जेनेटिक कोड में जोड़े गये चार नये शब्द

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  • नये अनुसंधान से मिली नई जानकारी के आधार पर हुए बदलाव

  • हाजीमोची डीएनए पहले से मौजूद

  • ए टी सी और जी जोड़ा गया

  • जीन श्रृंखला में नये जुड़ाव

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः जेनेटिक कोड में अब चार नये शब्द जोड़े जा रहे हैं।

अनुसंधान के बाद इन शब्दों वाले जेनेटिक कोड की पहचान अलग से की गयी है।

इसी वजह से उन्हें जेनेटिक कोड की शब्दावली में शामिल किया जा रहा है।

इस शोध से जुड़े वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इससे जीवन के नये रहस्यों का पता भी चल सकता है।

साथ ही शोध की गाड़ी आगे बढ़ने की स्थिति में बीमारियों की रोकथा में भी इनकी मदद मिल सकती है।

जेनेटिक कोड की दुनिया में पहले से ही जापान की हाचीमोजी डीएनए का शब्द प्रचलित हैं,

जिसमें डीएनए की पहचान में आने वाले सारे शब्दों को जोड़कर अंग्रेजी में आठ शब्दों की यह शब्दावली तैयार की गयी है।

अब उसमें ए,टी,सी और जी जोड़ा जा रहा है। इन हरेक शब्द के अपना अलग अलग अर्थ भी हैं।

ए से एडेनाइन, टी से थाईमाइन, सी से साइटोसाइन और जी से गुवानाइन का शब्द बनाया गया है।

इन शब्दों की डीएनए की परिभाषा बहुत व्यापक है।

इस किस्म के अनुसंधान के जुड़े वैज्ञानिक इन जेनेटिक कोड को

कंप्यूटर की बाईनरी (सिर्फ शून्य और 1) के भाषा में भी बदलना चाहते हैं

ताकि जेनेटिक कोड का कंप्यूटर विश्लेषण और आसान हो सके।

पूरी सृष्टि के डीएनए कोड को परिभाषित करने का व्यापक कार्यक्रम वर्ष 2014 में प्रारंभ हुआ था।

उसके बाद से लगातार इसनें नये नये अध्याय जुड़ते जा रहे हैं।

इसी शोध की वजह से उन नये बैक्टेरिया समूहों का भी पता चल रहा है जो ऐसे प्रोटिन बनाते हैं जो प्राकृतिक तौर पर इस पृथ्वी पर मौजूद नहीं है।

कैलिफोर्निया के स्क्रीप्स रिसर्च इंस्टिटियूट ने इस क्रम में डीएनए के दो नये आधारों का पता लगाया था।

जिससे नई जानकारी मिली थी।

अब शोध के आगे बढ़ने पर यह जानकारी भी मिल रही है कि कुछ डीएनए संकेत ऐसे भी हैं

जो दरअसल दो अलग अलग किस्म के डीएनए संकेतों के बीच में छिपे हुए हैं।

इस वजह से उनकी अलग से पहचान होने में विलंब हुआ है।

जीवन की गुत्थियों को सुलझाने में यह डीएनए कुंजी ही सबसे अहम सूत्र है।

इसके बनने और कार्यरत होने के अलग अलग आधार भी हैं।

इस वजह से अलग अलग पृष्टभूमिक पर उनकी पहचान हो रही है।

जैसे की हाचीमोची डीएनए संकेतों को निर्धारित करने में यह देखा गया है कि वे हाइड्रोडन के अणुओं से एक दूसरे से जुड़े हुए हैं।

अलग अलग संतुलनों में इनकी भूमिका भी अलग अलग हो जाती है।

दूसरी तरफ एमिनो एसिड पर आधारित डीएनए में हरेक को अलग अलग कोड देने का काम चल रहा है।

इस क्रम में प्रारंभिक 64 कोड के बदले अब 512 कोड दिये जा चुके हैं।

जीवन की गुप्त कुंजी छिपाये काम करने वाले डीएनए की अलग अलग पहचान करने के साथ साथ

उनकी क्षमता और विशेषता को भी दर्ज किया जा रहा है।

जिसके आधार पर कई गंभीर किस्म की बीमारियों के ईलाज में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

वैज्ञानिकों ने यह पाया है कि एमिनो एसिड पर आधारित डीएनए की अलग अलग मात्रा

एक दूसरे से मिलकर अलग अलग प्रतिक्रिया करती है।

इसलिए हर मात्रा में इनकी गुणवत्ता और आचरण की पहचान करने का भी काम चल रहा है।

ताकि बाद में हर डीएनए की विशेषता की पहचान कर उन्हें जीन को नियंत्रित करने में इस्तेमाल किया जा सके।

इसलिए डीएनए की कड़ी में जो नये चार शब्द जोड़ गये है, उससे अनुसंधान की व्यापकता और बढ़ गयी है।

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