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गैंगस्टर सुशील श्रीवास्वत की हत्या में तीन दो आजीवन कारावास

  • अंतिम सांस तक जेल में रहेंगे दोषी अभियुक्त

  • जुर्माना की रकम मृतक की परिवार को मिलेगी

  • हजारीबाग कोर्ट परिसर में दिनदहाड़े हुई थी हत्या

  • ऐसे खुलेआम हत्या में हुआ था एके 47 का प्रयोग

रांचीः गैंगस्टर सुशील श्रीवास्तव की हत्या के मामले में हजारीबाग जिला अदालत ने तीन

लोगों के हत्याकांड के दोषियों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई है। कोर्ट ने विकास

तिवारी को अंतिम सांस तक कारावास की सज़ा सुनायी है। विकास तिवारी और संतोष

पांडेय पर कुल 1 लाख 76 हज़ार 200 का जुर्माना लगाया गया है।जबकि अन्य दोषियों पर

36 हज़ार 200 का जुर्माना लगाया गया है।कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि दोषियों

द्वारा दी गयी जुर्माने की राशि पीड़ित परिवार यानी गैंगस्टर सुशील श्रीवास्तव के परिवार

को दी जायेगी। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि आइपीसी की विभिन्न धाराओं में हुई

सजा अलग-अलग चलेंगी।बता दें कि 11 सितंबर को हजारीबाग अपर सत्र न्यायाधीश-6

अमित शेखर की अदालत ने विकास तिवारी समेत पांच आरोपियों को हत्याकांड में दोषी

करार दिया था।

सभी साक्ष्यों और गवाहों को सुनने के बाद अदालत ने गैंगस्टर सुशील श्रीवास्तव की हत्या

का दोषी पाते हुए विकास तिवारी, दिलीप साहू, विशाल कुमार सिंह, राहुल देव पांडे और

संतोष देव पांडे को सज़ा सुनाई है।विकास तिवारी फिलहाल पलामू कारा में बंद है।जबकि

संतोष और राहुल देव पांडे हजारीबाग जेल में बंद हैं।दिलीप साहू और विशाल कुमार सिंह

जमानत पर थे, जिन्हें कोर्ट के आदेश के बाद रिमांड पर ले लिया गया है।विकास तिवारी,

संतोष पांडेय, विशाल सिंह, राहुल देव पांडेय और दिलीप साव को आइपीसी की धारा

302,120बी, 353,341-34, आर्मस एक्ट की धारा-25, 27, विस्फोटक अधिनियम की

विभिन्न धाराओं में दोषी पाया गया है।

गैंगस्टर सुशील कोर्ट में पेशी के दौरान मारा गया था

गौरतलब है कि 2 जून 2015 को हज़ारीबाग़ कोर्ट परिसर में दिनदहाड़े कोर्ट में पेशी के लिए

आए सुशील श्रीवास्तव, सहयोगी कमाल खान, ग्यास खान की हत्या भारी सुरक्षा व्यवस्था

के बीच एके- 47 से कर दी गई थी। घटना को अंजाम प्रतिद्वंदी गैंगस्टर पांडेय गिरोह

द्वारा दिया गया था।घटना के मुख्य अभियुक्त विकास तिवारी, संतोष पांडेय, शंभुनाथ

तिवारी, राहुल देव पांडेय, दिलीप साव, विकास साव, विशाल सिंह, प्रदीप पासवान व यूपी

के मुख्य शूटर राज सिंह समेत अन्य को बनाया गया था।

सुनवाई एडीजे अमित शेखर की अदालत में चली। इसमें 42 गवाहों के बयान दर्ज होने और

लंबी बहस के बाद 11 सितंबर को एडीजे 6 की अदालत ने विकास तिवारी,संतोष पांडेय,

राहुल देव पांडेय,दिलीप साव और विशाल सिंह को दोषी करार देते हुए शम्भूनाथ तिवारी

को रिहा कर दिया था और 22 सितंबर को सजा तय की तारीख तय की गई थी।

कोयलांचल में पांडेय गिरोह और श्रीवास्तव गिरोह में वर्चस्व को लेकर खूनी टकराव होते

रहा है। इस टकराव में दोनों तरफ से दर्जनों हत्या की गई है। जो अब भी जारी है।13

दिसंबर 2014 को पांडेय गिरोह के सरगना किशोर पांडेय की जमशेदपुर में कर दी गई थी।

किशोर पांडेय के अंतिम संस्कार में एके- 47 से हवाई फायरिंग कर विकास तिवारी ने छह

महीने में बदला लेने की कसम खाई थी।छह महीने के ठीक पहले 2 जून को हज़ारीबाग़

कोर्ट परिसर में सुशील श्रीवास्तव सहित तीन लोगों की हत्या के बाद कोर्ट परिसर में ही

प्रिंटेड पोस्टर में किशोर पांडेय की हत्या का बदला लिखित पोस्टर छोड़कर विकास तिवारी

द्वारा घटना की जिम्मेवारी ली गयी थी।दो महीने बाद अगस्त में विकास तिवारी को

दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था तब से वह जेल में ही है।वर्तमान में वो पलामू जेल में

बंद है।

पतरातू और आस पास के इलाके का खूनी संघर्ष वर्षों से जारी

2 जून 2015 को कोर्ट परिसर में भारी सुरक्षा-व्यवस्था के बीच सुशील श्रीवास्तव की हत्या

में एके- 47 हथियार का इस्तेमाल किया गया था। ऐसा पहली बार हुआ था,जब झारखंड में

अपराधियों ने एके-47 जैसे हथियार का इस्तेमाल किया। इस क्रम में दो अन्य मो. कलाम

और ग्यास खान की भी मौत हो गयी थी।

घटना के बाद सुशील श्रीवास्तव की सुरक्षा में लगे 19 पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित

कर दिया गया था।इस हत्याकांड के बाद सदर थाने में कांड संख्या 610/15 दर्ज किया गया

था। जिसके बाद पुलिस ने एक अगस्त 2015 को दिल्ली से विकास तिवारी को गिरफ्तार

किया।अभी वह पलामू स्थित मेदिनीनगर जेल में बंद है।

हजारीबाग कोर्ट परिसर में हुई गैंगस्टर सुशील श्रीवास्तव सहित तीन लोगों की हत्या में

एके-47 का इस्तेमाल किया गया। बता दें कि झारखंड में पहली बार किसी आपराधिक

गिरोह के द्वारा हत्या करने में एके-47 का इस्तेमाल किया गया था। सुशील श्रीवास्तव

हत्याकांड के मुख्य साजिशकर्ता विकास तिवारी ने गोरखपुर (यूपी) के दो शूटर प्रदीप

पासवान और राज सिंह को सुपारी थी दी। घटना में इस्तेमाल एके-47 को तिवारी ने

गोरखपुर के कुख्यात प्रदीप पासवान को उपलब्ध कराया था। वहीं गोरखपुर के ही शूटर

राज सिंह को 30 लाख रुपये दिये थे। दिल्ली में गिरफ्तार विकास तिवारी ने यह खुलासा

पुलिस की पूछताछ में किया था। विकास तिवारी ने बताया था कि तय समय पर पासवान

के साथ शूटर राज सिंह हजारीबाग पहुंच विकास के गुर्गों के साथ घटना को अंजाम देकर

फरार हो गया था।बाद में वह भी फरार होकर कोलकाता, असम, बिहार, यूपी के रास्ते

दिल्ली चला गया था।


 

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