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छोड़ो कल की बातें कल की बात पुरानी .. … ….

छोड़ो कल की बातें कल यानी पिछला साल। वर्ष 2020 हम सभी के लिए किसी बहुत बुरे

सपने की तरह रहा। वह भी ऐसा भयानक जिसकी कल्पना किसी ने शायद नहीं की थी।

वइसे इससे अपुन के दिमाग की बत्ती जल गयी है कि अगर दुनिया में जैविक हथियार हैं

तो उनका इस्तेमाल हुआ तो कइसा होगा। भाई लोग संभल जाओ क्योंकि हम बारूद ही

नहीं बल्कि जैविक हथियारों की भी ढेर पर बैठे हुए हैं। एक दूसरे को पछाड़ने के लिए अब

तो अंतरिक्ष के लिए भी अलग से फौज बनने लगी है। भाई कभी सोचा भी है कि इस सोच

का सबसे अंतिम परिणाम क्या होगा। इस दुनिया में अकेला इंसान कितने दिनों तक

जीवित रहेगा। वइसे भी देख रहे हो कि सूरज में भी लॉकडाउन है क्या पता अचानक सूरज

रूठ जाए और कह दे लो भाई मै तो सन्यासी आदमी हूं। अपना झोला उठाये और कहीं और

चला जाए। फिर क्या होगा। वैज्ञानिक पहले ही इसकी कल्पना कर बता चुके हैं कि अगर

किन्हीं कारणों से सूरज अचानक गुल हो जाए तो सूरज की किरणों से आने वाला ताप भी

बंद हो जाएगा। इससे हमारी धरती महज आठ मिनट के बाद ही शून्य से दो सौ डिग्री नीचे

के तापमान में चली जाएगी। हमलोग चलते चलते पहले बर्फ का पुतला बनेंगे और हल्की

सी हवा के झोंके में रेत की तरह भरभरा कर गिर जाएंगे। इसलिए छोड़ो कल की बातें। नया

और बेहतर क्या हो सकता है, इस पर बात चीत हो तो अच्छा है। इसी बात पर पहले एक

अच्छी सी गीत की याद दिला देता हूं। फिल्म हिंदुस्तानी का यह गीत प्रेम धवन ने लिखा

था और उसेसंगीत में ढाला था उषा खन्ना ने। इस गीत को मुकेश कुमार ने अपना स्वर

दिया था। गीत के बोल कुछ इस तरह हैं।

छोड़ो कल की बातें, कल की बात पुरानी

नए दौर में लिखेंगे, मिल कर नई कहानी, हम हिंदुस्तानी, हम हिंदुस्तानी

आज पुरानी ज़ंजीरों को तोड़ चुके हैं, क्या देखें उस मंज़िल को जो छोड़ चुके हैं

चांद के दर पर जा पहुंचा है आज ज़माना नए जगत से हम भी नाता जोड़ चुके हैं

नया खून है नई उमंगें, अब है नई जवानी हम को कितने ताजमहल हैं और बनाने

कितने हैं अजंता हम को और सजाने अभी पलटना है रुख कितने दरियाओं का

कितने पवर्त राहों से हैं आज हटाने? आओ मेहनत को अपना ईमान बनाएं

अपने हाथों से अपना भगवान बनाएं 

राम की इस धरती को गौतम कि भूमि को सपनों से भी प्यारा हिंदुस्तान बनाएं?

दाग गुलामी का धोया है जान लुटा के दीप जलाए हैं ये कितने दीप बुझा के
ली है आज़ादी तो फिर इस आज़ादी को रखना होगा हर दुश्मन से आज बचा के?

हर ज़र्रा है मोती आँख उठाकर देखो मिट्टी में सोना है हाथ बढ़ाकर देखो
सोने कि ये गंगा है चांदी की जमुना चाहो तो पत्थर पे धान उगाकर देखो

छोड़ो कल की बातें

चलिए छोड़ देते हैं हमलोग तो आपलोग भी तो जिद छोड़िये

तो भइया छोड़ो कल की बातें का यह फार्मूला तो अब सीधे प्रधानमंत्री जी पर भी लागू होता

है। यह जाहिर हो चुका है कि तीनों कृषि बिल उनकी निजी सोच या इस साल में कहें तो

जिद की वजह से फंसा हुआ है। अइसी क्या परेशानी है कि झगड़ा टालने के लिए पहले

बिल को तीन महीने के लिए स्थगित करते हुए किसानों से विशेषज्ञों की चर्चा की बात

करें। जब पाकिस्तान जैसे दुश्मन देश से हम लगातार बात चीत कर सकते हैं तो यह तो

अपने ही देश के किसान हैं जो इस कड़ाके की ठंड में दिल्ली की सीमा में पड़े हुए हैं। इतनी

जिद किस बात की। अइसा कर तो मोदी जी आप इस आरोप को कहीं न कहीं सही साबित

कर रहे हैं कि यह बिल दरअसल दूसरों के कहने पर लाया गया है। अपनी सोच है तो देश

चलाना भी आपकी जिम्मेदारी है। हमारे जैसे कम समझदार इसके नुकसान को समझ रहा

है तो आप तो राजनीति के धुरंधर खिलाड़ी है। कई राज्यों के गांव देहात में भाजपा के

नेताओं का जाना मुश्किल हो गया है। लोग खदेड़ रहे हैं। अइसा ही रहा तो दिल्ली के बाहर

निकलना भी शायद मुश्किल हो जाएगा।

राजनीति में दो कदम आगे और चार कदम पीछे तो चलता रहता है

राजनीति में कई ऐसे मोड़ हाल के दिनो में आये हैं, जिन्होंने देश की राजनीति को नई

दिशा दी है। पहला दौर बाबा रामदेव के शांतिपूर्ण आंदोलन पर पुलिस के लाठी चार्ज का।

कांग्रेसी भले ही तब बहुत खुश हो रहे थे लेकिन देश की जनता क्या सोच रही थी, उसका

पता तो अन्ना हजारे के आंदोलन में चल गया। अन्ना के आंदोलन के बारे में प्रतिकूल

टिप्पणी करने वाले कांग्रेसी आज पर्दे के पीछे जा चुके हैं। अन्ना आंदोलन की वजह से

कांग्रेस का क्या हाल पूरे देश में हुआ है, यह तो हरेक को दिख रहा है। उसके बाद आते हैं

जेएनयू के छात्र आंदोलन और कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी का। जो कुछ कहना और

करना था वह तो भाजपा वालों ने कर लिया। लेकिन जेल से छूटने के बाद कन्हैया कुमार

का जेएनयू में दिया गया एक भाषण अनेक नेताओं को कौड़ी का तीन बना गया। उस दौर

की मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी अब भाजपा में बहुत कम नजर आती हैं। इसलिए

मोदी जी जनता को गुलाम मत समझिये। जो हुआ उस पर पानी डालिये और खेत से

अनाज उगाने वालों को इतना नाराज मत कीजिए कि वे आपके लिए नफरत का बीज बो

दें। बाकी बातें छोड़िये क्योंकि गीत ही है कि छोड़ो कल की बातें, कल की बात पुरानी।

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