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बिहार नहीं बंगाल में भी भाजपा के खिलाफ मोर्चाबंदी करेंगे

रांचीः बिहार नहीं बंगाल में भी भाजपा के खिलाफ मोर्चाबंदी करेंगे । पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध

कांत को बिहार चुनाव में केंद्रीय नेताओं के साथ अचानक से बड़ी जिम्मेदारी मिलने के

बाद कई नेताओं के चेहरे उतर गये हैं। दरअसल इनदिनों प्रदेश की राजनीति में कम

हस्तक्षेप कर रहे सुबोध कांत प्रदेश की राजनीति से खुद को दूर रखकर चल रहे हैं। उन्हें

बिहार चुनाव के लिए गठित समिति में स्थान दिये जाने की वजह से यह स्पष्ट हो गया है

कि केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष उनकी भूमिका अब भी जिम्मेदारी वाली है। इसी वजह से उन्हें

बिहार चुनाव में भी जिम्मेदारी सौंपी गयी है। झारखंड से बिहार चुनाव के लिए जिम्मेदारी

पाने वाले वह एकमात्र कांग्रेसी नेता है। इस फैसले ने भी फिर से यह स्पष्ट कर दिया कि

राष्ट्रीय राजनीति के परिदृश्य में आज भी पूर्व केंद्रीय मंत्री और रांची के पूर्व सांसद का

औचित्य न सिर्फ कायम है बल्कि बड़े नेता अब भी उनकी कार्यक्षमता को दूसरों से ज्यादा

महत्वपूर्ण आंकते हैं।

झारखंड की राजनीति में कम भाग ले रहे हैं इनदिनों

हाल के दिनों में प्रदेश की राजनीति में नियमित दखल नहीं देने की वजह से कांग्रेस का

एक गुट उनके खिलाफ प्रचार में भी जुटा हुआ था। दरअसल कांग्रेस कार्यसमिति में स्थान

नहीं मिलने के बाद से ही यह दुष्प्रचार प्रारंभ हुआ था। दरअसल गुटबाजी की बीमारी से

पीड़ित कांग्रेस का एक खेमा लगातार यह प्रचार करता रहा है कि दरअसल राहुल गांधी से

उनकी नहीं पटती है। इसी वजह से लोकसभा टिकट के मामले में भी बार बार उनका नाम

देर से जारी किया जाता रहा है। लेकिन अब बिहार विधानसभा जैसे महत्वपूर्ण चुनाव में

झारखंड के अकेले नेता के तौर पर उन्हें जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद इन तमाम किस्म

की अटकलबाजियों पर विराम लग गया है। इससे स्पष्ट हो गया है कि श्रीमती सोनिया

गांधी अब भी उन्हें विश्वसनीय मानती हैं। जिस समिति में सुबोध कांत को जगह दी गयी

है उसमें मीरा कुमार, तारिक अनवर, शत्रुघ्न सिन्हा, शकील अहमद, संजय निरुपम, कीर्ति

आजाद, कैप्टन अजय यादव जैसे नेता शामिल हैं।

बिहार के दौरे पर चले जाएंगे पूर्व केंद्रीय मंत्री कुछ दिनों के भीतर ही

इस बारे में पूर्व केंद्रीय मंत्री के निकटस्थ लोगों ने बताया है कि वह अगले कुछ दिनों के

भीतर ही बिहार के दौरे पर चले जाएंगे। इस बीच उन्होंने बिहार के साथ साथ बंगाल के

चुनाव में भी मोर्चा पर पूरी मुस्तैदी के साथ तैनात होने की बात कही है। प्रदेश की

राजनीति में नियमित दखल नहीं देने के मुद्दे पर उनके निकटस्थ लोगों से उन्होंने कहा है

कि तीन साल तक लगातार लड़ाई लड़ने के बाद भाजपा की सरकार को परास्त करने में

सफलता मिली है। मिशन भी भाजपा की सरकार को उखाड़ फेंकना था।उसके बाद की

गतिविधियों में हस्तक्षेप करना अब कोई आवश्यक नहीं है। सरकार ठीक ठाक तरीके से

काम कर रही है। वह तो बिहार के साथ साथ पश्चिम बंगाल में होने वाले चुनाव के लिए भी

खुद को तैयार कर रहे हैं। इन दोनों ही राज्यों में इस बार कांग्रेस का प्रदर्शन पूर्व के मुकाबले

अधिक बेहतर होने की उम्मीद जतायी जा रही है।


 

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