गढ़वा जिले के पंकज ने दक्षिण कोरिया में सफलता पाकर बढ़ाया मान

गढ़वा जिले के पंकज ने दक्षिण कोरिया में सफलता पाकर बढ़ाया मान
Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  • शोध में पंकज ने कॉपर निष्कर्षण के लिये नई तकनीक इजाद की

नीलू चौबे

श्री बंशीधर नगर : गढ़वा जिला अंतर्गत श्री बंशीधर नगर प्रखंड के पाल्हे कला गांव निवासी प्रो देवेन्द्र प्रसाद चौबे के पुत्र

पंकज कुमार चौबे ने दक्षिण कोरिया में केमेस्ट्री(रिसोर्स रिसाईक्लीन) में पीएचडी की डिग्री प्राप्त कर

अतंर्राष्ट्रीय स्तर पर झारखंड प्रदेश का नाम रौशन किया है।

गढ़वा के इसयुवा ने यह डिग्री यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी दक्षिण कोरिया के अध्यक्ष किल चू मून से प्राप्त की है।

पंकज ने कॉपर निष्कर्षण के लिये नई तकनीक इजाद की है।

यहां बताते चलें कि गढ़वा के पंकज कुमार चौबे का चयन राष्ट्रीय धातु कर्ण प्रयोगशाला जमशेदपुर में रिसर्च स्कॉलर के रूप में हुआ था।

अध्ययन के दौरान उन्हें वर्ष 2014 में केमेस्ट्री(रिसोर्स रिसाईक्लीन) में शोध(पीएचडी)प्करने के लिये

दक्षिण कोरिया के यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में चयनित किया गया।

वहां उन्होंने पांच वर्षों तक शोध किया एवं पीएचडी की डिग्री प्राप्त की।

दक्षिण कोरिया से वापस गढ़वा अपने गांव लौटने पर पंकज कुमार चौबे ने बतलाया कि कॉपर का निष्कर्षण हाईड्रो मेटलर्जी तकनीक से बहुत मुश्किल होता है।

उन्होंने बतलाया कि कॉपर निष्कर्षण के लिये उन्होंने नई तकनीक इजाद की।

जिससे कॉपर निष्कषर्ण में लागत खर्च पचास प्रतिशत तक कम आयेगी।

पंकज ने बतलाया कि जलीय क्लोरीन और सलफ्यूरिक एसिड के माध्यम से कॉपर निष्कर्षण का नई तकनीक है।

उनका यह रिसर्च इंटरनेशनल जर्नल (हाईड्रोमेटलर्जी) में भी प्रकाशित किया गया है।

इस रिसर्च में उन्हें यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी दक्षिण कोरिया के द्वारा उन्हें बेस्ट पेपर अवार्ड से नवाजा गया है।

बकौल पंकज अब वे रिसर्च के क्षेत्र में और बेहतर करने की सोच रहे हैं कि कैसे इंडस्ट्री में इस तकनीक को प्रभावी किया जा सके।

उन्होंने बतलाया कि भारत में फिलहाल 80 प्रतिशत कॉपर का निष्कर्षण पाईरो मेटलर्जी से होता है।

जिसमें उर्जा की अधिक खपत होती है।

जबकि हाईड्रो मेटलर्जी विधि से काफी कम उर्जा में कॉपर का निष्कर्षण किया जा सकता है।

उनका लक्ष्य है कि शत प्रतिशत तांबा का निष्कर्षण हाईड्रो मेटलर्जी विधि से हो

ताकि हम उर्जा का अधिक से अधिक बचत कर सकें।

पंकज ने बतलाया कि भारत में कॉपर का उत्पादन मात्र दो प्रतिशत होता है।

जबकि अन्य देशों जैसे अमेरिका, चीली, चीन, पेरू में भारत की तुलना में कॉपर का उत्पादन बहुत ज्यादा होता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.