्चों में होन वाले सुधारों को देखने समझने के बाद ही वैज्ञानिकों ने यह

पाया है कि जेनेटिक दोष खास किस्म के अभिभावकों के जेनेटिक मेल से अनिश्चितकाल

के लिए दूर हो जाता है। इस खास प्रजाति के कीड़े में यह देखा गया कि कभी अगली पीढ़ी

में एक खास जीन टी मौजूद होता है जो फ्लूरोसेंट प्रोटिन पैदा करता है। कई बार यह

सक्रिय नहीं होता है। जेनेटिक तौर पर एक जैसा होने के बाद भी इस जीन के कभी सक्रिय

होने और कभी नहीं होने क वजह से ही इस शोध का अगला रास्ता खुला था। इसकी कुंजी

बच्चे को पैदा करने वाले अभिभावकों में छिपी हुई थी। इस शोध से जुड़े कोलंबिया

विश्वविद्यालय की सिंधुजा देवनपल्ली ने कहा कि कई सौ पीढ़ियों तक एक खास जीन के

स्थायी बदलाव को देखने के बाद ही शोध का यह नतीजा निकला है कि जेनेटिक दोष तब

दूर हो जाते हैं जब वैसे अभिभावकों का मेल हो, जो जेनेटिक तौर पर इस गड़बड़ी को दूर

करन की क्षमता रखते हैं। माता और पिता से मिलने वाले डीएनए संकेतों के प्रभाव को भी

इस शोध दल ने खोजा है।

Spread the love
More from HomeMore posts in Home »
More from जेनेटिक्सMore posts in जेनेटिक्स »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »
More from स्वास्थ्यMore posts in स्वास्थ्य »

One Comment

Mission News Theme by Compete Themes.