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जीन थैरापी से भी ठीक हो सकती है आंख में कम दिखने की उम्रजनित बीमारी

जीन थैरापी से भी ठीक हो सकती है आंख में कम दिखने की उम्रजनित बीमारी
  • एचटीआरए 1 प्रोटिन की पहचान कर ली गयी है

  • आई डोनेशन के आठ हजार आंखों से जांच की गयी

  • आंख की दूसरी बीमारी भी ठीक होगी जेनेटिक पद्धति से

  • कई अन्य कंपनियां भी इसकी नई दवा लाने की तैयारी में

राष्ट्रीय खबर

रांचीः जीन थैरापी लगातार लोकप्रिय विज्ञान बनता जा रहा है। खासकर ईलाज के मामले में

इस दिशा में लगातार प्रगति हो रही है। अब नई खोज यह है कि आंख की दूसरी बीमारी भी इस

पद्धति से ठीक की जा सकती है। जिस बीमारी के बारे में यह शोध किया गया है, उसे

उम्रजनित मैक्यूलटर डीजेनेरेशन (एएमडी) कहा जाता है। वैज्ञानिकों ने पाया है कि उम्र बढ़ने

के साथ साथ जब एचटीआरए 1 जीन प्रोटिन पैदा करता है जो यह इस एएमडी बीमारी का

कारण बनता है। यह खास तौर पर एक उम्रजनित बीमारी है, जिसमें उम्रदराज लोगों को साफ

दिखना बंद हो जाता है। वैसे उम्र बढ़ने के साथ साथ कई अन्य बीमारियों मसलन गठिया का

प्रकोप भी बढ़ता है। उटाह विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने पाया है कि यह एचटीआरए 1

प्रोटिन सुरक्षात्मक भूमिका निभाता है। पहले इसकी अधिकता को नुकसान पहुंचाने वाला

समझा गया था। इसी वजह से जीन थैरापी से आंख की इस बीमारी का ईलाज भी भविष्य में

संभव है, ऐसा शोधकर्ता मानते हैं। इस प्रोटिन का आंख पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान से देखा

और समझा गया है। मजेदार बात यह है कि इस शोध को आगे बढ़ाने के लिए किसी अन्य

जीव की आंखों पर ऐसा प्रयोग नहीं किया जा सकता था। इसलिए शोधकर्ताओं ने आई

डोनेशन के तहत प्राप्त आंखों के जरिए ही अपनी शोध की गाड़ी को आगे बढ़ाया है। इन आंखों

के अध्ययन से उस एचटीआरए 1 के प्रभाव को देखा गया है। इस बारे में शोधकर्ताओं ने

अपनी शोध का निबंध भी नेशनल एकाडेमी ऑफ साइंस की पत्रिका में प्रकाशित की है।

जिसमें विस्तार से पूरी प्रक्रिया की जानकारी देते हुए उसके निष्कर्षों की भी व्याख्या की गयी

है। इसके जरिए एएमडी का ईलाज का नया रास्ता खुलेगा, ऐसा वैज्ञानिक मानते हैं।

जीन थैरापी पर दुनिया भर में चल रहे हैं निरंतर प्रयोग

जीन थैरापी पर हुए इस शोध में इंसानी शरीर में मौजूद क्रोमोसम 10 की भूमिका पर भी गौर

किया गया है। यह क्रोमोसम हर किसी के अलग अलग जीन की आंखों में एक जैसा प्रभाव

डालता है। एचटीआरए 1 प्रोटिन आंख में संतुलन कायम रखने का काम करता है। इस खोज

के बाद ऐसा माना जा रहा है कि एएमडी की उम्रजनित बीमारी को दूर करने के लिए भविष्य में

जीन थैरापी का भी सहारा लिया जाएगा, जिसके प्रभाव दूरगामी होंगे। बताते चलें कि हाल के

वर्षों में इंसानी आंख सहित अन्य अंगों के विकारों को दूर करने के लिए यह विधि अत्यंत

उपयोगी साबित हो रही है। कई मामलों में वर्षों के अंधे व्यक्ति की आंखों की रोशनी भी इसी

जीन थैरापी की वजह से लौटी है। अब तो एक इंजेक्शन से अंधापन दूर करने का प्रयोग भी

सफल हो चुका है। दूसरी तरफ जेनेटिक्स आधारित प्रयोगों में आईड्राप्स के माध्यम से भी

आंख की बीमारी ठीक करने में यही विधि कारगर साबित हो रही है। दुनिया भर में एएमडी

बीमारी के असंख्य मरीज होने की वजह से इस जानकारी के सामने आने के बाद अनेक शोध

संस्थानों में नये सिरे से इस पर काम भी प्रारंभ हो गया है। इसी वर्ष गाइरोस्कोप थेरापुटिक्स

नामक कंपनी ने इस जीन थैरापी विधि से ईलाज की पद्धति विकसित करने के लिए अग्रिम में

148 मिलियन डॉलर का कोष एकत्रित किया है। वे एएमडी की बीमारी दूर करने के लिए एक

जीन थैरापी विधि विकसित करने पर काम कर रहे हैं। उटाह विश्वविद्यालय के डॉ ग्रेगरी

हेजमैन के नेतृत्व में यह काम हुआ है। डॉ हेजमैन पिछले 15 वर्षों से लगातार इसी दिशा में

काम कर रहे हैं।

दूसरी कंपनी भी आंख की बीमारी के लिए एक दवा लाने वाली है

दूसरी तरफ इसी विधि से ईलाज की दिशा में कुछ दवाओं का विकास भी हो रहा है। माइक्रोकैप

आइवेरिक बॉयो नामक कंपनी ने इसी पद्धति पर जिमूरा नामक एक दवा बाजार में उतारने की

तैयारी की है। इस दवा के बारे में भी दावा किया गया है कि यह एएमडी की बीमारी ठीक करने

में काफी कारगर साबित हो रहा है। इसका परीक्षण अभी जारी है। जीन थैरापी पर आधारित

इस चिकित्सा में आंख के अंदर इंजेक्शन से जीन को प्रवेश कराया जाता है जो अंदर जाकर

बीमारी को ठीक करने का काम करने लगता है। अलग अलग डोज के अलग अलग प्रभाव के

आंकड़े भी अभी क्लीनिकल परीक्षण के दौर में हैं और वे काफी उत्साहजनक हैं। अच्छी बात

यह भी है कि बाजार से भी इन दवाइयों के परीक्षण पर उत्साहवर्धक संकेत मिल रहे हैं।

कंपनियों को शोध की गाड़ी आगे बढ़ाने के लिए निवेशकों का भी बेहतर समर्थन प्राप्त हुआ है।

इससे परीक्षण की गति और तेज हुई है।

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