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दोस्त दोस्त ना रहा, प्यार प्यार ना रहा .. .. ..

दोस्त दोस्त ना रहा, का नमूना कोरोना काल में एक नहीं अनेक इलाकों से दिखने लगा है।

सारी दोस्त दोस्त ना रहे बल्कि एक दूसरे के कट्टर दुश्मन बन बैठे हैं। इंटरनेशनल स्तर

पर अमेरिका और चीन एक दूसरे के करीब आने के चक्कर में अब यही गीत दोहराने लगे हैं

कि दोस्त दोस्त ना रहा। 1962 के बाद से भारत ने हिंदी चीनी भाई भाई का नारा दोहराना

बंद कर रखा था। बाद में नथूला में चीन को मारकर भगा भी दिया था। आज नथूला भी

उत्तर पूर्वी भारत का प्रमुख पर्यटन केंद्र है। सिर्फ अरुणाचल प्रदेश में जब कोई जाता है तो

चीन अपने पारंपरिक तरीके से उसका विरोध करता है। दरअसल व्यापार युद्ध प्रारंभ होने

को शायद अमेरिका औऱ चीन दोनों देशों ने उतनी गंभीरता से नहीं लिया था। लेकिन

अचानक कोरोना बम क्या फूटा, सारे समीकरण ही ध्वस्त हो गये। अब चीन की हालत

देख लीजिए। अमेरिकी धमकी के बाद अब भारत के साथ सीमा विवाद। पहली बार उसे

लग रहा है कि उसकी चाल शायद इस बार कामयाब नहीं हो पायेगी क्योंकि भारत अपनी

बात पर अड़ा हुआ है। लिहाजा भारतीय सेना भी चीन की सेना के सामने डटी हुई है। शायद

भारतीय सैन्य शक्ति के बारे में चीन ने कागजी ज्ञान ही हासिल किये थे। इसी वजह से

जब कश्मीर से अरुणाचल प्रदेश तक भारतीय सेना एक साथ मोर्चा पर जा खड़ी हुई तो

चीन को भी पूरे इलाके में अपनी सेना को तैनात करना पड़ रहा है। भारत मान रहा है कि

यह चीन की पुरानी दबाव वाली पॉलिटिक्स सॉरी पॉलिटिक्स नहीं कूटनीति यानी

डिप्लोमेसी है। दुनिया मान रही है कि पहली बार चीन को उल्टी चाल पड़ने की वजह से 

आंटे दाल का भाव पता चल रहा है।

ओली जी उछल रहे हैं पर कब तक खुद उन्हें नहीं पता

दोनों के बीच नेपाल के ओली जी उछल तो रहे हैं लेकिन कितने दिनों तक उछल पायेंगे,

यह खुद उन्हें भी नहीं मालूम। भारत ने सीना तानकर चुनौती दे दी कि पीछे हटो तो दूसरी

तरफ से ताइवान और जापान जैसे देश भी अपनी सामरिक शक्ति का प्रदर्शन कर अपनी

खुन्नस निकालने लगे। जब भारतीय सीमा पर तनाव नहीं था तो इन देशों को चीन कभी

भी धमका लिया करता था। अब एक साथ इतने सारे मोर्चे पर वह क्या करे। इसी बात पर

एक पुरानी फिल्म का गीत याद आने लगा है।

अपने जमाने की सुपरहिट फिल्म संगम के इस गीत को लिखा था शैलेंद्र ने औऱ संगीत में

ढाला था शंकर जयकिशन की जोड़ी ने। इसे मुकेश कुमार ने अपने स्वर में गाते हुए अमर

कर दिया है। गीत के बोल कुछ इस तरह है।

दोस्त दोस्त ना रहा
प्यार प्यार ना रहा
ज़िंदगी हमें तेरा
ऐतबार ना रहा, ऐतबार ना रहा

अमानतें मैं प्यार की
गया था जिसको सौंप कर
वो मेरे दोस्त तुम ही थे
तुम्हीं तो थे

जो ज़िंदगी की राह मे
बने थे मेरे हमसफ़र
वो मेरे दोस्त तुम ही थे
तुम्हीं तो थे

सारे भेद खुल गए
राज़दार ना रहा
ज़िंदगी हमें तेरा
ऐतबार ना रहा, ऐतबार ना रहा

दोस्त दोस्त ना रहा …

सफ़र के वक़्त में पलक पे
मोतियों को तौलती
वो तुम ना थी तो कौन था
तुम्हीं तो थी

नशे की रात ढल गयी
अब खुमार ना रहा
ज़िंदगी हमें तेरा
ऐतबार ना रहा, ऐतबार ना रहा

दोस्त दोस्त ना रहा …

अब इंडिया लौट आते हैं। बेचारे राहुल गांधी के सारे दोस्त दगा दे गये। अब राहुल खुलकर

भी इस गीत को नहीं गा सकते कि दोस्त दोस्त ना रहे। पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया और

बाद में सचिन पायलट। जिन दोनों को सबसे करीबी माना जाता था, दोनों ने लंगड़ी मार

दी। पता नहीं आगे किस किस का नंबर लगने वाला है। जो राहुल के करीबी होने की वजह

से पार्टी में प्रमुख पदों पर आये थे, अब उनकी हैसियत भी कौड़ी के तीन जैसी हो चली है।

अपने झारखंड में बेचारे पूर्व मुख्यमंत्री और उनके करीबी भी यही गीत मन ही मन दोहराते

होंगे। सरयू बम लगातार बरस रहे हैं ऊपर से संकट दिनों दिन गहराता जा रहा है। रही सही

कसर तो विधानसभा में कल के नुकसान ने कर दी। पार्टी के अंदर भी उनके बचाव में बात

करने तक कोई तैयार नहीं है। जिन्हें दोस्त बनाया था, वे सारे तोते की तरह आंख फेरकर

खड़े हो गये हैं। किसी भी मुद्दे पर आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं तो दस नये आरोप लग

जाते हैं। ऊपर से बचे बेचारे निशिकांत जी। केंद्र में मंत्री बनने का चांस बना था। पार्टी के

अपने ही दोस्तों ने पीठ पर छुरा घोंपकर सारी माहौल बिगाड़ दिया। अब नये सिरे से

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी मामला ठोंक दिया है। वह भी बेचारे कह नहीं सकते कि दोस्त

दोस्त ना रहा।


 

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