जीन से छेड़छाड़ हुई तो जुड़वा बहनों की दिमागी ताकत बढ़ गयी

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  •  चीन के वैज्ञानिक ने जुड़वा बहनों परकिया था डीएनए का अनुसंधान 

  • वैज्ञानिक की पूरी दुनिया में आलोचना भी हुई 

  • एचआइवी संक्रमण से बचाने का था प्रयोग 

  • अब भी छेड़छाड़ के प्रति सशंकित है वैज्ञानिक

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः जीन में फेरबदल का प्रयोग तो चल रहा है लेकिन वैज्ञानिक इंसानी प्रजाति पर

इसके व्यापक प्रयोग के बिल्कुल खिलाफ हैं।

अधिकांश वैज्ञानिकों का मानना है कि इसकी मदद से अगर अति विकसित इंसान पैदा किया गया

तो हो सकता है कि वह इंसान की वर्तमान प्रजाति के लिए ही विनाश का कारण बने।

इस आलोचना के बीच ही चीन के एक वैज्ञानिक ने प्रयोग किया था।

अब पता चल रहा है कि डीएनए की छेड़छाड़ से पैदा हुई जुड़वा बच्चियों का मस्तिष्क

आम इंसानों के मुकाबले अधिक विकसित हुआ है।

वैसे यह माना जाता है कि वे संभवतः दुनिया के पहले ऐसे बच्चे हैं, जिनका इस तरीके से जन्म हुआ है।

इसे एक संयोग भी माना जा रहा है

क्योंकि मस्तिष्क विकसित होने के साथ डीएनए में हुए फेरबदल का रिश्ता

अब तक वैज्ञानिक मापदंड पर स्थापित नहीं हो पाया है।

चीन में पैदा हुई इन दोनों जुड़वा बच्चियों के नाम लुलू और नाना हैं।

इनके जन्म के पहले ही उनके जीनों को बदला गया था।

यह काम चीन के वैज्ञानिक हेई जियानकुई ने किया था।

उन्होंने जीन में बदलाव करने की जानकारी भी दी थी।

जीन के बदलाव को अधिकांश वैज्ञानिक खतरनाक मानते हैं

उनकी इस कार्रवाई की दुनिया भर में आलोचना हुई थी।

हालाकि चीनी वैज्ञानिक ने स्पष्ट किया था कि

उन्होंने सिर्फ एचआइवी वाइरस के संक्रमण से बचाने के लिए

बच्चों के जीन में यह बदलाव उनकी जन्म के पहले किया था।

पिछले वर्ष दोनों जुड़वा बच्चियों का जन्म हुआ है।

अब पाया जा रहा है कि दोनों की दिमाग शक्ति औसत इंसान से अधिक विकसित हो रही है।

वैज्ञानिक इस बदलाव पर ध्यान रखे हुए हैं।

क्योंकि एक संभावना पहले ही जतायी गयी थी कि

इस किस्म के जीनों के बदलाव की वजह से दिमागी पक्षाघात के शिकार होने वाले

रोगियों में भी जीन परिवर्तन की वजह से सक्षम जीवन पाने के अधिक अवसर होते हैं।

अब जीन में हुए फेरबदल के बारे में जो तथ्य सामने आये हैं,

उनके मुताबिक सीसीआर5 नामक जीन को बदला गया है।

यह जीन इंसानी दिमाग पर काम करता है।

दूसरी तरफ एचआइवी वायरस के शरीर में सक्रिय होने के लिए भी इसी जीन की जरूरत पड़ती है।

एचआइवी वाइरस को रोकने के लिए इस जीन में किया गया बदलाव अब दूसरा असर दिखाने लगा है।

इस जीन बदलाव का मुद्दा अब भी चीनी वैज्ञानिक को आलोचना के घेरे में रखे हुए है।

दूसरी तरफ लॉस एंजिल्स के कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के न्यूरो बॉयोलॉजिस्ट एल्सिनो सिल्वा मानते हैं कि

डॉ जियानकुई ने शायद बेहतर मस्तिष्क की क्षमता का इंसान बना डाला है।

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