fbpx Press "Enter" to skip to content

चार दवाओं का व्यापक परीक्षण कोरोना की रोकथाम के लिए शुरु

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन की पहल पर शुरु हुआ काम

  • विभिन्न रिपोर्टों के आधार पर दवाइयों का चयन

  • सभी देशों में एक साथ व्यापक ट्रायल प्रारंभ

  • हर किस्म के रोगी पर असर का नतीजा आयेगा

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः चार दवाओं का व्यापक परीक्षण सिर्फ कोरोना से बचाव के लिए पूरी दुनिया

में किया जाने लगा है। कोरोना की रोकथाम के लिए अब तक को मान्य दवा नहीं आयी

है। चीन सहित अनेक देशों में विभिन्न दवाइयों के मिश्रण से अनेक रोगी स्वस्थ हुए हैं।

लेकिन इस रोग का प्रकोप दुनिया में फैलते जाने की वजह से अब खास इसी कोरोना की

रोकथाम के लिए चार अलग अलग दवाओं पर व्यापक परीक्षण प्रारंभ किया गया है।

जिन देशों में इससे पीड़ित मौतों का आंकड़ा बहुत ज्यादा है, वहां इन्हें व्यापक तौर पर

आजमाया जा रहा है। दूसरी तरफ जहां के मरीज अपेक्षाकृत बेहतर हालत में हैं, उनपर

भी इन दवाइयों के असर को नापा जा रहा है।

क्लीनिकल ट्रायल पूरी दुनिया में एक साथ जारी

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस व्यापक क्लीनिकल ट्रायल को सॉलिडारिटी के नाम से

प्रारंभ किया है। इसमें शोध, परीक्षण, विकास और किसी खास मिश्रण को कोरोना की

रोकथाम के लिए तैयार करने तक की विधि शामिल हैं। सारे परीक्षणों की रिपोर्ट मिलने

के बाद उसके निष्कर्ष के आधार पर ही विश्व स्वास्थ्य संगठन किसी नतीजे पर पहुंच

पायेगा।

अलग अलग देशों के अलग अलग वैज्ञानिकों ने इस कोरोना की रोकथाम के लिए

अलग अलग दवाइयों और तरीकों का खुलासा किया है। इन तमाम सूचनाओं को एक

साथ करने के बाद ही डब्ल्यू एच ओ ने चार दवाइयों की पहचान कर ली है। अब उनका

परीक्षण प्रारंभ हो चुका है। इन चारों दवाइयों के बारे में यह रिपोर्ट है कि इनसे मरीजों

को सबसे ज्यादा फायदा हुआ है। जिस दवा को इसमें सबसे ऊपर रखा गया है, उसका

उल्लेख पहले भी हो चुका है। रेमडेसिविर नाम की यह दवा एंटीवायरल है। इसे मलेरिया

के ईलाज में भी दिया जाता है। इसमें क्लोरोक्वीन और हाइड्रोक्सील क्लोरोक्वीन का

मिश्रण है। इसके अलावा एचआइवी के मरीजों के ईलाज में काम आने वाली दो दवाइयों

लोपिनाविर और रिटोनाविर को भी आजमाया जा रहा है।

चार दवाओं का चयन भी पूर्व की रिपोर्टों के आधार पर

कई देशों में इसके इस्तेमाल से रोगियों के जल्द स्वस्थ होने की रिपोर्ट मिली है। इसमें

से दक्षिण कोरिया से इन दो दवाइयों के मिश्रण का सबसे बेहतर लाभ मिलने की खबर

है। इसके साथ ही इंटरफोरॉन वेटा के प्रयोग से भी इस कोरोना वायरस को पंगु बनाने

की रिपोर्ट मिलने की वजह से उसकी भी जांच चल रही है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन को व्यापक स्तर पर यह परीक्षण इसलिए भी करना पड़ रहा है

क्योंकि कुछ दवाइयों के कुछ देशों में कोई असर नहीं होने की भी रिपोर्ट है। जैसे चीन में

एक छोटे से परीक्षण में एचआइवी की दवाइयों के मिश्रण से कोई लाभ नहीं होने की भी

सूचना है। इसलिए डब्ल्यू एच ओ मानता है कि इन तमाम सूचनाओ के आधार पर

अलग अलग देशों में और अलग अलग किस्म के मरीजों पर इनकी व्यापक जांच होनी

चाहिए। इन तमाम जांचों के बाद ही कोई नतीजा निकाल पाना संभव होगा।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मेडिकल अफसर आना मारिया हेनाओ रेस्ट्रापो ने इस बारे में

कहा है कि इस सॉलिडरिटी जांच के बाद कमसे कम रोग की रोकथाम कारगर दवाओं के

बारे में कोई ठोस नतीजा सामने आ पायेगा। दुनिया भर के हजारों मरीजों पर हो रही

जांच की रिपोर्टों का लगातार अध्ययन और विश्लेषण किया जा रहा है। ताकि जल्द से

जल्द इसका कोई आधिकारिक निष्कर्ष पूरी दुनिया के सामने पेश किया जा सके। इसी

वजह से इस परीक्षण को अलग अलग न कर पूरी दुनिया में एक साथ किया जा रहा है।

हर दवा के बारे में रिपोर्ट आने की स्थिति में अलग अलग किस्म के मरीजों पर उनके

प्रभाव को समझ पाना चिकित्सा वैज्ञानिकों के लिए ज्यादा आसान होगा।

चीन अपनी पारंपरिक जड़ी बूटी के प्रचार में जुटा 

चीन ने इस दौरान स्थिति सुधरने के तुरंत बाद यह प्रचारित करना प्रारंभ कर दिया है

कि उसकी पारंपरिक जड़ी बूटियों से भी लोगों को सबसे अधिक लाभ मिला है। लेकिन

इस दावे का खंडन करने वाले भी अनेक चीनी नागरिक मौजूद हैं। ऐसे लोगों ने जड़ी

बूटी से तैयार मिश्रण और काढ़ा पीने से इंकार कर दिया था। चीन की सरकारी एजेंसियों

का दावा है कि प्राचीन पद्धति के प्रयोग से मरीज ज्यादा जल्दी स्वस्थ हुए हैं। दूसरी

तरफ खुद इस रोग को झेल चुके कई रोगी यह दावा कर रहे हैं कि उन्हे तो एलोपैथिक

दवाइयों से भी लाभ पहुंचा है।


 

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

2 Comments

Leave a Reply