हर प्राणी के जेनेटिक कोड को संरक्षित करने का काम होगा

हर प्राणी का जेनेटिक कोड संरक्षित होगा
  • ब्रिटेन के की एक दीर्घावधि महत्वाकांक्षी परियोजना 

  • कई प्रजातियां विलुप्त हो चुकीं

  • 23 हजार विलुप्ति के कगार तक

  • प्राणियों का विकास की जानकारी लेंगे

  • हरेक के लिए बेहतर ईलाज का रास्ता

प्रतिनिधि
नईदिल्लीः हर प्राणी के हर जेनेटिक कोड को अब सुरक्षित और संरक्षित किया जाएगा।



इसके माध्यम से बीमारियों में आने वाली जटिलताओं का अध्ययन होगा।

साथ ही समस्त प्राणियों में हो रहे परिवर्तन का भी अध्ययन किया जा सकेगा।

इस काम के लिए काफी समय लगेगा। इस वजह से वैज्ञानिकों ने एक दीर्घकालीन योजना बनायी है।

जिसपर लगातार काम होता चलेगा और अंत में दुनिया के समस्त प्राणियों के जेनेटिक कोड एकत्रित कर लिये जाएंगे।

इस अभियान के पीछे की एक और सोच समस्त प्राणियों के डीएनए कोड को एक जगह लाकर उनका विश्लेषण भी करना है।

ताकि यह पता चल सके कि इस पृथ्वी का क्रमिक विकास किस तरीके से हुआ है।

इस विकास के दौरान प्राणियो में कैसे कैसे बदलाव आये है।

प्रारंभिक तौर पर इस काम के लिए 66 हजार प्राणियों के जेनेटिक कोड को एकत्रित करने की योजना बनायी गयी है। अगले दस वर्षों

के भीतर इन प्राणियों के जेनेटिक आंकड़ों को संग्रहित किया जाएगा।

वैज्ञानिकों ने इसके लिए अलग अलग टीमों का गठन करने का काम प्रारंभ कर दिया है।

यह टीमें अलग अलग देशों में जाकर वहां के प्राणियों के जेनेटिक विवरण हासिल करेंगी।

इसके लिए अत्याधुनिक वैज्ञानिक संयंत्रों का भी प्रयोग किया जाएगा।

इससे सर्वेक्षण और आंकड़ा संग्रह के दौरान आने वाले हजारों जिनोम डाटा का

सही तरीके से विश्लेषण किया जा सके।

हर प्राणी के इस कोड को विश्लेषित करने के लिए अलग नेटवर्क बना

इस काम के लिए वैज्ञानिको ने अलग से एक नेटवर्क भी स्थापित कर लिया है।

इस काम की योजना दरअसल पृथ्वी से विलुप्त होने प्राणियों को बचाने के मकसद से सोची गयी थी।

जैसे जैसे यह विचार आगे बढ़ा, उसमें नये तथ्यों को जोड़ना पड़ा।

ताकि विलुप्त होते प्राणियों को बचाने के साथ साथ प्राकृतिक परिवर्तन की कड़ी को भी बेहतर ढंग से समझा जा सके।

आंकड़ों का संग्रह होने के बाद इन तमाम प्राणियों में होने वाली बीमारियों के स्वरुप में बदलाव के साथ साथ इनके जीनों पर पड़ने वाले प्रभावों का भी अध्ययन किया जा सकेगा।

इससे उम्मीद है कि दुनिया की चिकित्सा पद्धति में भी आमूलचूल बदलाव हो जाए।

वर्तमान में इस पृथ्वी पर करीब 15 लाख प्रजातियों के प्राणियों के होने का आंकड़ा दर्ज है।

इन तमाम प्रजातियों के आंकड़ों को पहले एकत्रित किया जाएगा।

उसके बाद इनका वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाएगा।

जानकारी के मुताबिक वैज्ञानिकों ने इसके लिए सचल प्राणियों के साथ साथ कुछ खास प्रजाति के वनस्पतियों को भी अपने शोध के दायरे में शामिल रखने का फैसला किया है।

इनमें फंगी और प्रोटोजोआ प्रजाति के वनस्पति भी हैं।

प्रारंभिक चरण का काम पूरा करने में इस परियोजना पर करीब एक सौ मिलियन पौंड के खर्च होने का अनुमान है।

वैज्ञानिक मान रहे हैं कि उचित समझ के अभा मे दुनिया में अभी करीब 23 हजार प्रजातियां ऐसी हैं,

जो बिल्कुल विलुप्त होने के कगार पर हैं।

इसी क्रम में पिछले चालीस वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि

आधे से अधिक वैसे प्राणी भी दुनिया से गायब हो चुके हैं, जिनके शरीर में हड्डियां थीं।

इसलिए सभी के आंकड़ों को वैज्ञानिक तरीके से संरक्षित एवं सुरक्षित करने की सख्त जरूरत है।



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