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कृषि पर ध्यान रहे यह सभी सरकार के लिए अच्छी बात




कृषि पर ध्यान दिये बिना भारत अपनी विशाल अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को कतई हासिल नहीं कर सकता।

दरअसल प्राचीन अर्थव्यवस्था की संरचना को गंभीरता से समझने पर यह स्पष्ट हो जाता है कि

गुप्तवंश के शासन काल में भारतीय अर्थव्यवस्था इतनी विकसित क्यों थी।

पूर्व के गौरवशाली इतिहास को नकारने वाले लोग यह दलील दे सकते हैं कि

तब से अब तक पूरी दुनिया में काफी विकास हो चुका है।

लेकिन जहां तक अर्थव्यवस्था का सवाल है तो वह आज भी अपरिवर्तित ही है।

कारोबारी तेजी, उत्पादन, बाजार और बिक्री इन्हीं चंद मुद्दों से अर्थव्यवस्था को गति मिलती है।

भारत ने पिछले तीन दशकों में औद्योगिक विकास के माध्यम से इसे तेज करने का प्रयास किया है।

भले ही इससे भारतीय औद्योगिक विकास की गाड़ी तेजी से आगे बढ़ी हो लेकिन उसके दूसरे आयाम भी हैं।

जैसे जैसे औद्योगिक गतिविधियों में बड़ी मशीनों का उपयोग बढ़ा, लोगों के लिए औद्योगिक विकास रोजगार का साधन नहीं रहा।

अब एक सौ लोगों के बदले का काम एक मशीन और उसका एक कुशल संचालक ही कर लेता है।

इससे औद्योगिक उत्पादन की लागत कम होती है।

लेकिन अगर देश को आगे बढ़ाना है तो देश के लोगों को भी आगे बढ़ाना होगा।

वरना ऐसी कोई कल्पना कभी मूर्त रुप नहीं ले सकती।

उपराष्ट्रपति श्री एम वेंकैया नायडू ने रांची में भी दूसरे तरीके से यही बातें कही।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि कृषि का क्षेत्र प्रकृति पर आधारित है।

कृषि पर ध्यान देश की तरक्की के लिए जरूरी है

लेकिन किसानों को एक मजबूत आधार प्रदान करने हेतु फसल बीमा योजना, सिंगल विंडो सिस्टम के साथ साथ किसानों के हित मे कई योजनाएं संचालित हैं।

कृषि के क्षेत्र में गुणात्मक परिवर्तन होना बेहद जरूरी है।

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि आज खुशी का दिन है।

झारखंड के मेरुदंड किसान भाई बहनों  13 लाख 60 हजार 380 किसानों के खाते में

आज प्रथम किस्त के तहत 442 करोड़ रुपये भेज दिए गए हैं।

किसान भाई के लिए उक्त राशि कृषि कार्य हेतु जरूरी संसाधन जुटाने में सहायक होगा।

यह सब किसानों के सशक्तिकरण हेतु किया जा रहा है।

क्योंकि राज्य के 76% लोग ग्रामीण क्षेत्र में निवास करते हैं कुल भूमि का 68 प्रतिशत कृषि

एवं संबंधित कार्य पर आधारित है, करीब 83 प्रतिशत खेत 5 एकड़ से कम आकार के हैं जो कुल भूमि का 37 प्रतिशत है।

राज्य के किसान आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण कर्ज के जल में घिर जाते हैं।

यही वजह है कि केंद्र व राज्य सरकार ने कृषि पर ध्यान देते हुए

2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने का संकल्प लिया है।

इसी संकल्प को मूर्तरूप देने हेतु राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री कृषि आशीर्वाद योजना लागू की गई, जिसका आज शुभारंभ किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिसंबर 2019 तक राज्य के 35 लाख किसानों को केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री

कृषि सम्मान निधि योजना के तहत 2 हजार करोड़ एवं राज्य सरकार की मुख्यमंत्री कृषि आशीर्वाद योजना के तहत

3 हजार करोड़ यानी 5 हजार करोड़ रुपये दिए जाएंगे।

किसानों को हर तरह की सुविधा और संरक्षण के लिए सरकार प्रयासरत

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को विपरीत परिस्थितियों में हुई फसल की क्षति की भरपाई करने हेतु प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना भी चलाई जा रही है।

किसानों को यह जानकर खुशी होगी कि वर्ष 2018 से इस योजना में प्रीमियम का भुगतान राज्य सरकार द्वारा किया जा रहा है। किसानों को इसके लिए कोई भुगतान नहीं करना पड़ता है।

वर्ष 2018 में खरीफ मौसम में फसल के बीमा करने हेतु सरकार द्वारा लगभग 64.00 करोड़ रुपये का भुगतान किसानों के प्रीमियम मद में किया गया और 2019 में 70 करोड़ रुपये का प्रावधान बीमा के लिए किया गया है।

कृषि पर ध्यान देने के लिए ही किसानों के ऋण भार को कम करने के लिए सरकार द्वारा

ब्याज अनुदान योजना चलाई जा रही है।

इस योजना में कृषकों को कृषि कार्य हेतु दिए गए अल्पकालीन कृषि ऋण पर कृषि ऋण के भुगतान में अतिरिक्त 3 प्रतिशत का सूद माफ किया जाता है।

इस योजना हेतु राज्य सरकार द्वारा 2019 में 20 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।

इन घोषणाओँ को पूरे देश में ईमानदारी से लागू किये जाने की जरूरत है।

इसकी बदौलत हमारा गांव मजबूत होगा।

कृषि आधारित अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा विकास की अंतिम कड़ी गांव में सीधे पैसे का प्रवाह बढ़ना होता है।

जब अपने माध्यमों से गांव इस तरीके से आर्थिक संसाधन जुटाने लगें तो वहां से चलकर पैसा ऊपर तक आता है।

इससे बाजार में तेजी आती है और आर्थिक गतिविधियों का प्रवाह बढ़ता है।

हमें यह समझ लेना चाहिए कि रोजगार देने जैसी बड़ी चुनौती का सामना भी यह देश कृषि के क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ाकर ही कर सकता है।

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