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चार जिला छोड़कर बाकी जिला सावधानी बरते

चार जिला में कोरोना वायरस का प्रकोप है। इसका सीधा अर्थ है कि झारखंड के शेष जिलों

में अब तक कोरोना का प्रकोप नहीं आया है। इसलिए इन शेष जिलों तथा देश के अन्य

कोरोना मुक्त हिस्सों के लोगों को और अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है। ऐसा

इसलिए भी है कि झारखण्ड के इन चार जिला से कोई संक्रमित गलती से दूसरे इलाके में

नहीं चला जाए और वह इलाका भी 14 दिनों के बाद संक्रमित इलाकों की सूची में शामिल

हो। चंद लोगों के स्वार्थ, कुछ लोगों की नादानी और ढेर सारी लोगों की मजबूरियों की

वजह से देश जिस संकट की स्थिति में पहुंचा है, वह आबादी के लिहाज से बहुत कम है।

हमें बार बार यह याद रखना चाहिए कि हम अत्यंत घनी आबादी वाले देश हैं और हमारे

पास चिकित्सा संसाधन भी अन्य विकसित देशों की तुलना में बहुत कम हैं। इसलिए

संक्रमण के मामले में हमें हर वक्त यह याद रखना चाहिए कि हम संक्रमित इलाकों और

लोगों से फिलहाल जितनी दूरी बनाकर रखें वह हमारे और देश के लिए भी फायदेमंद है।

इन चार जिला में संक्रमण फैलने के अलग अलग कारण है। लेकिन इसकी वजह से अकेले

रांची में जो परिस्थितियां पैदा हुई हैं, वह अभूतपूर्व है। हिंदपीढ़ी के इलाके में तबलीगी

जमात के लोगों से यह संक्रमण पहुंचा है। गनीमत है कि यह अभी तक एक मोहल्ला तक

सीमित है लेकिन खतरे की बात यह भी है कि यह भी घनी आबादी वाला इलाका है। ऐसे में

हरेक की जांच रिपोर्ट आने तक यह यकीनी तौर पर नहीं कहा जा सकता कि दरअसल यहां

संक्रमित लोगों की कुल संख्या कितनी है। जितना दिन बीत रहा है कोरोना पीड़ितों की

संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है।

चार जिला छोड़कर तो शेष राज्य कोरोना मुक्त है

चार जिला को छोड़कर शेष झारखंड अगर कोरोना मुक्त है तो उन सभी जिलों में 

जनजीवन शीघ्र सामान्य होने की उम्मीद की जा सकती है। लेकिन यह तो स्थानीय लोगों

की ही जिम्मेदारी बनती है कि वे बाहरी संक्रमण को अंदर आने से रोके। यह जिम्मेदारी

अकेले सरकार के भरोसे नहीं छोड़ी जा सकती है। कोरोना के प्रभावित लोगों की संख्या अब

देश में तेजी से बढ़ती जा रही है। इससे यह स्पष्ट है कि देश में झारखंड के तीन जिला की

तरह ही किसी वजह से संक्रमण फैला है। अब उसे खास इलाके तक नियंत्रित रखने का

प्रयास युद्ध स्तर पर किया जा रहा है, जिसमें जन सहभागिता जरूरी है। अगर लोग इस

काम में सहयोग नहीं करेंगे, तो अकेले सरकार के भरोसे यह काम नहीं हो सकता। दूसरी

तरफ अगर संक्रमण और अधिक फैलता रहा तो जाहिर है कि देश के अन्य सुरक्षित भाग

भी आज नहीं तो कल इसकी चपेट में आ ही जाएंगे। इससे बचाव के तौर तरीकों की

जानकारी हरेक नागरिक को अब तक हो चुकी है। इसलिए भी इन सभी जिला के अलावा

भी शेष इलाकों में यह सावधानी जरूरी है। हमें इसे समझ लेना होगा कि वर्तमान में

लॉक डाउन की वजह से जो व्यापारिक गतिविधियां बंद हुई हैं, उसका असर कोरोना

समाप्त होने के बाद भी जारी रहेगा। इसलिए यह जरूरी है कि जितनी जल्दी हो सके

जनजीवन पटरी पर लौटे और आर्थिक पहिया फिर से घूमना प्रारंभ करें। रोज कमाने-खाने

वालों के बहुमत को भी तमाम योजनाओं से दो वक्त की रोटी मिल रही है। लेकिन इनके

अलावा भी ग्रामीण इलाकों में अनेक ऐसे लोग हैं, जिनकी कमाई बंद होने के बाद उन्हें

ऐसी योजनाओं अथवा अन्य सामाजिक संगठनों की मदद का कोई लाभ नहीं पहुंच पा रहा

है। उनका ध्यान रखे बिना हम संकट को रोक नहीं पायेंगे।

दूर दराज के भूखों का भी ख्याल रखना होगा

ऐसे में जनजीवन सामान्य होने के बाद ही इन परिवारों को फिर से भोजन उपलब्ध हो

पायेगा। हमारी जिम्मेदारी देश के ऐसे नागरिकों के प्रति भी है, जो हमारी पहुंच से दूर हैं

लेकिन वह देश के नागरिक हैं तथा इस वक्त शायद भूखे भी हैं। कोरोना संक्रमण को

जितने कम दायरे में रोका जा सके, यही देश के हित में है। सीमित इलाकों तक कोरोना

संक्रमण होने के बाद वहां के लोगों की जांच और ईलाज का काम आसान हो जाएगा।

सरकारी और गैर सरकारी स्तर पर कोरोना के खिलाफ जो युद्ध जैसी तैयारी है, वह तभी

सफल होगी जब कोरोना का फैलना हम रोक सकें। इसलिए तीन जिला अगर संक्रमित हैं

तो उन तीन जिला में संक्रमणग्रस्त इलाकों की पूरी गहन जांच के साथ साथ यह अन्य

इलाकों तक नहीं फैले, इस पर ध्यान देना भी आम जनता की जिम्मेदारी है। हिंदपीढ़ी के

संक्रमित होने की वजह से प्रशासन ने वहां के लिए 72 घंटे और नाकाबंदी की अवधि बढ़ायी

है। इस अवधि में वहां के तमाम लोग खुद ही जांच के दायरे में आ जाए और उनकी जांच

रिपोर्ट आ जाए तो संक्रमण के भौगोलिक तथा जैविक विस्तार को समझ पाना आसान

होगा।


 

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