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खाद्य प्रसंस्करण को प्रोत्साहन या कोई गुप्त एजेंडा

खाद्य प्रसंस्करण के लिए केंद्र सरकार ने फिर से बड़े पैकेज का एलान किया है। देश में

गति पकड़ते किसान आंदोलन के बीच खाद्य प्रसंस्करण के लिए अतिरिक्त बजटीय

प्रावधान स्वाभाविक तौर पर सवाल खड़े कर रहा है। किसान आंदोलन के दौरान पहले ही

किसान नेताओं ने यह आरोप लगाया है कि कृषि कानून दरअसल कुछ उद्योगपतियों को

फायदा पहुंचाने के लिए लाया गया है। इनमें से अडाणी समूह द्वारा खाद्य पदार्थों के

भंडारण और प्रसंस्करण के लिए पहले से ही तैयार किये जाने की पुष्टि भी हो चुकी है।

बताते चलें कि यह स्थिति तब है जबकि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को कहा

कि सरकार पीपीएफ तथा एनएससी जैसी छोटी बचत योजनाओं में की गई बड़ी कटौती

वापस लेगी और कहा कि ऐसा गलती से हो गया था। हालांकि, माना जा रहा है कि पश्चिम

बंगाल, असम और तीन अन्य राज्यों में चल रहे विधानसभा चुनावों में भाजपा को किसी

नुकसान से बचाने के लिए ब्याज दरों में कटौती का निर्णय वापस लिया गया। छोटी बचत

योजनाओं में निवेश करने वाले लोगों को झटका देते हुए सरकार ने बुधवार को लोक

भविष्य निधि (पीपीएफ) और एनएससी (राष्ट्रीय बचत प्रमाण पत्र) समेत लघु बचत

योजनाओं पर ब्याज दरों में 1.1 प्रतिशत तक की कटौती की थी। इसके एक दिन बाद

गुरुवार को यह फैसला उस समय वापस लेने का ऐलान किया गया, जब पश्चिम बंगाल में

दूसरे चरण के मतदान हो रहे हैं। आज ही नंदीग्राम सीट पर भी मतदान है, जहां से पश्चिम

बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चुनाव लड़ रही हैं।

खाद्य प्रसंस्करण की बात ब्याज दर विवाद के क्रम में

सीतारमण ने बृहस्पतिवार सुबह ट्वीट किया, भारत सरकार की छोटी बचत योजनाओं पर

ब्याज दर वही रहेगी जो 2020-2021 की अंतिम तिमाही में थी, यानी जो दरें मार्च 2021

तक थीं। पहले दिया गया आदेश वापस लिया जाएगा। वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के

अनुसार, पीपीएफ पर ब्याज 0.7 प्रतिशत कम कर 6.4 प्रतिशत जबकि एनएससी पर 0.9

प्रतिशत कम कर 5.9 प्रतिशत कर दी गयी थी। लघु बचत योजनाओं पर ब्याज तिमाही

आधार पर अधिसूचित की जाती है।

ब्याज में सर्वाधिक 1.1 प्रतिशत की कटौती एक साल की मियादी जमा राशि पर की गयी

थी। इस पर ब्याज 5.5 प्रतिशत से कम करके 4.4 प्रतिशत करने का फैसला किया गया

था। छोटी बचत योजनाओं के लिए ब्याज दरों को तिमाही आधार पर अधिसूचित किया

जाता है। पुरानी दरें बहाल होने के बाद पीपीएफ और एनएससी पर क्रमश: 7.1 प्रतिशत

और 6.8 प्रतिशत की दर से वार्षिक ब्याज मिलता रहेगा। इस तरह सुकन्या समृद्धि योजना

के लिए 7.6 प्रतिशत ब्याज मिलता रहेगा, जबकि पहले इसे घटाकर 6.9 प्रतिशत करने की

बात कही गई थी। पांच वर्षीय वरिष्ठ नागरिक बचत योजना के लिए ब्याज दर 7.4

प्रतिशत पर बरकरार रखी जाएगी। वरिष्ठ नागरिकों की योजना पर ब्याज का भुगतान

त्रैमासिक आधार पर किया जाता है।

बचत जमा पर ब्याज दर चार प्रतिशत होगी, जबकि इसे घटाकर 3.5 प्रतिशत करने का

प्रस्ताव था। इसके बीच ही केंद्रीय मंत्रिमंडल ने खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए बहुप्रतीक्षित

उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना को आज मंजूरी दे दी। इससे डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ

से जुड़ी भारतीय कंपनियों के तेजी से विकास करने का रास्ता साफ हो गया है।

इस योजना का लाभ लेने तैयार बैठी हैं बड़ी कंपनियां

10,900 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि के साथ इस योजना का उद्देश्य स्थानीय उत्पादन

और चार श्रेणियों में खाद्य पदार्थों के निर्यात को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही नवोन्मेषी

उत्पादों और इस क्षेत्र के लघु एवं मझोले उपक्रमों (एसएमई) को विशेष सहायता प्रदान

करना है। इस योजना के लिए 2021-22 को आधार वर्ष माना गया है और सरकार का

लक्ष्य 2027-28 तक उत्पादन में 33,494 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वृद्धि हासिल करना है।

इससे 2026-27 तक करीब 2.50 लाख रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। शुरुआत में चार

प्रमुख श्रेणियों में रेडी टू ईट और/या रेडी टू कुक, प्रसंस्कृत फल एवं सब्जियां, समुद्री खाद्य

उत्पादों और मॉत्सरेेला चीज को तव्वजो दी जाएगी। इसके तहत विनिर्माताओं को उनकी

निवेश और संवर्धित बिक्री की प्रतिबद्घता के आधार पर प्रोत्साहन दिया जाएगा।

नवोन्मेषी और अंडे तथा पोल्ट्री मांस के जैविक उत्पादों वाले एसएमई को भी इस योजना

का लाभ मिलेगा। स्थानीय विनिर्माताओं को विदेशी बाजारों में ब्रांड विकसित करने तथा

विपणन पहल के लिए 1,500 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। इस योजना की घोषणा करते हुए

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि इस योजना में रोजगार के अवसर पैदा करने की

भी क्षमता है। इसका लक्ष्य किसानों को उनकी उपज के बेहतर दाम दिलाना और कृषि

उपज की बरबादी को कम करना है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि नेस्ले,

मदर डेयरी, अमूल, आईटीसी, हिंदुस्तान यूनिलीवर, कैलॉग्स जैसी कई घरेलू और वैश्विक

कंपनियों ने इस योजना में भागीदारी करने में दिलचस्पी दिखाई है। इसलिए यह सवाल

स्वाभाविक है कि केंद्र सरकार ने आखिर किसके लिए यह दरियादिली दिखायी है।

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