कुंभ और साधु विदेशियों के लिए भी कौतुहल की वजह बने

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कुंभनगर: कुंभ में मौनी अमावस्या विदेशी मीडिया और सैलानियों को अचरज में डालने के लिये पर्याप्त थी।

संगम की रेती में रविवार रात से ही आस्था का समंदर हिलोरें मारने लगा था

जो सोमवार सुबह होते होते जनसैलाब में तब्दील हो चुका था।

हर हर गंगे के उदघोष के साथ संगम में डुबकी लगाने का सिलसिला लगातार जारी रहा।

नागाओं ने संगम में डुबकी लगाने के बाद भस्म का लेप किया वहीं सजे धजे रथों में सवार विभिन्न अखाड़ों के मठाधीशों ने अपने अनुयायियों के साथ संगम में स्रान किया।

त्रिशूल,तलवार और अन्य शस्त्रों से सुसज्जित नागाओं और बाबाओं की दिव्यता भोर की बेला में अद्धुत चमक बिखेर रही थी।

डेनमार्क से आये सैलानी रिचर्ड हैनरी ने कहा ‘‘ कुंभ वाकई लाजवाब है। आस्था का कोई जवाब नहीं।

नदियों के प्रति भारतीयों का सम्मान और श्रद्धा देखने के काबिल है।

यह भारतीय संस्कृति की विविधता को दर्शाने के लिये काफी है।

मैं इस बार अकेला आया हूं। उम्मीद करता हूं कि अगली बार मेले में परिवार भी साथ आ सके। ’’

चीन से पधारे दंपत्ति हे कू जियान ने कहा ‘‘ नागा साधु वास्तव में शोध का विषय है।

उनका मस्त मौला अंदाज हर एक से जुदा है। कुंभ के मौके पर दूसरी बार भारत आने का मौका मिला है।

नदी के तट पर होने वाला यह धार्मिक आयोजन काबिल-ए-तारीफ है वहीं सुरक्षा इंतजामों के लिये यहां की सरकार और सुरक्षा एजेंसियां बधाई के पात्र हैं।

इतने विशाल आयोजन को मुकाम तक पहुंचाना कतई आसान नहीं है।

भारतीयों की मेजबानी और हौसले का उनका परिवार तहे दिल से शुक्रिया अदा करना चाहता है। ’’

कुंभ की महिमा को अद्धुत मानते हैं विदेशी पर्यटक

श्रीलंका के अरविंद डी सिल्वा ने कहा कि ‘अनेकता में एकता’ का प्रतीक कुंभ की महिमा का वर्णन करना असंभव है।

यह एक बेमिसाल आयोजन है जो भारतीय संस्कृति की विविधता को दर्शाता है।

मेला क्षेत्र में सफाई और अन्य सुविधाये बेमिसाल है। इसके लिये भारत सरकार बधाई की पात्र है।

श्रीलंका और भारत पौराणिक रूप से भी जुड़े हैं और दोनो देशों के बीच सांस्कृतिक सद्भाव दुनिया को एकजुट रखने में मदद करेगी।

शोभा यात्रा के बीच में फोटो जर्नलिस्ट अपने काम को अंजाम दे रहे थे जिसे साधु संत प्रोत्साहित भी करते दिखायी पड़े।

कई साधुओं के हाथों में मोबाइल फोन थे जिससे वह सेल्फी लेते भी दिखायी पड़े

वहीं कई साधु संतों ने विभिन्न मुद्रायें धारण कर फोटोग्राफरों का काम आसान कर दिया।

कुंभ की कवरेज करने आये कई विदेशी पत्रकार बात करते दिखायी पड़े कि

इतने बड़े हुजूम की सुरक्षा वाकई चुनौती भरी थी जबकि देश के कोने कोने से आये श्रद्धालु

सुरक्षाबलों के हौसलों और सरकार के इंतजामों की दाद देते हुये कह रहे थे कि

मेले में आये भक्तों की सुरक्षा की जिम्मेदारी तो पतित पावनी गंगा मईया निभा रही है।

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